विधान परिषद में दूसरे दिन भी हंगामा
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विधान सभा सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई। शुरुआत होते ही सदस्यों ने मास्क लगाकर वेल में हंगामा करना शुरू कर दिया।
सीएम अखिलेश भी विधान परिषद पहुंच चुके हैं। आज दोनों सदनों में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी।
विधानमंडल सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही में बसपा विधायकों ने राज्यपाल को बोलने तक नहीं दिया। सदन पूरे दिन के लिए ठप हो गया।
पहले दिन भी अभिभाषण के दौरान हंगामा न करने की राज्यपाल राम नाईक की नसीहत बेअसर रही थी। विपक्ष ने बुधवार को विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल को पूरा अभिभाषण नहीं पढऩे दिया।
बसपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्यों ने सरकार विरोधी नारे लिखी टोपियों और बैनरों के साथ जमकर नारेबाजी की।
विपक्ष ने 'राज्यपाल वापस जाओ’ के नारे भी लगाए। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान भाजपा के सदस्य नदारद रहे। हंगामे व शोर-शराबे के बीच राज्यपाल अभिभाषण का पहला और अंतिम पैरा पढ़कर लौट गए।
पहला और अंतिम पैरा पढ़कर लौटे राज्यपाल
बाद में विधानसभा और विधान परिषद की अलग-अलग कार्यवाही शुरू होने पर भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। हंगामे और शोर-शराबे के बीच दोनों सदनों में आज का एजेंडा निपटाकर सदन की कार्यवाही बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन पूर्वाह्न 11 बजे राज्यपाल जैसे ही अभिभाषण के लिए विधानसभा में पहुंचे, बसपा के सदस्यों ने नारे लिखी टोपियां पहनकर बैनर लहराना शुरू कर दिया।
बैनरों पर सरकार विरोधी नारे लिखे थे। भाजपा के सदस्य अपनी सीटों से गायब थे जबकि कांग्रेस और रालोद के सदस्यों ने भी बैनर और नारे लिखी तख्तियां लहराते हुए राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध किया।
बसपा के सदस्य 'राज्यपाल वापस जाओ’ नारे भी लगा रहे थे। राज्यपाल पहले तो सदस्यों से बार-बार शांत होकर बैठने का अनुरोध करते रहे। हंगामा नहीं थमा तो राज्यपाल ने अभिभाषण पढऩा शुरू कर दिया।
मजह दो मिनट में पहला और अंतिम पैरा पढ़कर राज्यपाल वापस लौट गए।
आजम खां-राम नाईक मुद्दा भी सामने आया
दोपहर 12.30 बजे वंदे मातरम के साथ विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो बसपा के सदस्यों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा अभिभाषण पढ़े जाने का यह कहते हुए विरोध किया कि जब सरकार और राज्यपाल के बीच नोकझोंक व 'लेटर वॉर’ चल रहा है और दोनों में सामंजस्य ही नहीं है तो अभिभाषण पढऩे का क्या औचित्य है?
जब राज्यपाल अभिभाषण नहीं पढ़ पाए तो अब इसे नहीं पढ़ा जाना चाहिए। मौर्य ने अभिभाषण को सरकारी दस्तावेज और असत्य का पुलिंदा बताते हुए कहा कि इसे पढ़कर सदन का वक्त जाया न किया जाए।
इसी बीच भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना ने भी आजम व राज्यपाल के बीच चल रहे विवाद को व्यवस्था के प्रश्न के रूप में उठाने का प्रयास किया लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।
गुरुवार तक के लिए कार्यवाही स्थगित
अध्यक्ष ने परंपरा का हवाला देते हुए अभिभाषण पढऩे की बात कही तो बसपा के सदस्यों ने फिर हंगामा व शोर-शराबा शुरू कर दिया।
हंगामे व नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ने भी पहला और अंतिम पैरा पढ़ा और फिर आज का एजेंडा निपटाकर कार्यवाही बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दी।
उधर, विधान परिषद में भी वंदेमातरम् के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई। शिक्षक दल को छोड़कर समूचे विपक्ष ने वेल में आकर सभापति के समक्ष सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।
सदस्य बैनर लहरा रहे थे। शोरशराबे और नारेबाजी के बीच सभापति गणेश शंकर पांडेय ने एजेंडा निपटाकर निपटाकर सदन की कार्यवाही बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।