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लखनऊ के 71 साल पुराने कॉलेज में लगा ताला, जमकर हंगामा
Sat, 29 Dec 2018 12:52 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 29 Dec 2018 12:52 PM IST
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लखनऊ इंटरमीडिएट कॉलेज में शुक्रवार शाम उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब प्रबंधन ने कार्यालय समेत सभी कक्षाओं में ताला लगवा दिया। आरोप है कि अज्ञात लोगों ने वहां पर रह रहे कर्मचारियों के कमरे के सामान भी फेंक दिया।
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कर्मचारियों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जिलाधिकारी कार्यालय और एसएसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। शिक्षक संघ ने इसके विरोध में आंदोलन करने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन काफी संख्या में अज्ञात लोगों के साथ कॉलेज परिसर में दाखिल हुआ और प्रधानाचार्या के कार्यालय समेत सभी कक्षाओं में ताला जड़ दिया।
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साथ ही उन लोगों ने सफाईकर्मी प्रमोद कुमार और चौकीदार बिहारी लाल के कमरों से उनका सामान बाहर फेंक दिया। इससे पहले कर्मचारियों ने गुरुवार को प्रबंधक की बहू व बेटे द्वार परिसर में घुसकर अभद्रता, मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का भी आरोप लगाया है।
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उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय और एसएसपी कार्यालय में इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उधर प्रबंधक सरबजीत सिंह ने कर्मचारियों के आरोप को गलत ठहराया है। उनहोंने बताया कि गुरुवार को परिसर में स्थित पेड़ काटे जाने की सूचना मिली थी। वह वहां गए तो चपरासी ने उन्हें घुसने नहीं दिया। शुक्रवार को भी वे गए थे। किसी भी प्रकार की अभद्रता नहीं की गई। उन्होंने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर सभी कमरों को बंद कर दिया गया है।
शिक्षक संघ ने लगाया कब्जे करने का आरोप
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से कब्जे की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन स्कूल के भवन को जर्जर बताकर न्यायालय चला गया था। तब शासन स्तर से जांच कराई गई और प्रबंधन को कमरों के मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए थे।
संघ का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन मरम्मत कराने के बजाय स्कूल की जमीन हथियाने का षंडयंत्र रच रहा है। संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्र ने बताया कि स्कूल में कक्षा छह से 12 तक के करीब 100 छात्र पढ़ते हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने भवन गिराने का जो आदेश दिया उसमें शिक्षकों और प्रधानाचार्या का पक्ष नहीं लिया गया। छात्रों की और शिक्षकों की व्यवस्था के बारे में भी सोचा नहीं जा रहा है।
1968 में मिली मान्यता
लखनऊ इंटरमीडिएट कॉलेज सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय है। इसकी स्थापना 1947-48 में हुई थी। तब बैरिस्टर भट्टाचार्या ने कॉलेज की स्थापना के लिए करीब 60 हजार स्कॉवयर फीट जमीन दान में दी थी। कॉलेज हाईस्कूल की मान्यता के साथ प्रारंभ हुआ। वर्ष 1968 में इसे यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट की मान्यता मिली।
आज करूंगा निरीक्षण
कॉलेज के भवन को लेकर विवाद चल रहा है। देर शाम हुए वहां पर हंगामे की सूचना मिली है शनिवार को कॉलेज का स्थलीय निरीक्षण करुंगा - डॉ मुकेश कुमार सिंह, डीआईओएस
संघ का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन मरम्मत कराने के बजाय स्कूल की जमीन हथियाने का षंडयंत्र रच रहा है। संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्र ने बताया कि स्कूल में कक्षा छह से 12 तक के करीब 100 छात्र पढ़ते हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने भवन गिराने का जो आदेश दिया उसमें शिक्षकों और प्रधानाचार्या का पक्ष नहीं लिया गया। छात्रों की और शिक्षकों की व्यवस्था के बारे में भी सोचा नहीं जा रहा है।
1968 में मिली मान्यता
लखनऊ इंटरमीडिएट कॉलेज सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय है। इसकी स्थापना 1947-48 में हुई थी। तब बैरिस्टर भट्टाचार्या ने कॉलेज की स्थापना के लिए करीब 60 हजार स्कॉवयर फीट जमीन दान में दी थी। कॉलेज हाईस्कूल की मान्यता के साथ प्रारंभ हुआ। वर्ष 1968 में इसे यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट की मान्यता मिली।
आज करूंगा निरीक्षण
कॉलेज के भवन को लेकर विवाद चल रहा है। देर शाम हुए वहां पर हंगामे की सूचना मिली है शनिवार को कॉलेज का स्थलीय निरीक्षण करुंगा - डॉ मुकेश कुमार सिंह, डीआईओएस