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यूपी: आखिरी पांच वर्षों में से 36 माह की एसीआर नहीं तो रुक जाएगी पदोन्नति, नियमों में हुआ बदलाव
Tue, 28 Sep 2021 10:21 AM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 28 Sep 2021 10:21 AM IST
सार
यूपी के मुख्य सचिव ने कार्मिकों की पदोन्नति से संबंधित नियमों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पदोन्नति के लिए सामान्य व्यवस्था के अलावा 10 वर्षों की प्रविष्टियों के आधार पर वर्गीकरण के समय देखा जाए कि अंतिम 5 वर्षों में 36 माह की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियां जरूर पूर्ण हों। अन्यथा की दशा में पदोन्नति पर विचार स्थगित रखा जाए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
विस्तार
कार्मिकों की पदोन्नति पर विचार के समय यदि आखिरी पांच वर्षों में से तीन की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियां पूरी नहीं हुईं तो पदोन्नति रोक दी जाएगी। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
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प्रदेश में कर्मचारियों की पदोन्नति पर विभागीय चयन समिति (डीपीसी) विचार करती है। समिति 120 माह (10 वर्ष) में 72 माह से अधिक की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियों के पूर्ण होने पर ही पात्रता सूची में शामिल अधिकारियों का वर्गीकरण करती है। प्रविष्टियां पूरी न होने पर चयन को रोक दिया जाता है।
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मुख्य सचिव ने कहा है कि पदोन्नति की सामान्य व्यवस्था के अलावा 10 वर्षों की प्रविष्टियों के आधार पर वर्गीकरण के समय देखा जाए कि अंतिम 5 वर्षों में 36 माह की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियां जरूर पूर्ण हों। अन्यथा की दशा में पदोन्नति पर विचार स्थगित रखा जाए।
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इस तरह 72 माह की प्रविष्टियां तो अब भी आवश्यक हैं, लेकिन आखिरी पांच वर्ष में तीन की प्रविष्टियों की उपलब्धता अनिवार्य कर दी गई है। बताया जा रहा है कि पीसीएस से आईएएस संवर्ग में पदोन्नति के समय आखिरी पांच वर्षों की वार्षिक मूल्यांकन प्रविष्टियां देखी जाती हैं। यह व्यवस्था उसी हिसाब से आगे बढ़ाई गई है। पदोन्नति के समय नवीनतम प्रविष्टियों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
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इस वजह से पड़ी जरूरत
कई बार कार्मिक की अपने बॉस से नहीं पटती है। उसे लगता है कि बॉस वार्षिक मूल्यांकन में गलत प्रविष्टि कर सकता है। ऐसे में वह मूल्यांकन के लिए आवेदन ही नहीं करता। उसके पास 10 वर्ष में किसी 72 माह की प्रविष्टि लगाने का अवसर होने की वजह से किसी चार वर्ष को नजरंदाज करने का विकल्प बना रहता है।