सिपाही भर्ती पर अखिलेश सरकार के फैसले को बदलेगी योगी सरकार
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योगी सरकार पूर्व की अखिलेश सरकार के एक और निर्णय को पलटने जा रही है। यूपी में महज शारीरिक दक्षता के आधार पर सिपाहियों की भर्ती नहीं हो सकेगी। यानी अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा देना अनिवार्य होगा। इसके लिए शासन नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है।
मगर, यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है और इस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। लिहाजा सरकार को कोर्ट के फैसले का इंतजार है।
बता दें, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 35 हजार सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट तैयार कर अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा लेकर चयन किया जाना था।
इसके लिए कुल 21 लाख आवेदन मिले, लेकिन कुछ लोगों ने मेरिट के आधार होने वाली भर्ती को मुद्दा बनाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में इसके खिलाफ गुहार लगाई। फिलहाल इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने फैसला को सुरक्षित रख लिया है।
लिखित परीक्षा के साथ ही और पारदर्शी होगी भर्तियां
रविवार को पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारियों ने डीजीपी सुलखान सिंह को पूरी स्थिति से अवगत कराया। कहा, लिखित परीक्षा को खत्म करने की पीछे भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी और खर्च को कम करने की मंशा थी।
डीजीपी सुलखान सिंह ने संकेत दिए हैं कि लिखित परीक्षा को बहाल करते हुए भर्ती प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जाएगा।
इसके लिए उन्होंने पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारियों को एक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सरकार की ओर से जारी संकल्प पत्र के आधार पर पुलिस भर्ती प्रक्रिया को पूरी की जा सके।