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अमेठी: प्रख्यात साहित्यकार जगदीश पीयूष का निधन, मुंशीगंज स्थित निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली

Sat, 06 Feb 2021 03:37 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमेठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमेठी Published by: ishwar ashish Updated Sat, 06 Feb 2021 03:37 PM IST
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Sahityakar Jagdish Piyush Passes away.
प्रख्यात साहित्यकार जगदीश पीयूष - फोटो : amar ujala

प्रख्यात साहित्यकार जगदीश पीयूष का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। 71 वर्ष के पीयूष कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। अपने जीवनकाल में पीयूष देश विदेश में कई सम्मानों से अलंकृत किए गए।

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पीयूष के निधन के साथ अमेठी में साहित्य जगत के एक युग का अंत हो गया। छह अगस्त 1950 को जिले के संग्रामपुर ब्लॉक के कसारा गांव के एक साधारण किसान परिवार में पैदा हुए जगदीश प्रसाद पांडेय 'पीयूष' पिछले कई दशकों से शहर में ही रहते थे।
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पीयूष की गिनती जिले के संभ्रांत लोगों में होती थी। पढ़ाई के दिनों से ही साहित्य साधना व सृजन में जुटे रहने वाले पीयूष पहले संजय गांधी व बाद में राजीव गांधी के बेहद करीबी रहे। वे राजीव गांधी के मीडिया प्रतिनिधि भी रहे।
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80 के दशक में साहित्य के साथ राजनीतिक क्षेत्र के देश के तकरीबन सभी बड़े आयोजनों में पीयूष की मौजूदगी होती थी। पीयूष ने साहित्य जगत विशेषकर अवधी साहित्य सृजन के क्षेत्र में बड़ा काम किया।

असाधारण प्रतिभा के धनी पीयूष पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्हें पहले लखनऊ के मेदांता व फिर जिले के मुंशीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान शुक्रवार रात 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। पीयूष के निधन से जिले में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।

पीयूष का साहित्य सृजन

अपने जीवनकाल में पीयूष ने साहित्य के सभी क्षेत्रों में प्रतिभा का लोहा मनवाया। पीयूष ने सुयोधन व तथागत (खंडकाव्य), गांधी और दलित नवजागरण, मेरा भारत महान, गांधी गांधी गांधी तथा पानी पर हिमालय (हिंदी कविता संग्रह) व अंधरे के हांथ बटेर (अवधी कविता संग्रह) की रचना की साथ ही उन्होंने 10 खंड में अवधी ग्रंथावली (लोकगीत, प्राचीन कविताएं, समकालीन कविताएं, लोक कथाएं, शब्द कोष, लोकोक्ति कोष, ऋतु गीत, विमर्श खंड, लोकनाट्य) के अलावा किस्से अवध के, अवधी साहित्य सर्वेक्षण और समीक्षा, अवधी साहित्य के सरोकार, लोक साहित्य के पितामह, बोली बानी (14 अंक अनियतकालीन पत्रिका), लोकायतन का संपादन भी किया।

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