संघ का मिशन PM पूरा, अब 'मिशन मोदी-2' का प्लान
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अपने प्रिय कार्यकर्ता मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने वाले संघ ने फिर से एक 'खास एजेंडा' पर काम करना शुरू कर दिया है।
संघ परिवार में महिला कार्यकर्ताओं की कमी शायद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को खलने लगी है। उसे लग रहा है कि आधी आबादी के बड़े हिस्से के बीच अपनी पकड़ व पहुंच बनाए बगैर काम नहीं चलेगा।
विचारधारा के आधार पर मजबूत और बड़ा जनमत बनाने का काम भी नहीं हो पाएगा। विरोधियों को करारा जवाब देना मुश्किल रहेगा। इसीलिए उसने संघ परिवार के संगठनों में महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
इसकी जिम्मेदारी विद्यार्थी परिषद को सौंपी गई है। जिसने छात्राओं के बीच अपना कामधाम और संपर्क बढ़ाकर संघ की इस चिंता को दूर करने की कार्ययोजना बनाकर काम शुरू भी कर दिया है।
इस तरह काम करेगी समिति
इसके लिए छात्राओं की एक समिति गठित की गई है। समिति की सदस्याएं विश्वविद्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं के बीच संपर्क कर रही हैं।
उन्हें विद्यार्थी परिषद से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसी सिलसिले में अगस्त के पहले सप्ताह में यहां प्रदेश भर का छात्रा सम्मेलन का फैसला किया गया है।
जिसमें इस संपर्क अभियान में परिषद से जुड़ी छात्राओं को बुलाकर उन्हें संगठन की रीतिनीति और सोच से परिचित कराया जाएगा।
योजना यह भी बनी है कि विद्यार्थी परिषद से जुड़ी नई छात्राओं को साथ लेकर महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर आंदोलन चलाया जाए। जिससे इन्हें संगठन के साथ स्थायी रूप से जोड़ा जा सके।
इसलिए बनी यह रणनीति
दरअसल संघ बहुत दिनों से अपने राजनीतिक संगठन भाजपा की स्थिति को लेकर चिंतित चल रहा था। काफी विचार-विमर्श के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ताकत बढ़ाने के लिए पुराने प्रयोगों को दोहराते हुए विद्यार्थी परिषद के जरिये भाजपा व अन्य संगठनों में कार्यकर्ताओं को भेजने की प्रक्रिया फिर शुरू करनी होगी।
जिससे वैचारिक अधिष्ठान भी मजबूत रहे और संघ की इच्छानुसार काम भी हो सके। लोकसभा चुनाव से लगभग एक वर्ष पहले संघ की प्रतिनिधि सभा में विचार-विमर्श के बाद इस सिलसिले में पूरी कार्ययोजना तैयार हुई।
उसी का नतीजा रहा कि संघ ने डॉ. कृष्णगोपाल जैसे प्रचारक को सहसरकार्यवाह बनाकर भाजपा की जिम्मेदारी सौंपी। साथ ही नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, सुनील बंसल सहित विद्यार्थी परिषद से निकले अन्य कई चेहरों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया गया।
चुनाव में रणनीतिक कमान और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी भी विद्यार्थी परिषद के कंधों पर डाली गई। इसके सार्थक नतीजे आए।
समर्थन बनाए रखने की कोशिश
संघ ने अब इस प्रयोग को बड़े पैमाने पर आजमाने की योजना बनाई है। अभी हाल में भाजपा में भेजे गए वरिष्ठ प्रचारक राममाधव भी संघ की इसी सोच की अगली कड़ी हैं।
संघ परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के पीछे न सिर्फ आगे की चुनौतियों से निपटने की चिंता है बल्कि लोकसभा चुनाव में मिले समर्थन को भी शक्ति के रूप में सहेजकर रखने की फिक्र है।
संघ का मानना है कि महिलाएं जुड़ गईं तो यह समर्थन स्थायी तौर पर साथ रहेगा। इसीलिए विद्यार्थी परिषद को छात्राओं को जोड़ने के इस काम में लगाया गया है। काम बढ़ाने के लिए समिति गठित करके उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई।
ये हैं समिति के सदस्य
इसके तहत ही समिति की सदस्य छात्राओं से मिलकर उनसे महिला उत्पीड़न और अन्य मुद्दों पर संघर्ष का आह्वान कर रही हैं।
साथ ही उन्हें विद्यार्थी परिषद के उद्देश्य, महिलाओं के राष्ट्रीय भाव से जुड़ने पर होने वाले परिवर्तनों आदि की जानकारी देकर उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
समिति में मुरादाबाद की अंजली, ऋतु चौधरी, बरेली की सुनीता, वाराणसी की आयुषी श्रीमाली, अयोध्या की मीनू दुबे, झांसी की रेनुवर्मा, चित्रकूट की श्वेता तिवारी और गोरखपुर की डॉ. उमा श्रीवास्तव शामिल हैं।
सितंबर में लगेगा प्रशिक्षण शिविर
इन छात्राओं को प्रशिक्षित करने के लिए 3 अगस्त को यहां सम्मेलन आयोजित किया गया है। सम्मेलन के सिलसिले में कुछ अन्य एजेंडों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
साथ ही छात्राओं को जोड़ने का कार्यक्रम चलता रहेगा। सितंबर में 20-21 तारीख को यहां छात्राओं का एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर लगाने व सम्मेलन करने की योजना है।
जिसमें सभी को कामकाज की ट्रेनिंग दी जाएगी। भविष्य में विद्यार्थी परिषद में प्रशिक्षित और प्रतिभाशाली छात्राओं को विभिन्न संगठनों में भेजकर संघ वहां सशक्त महिला नेतृत्व की कमी पूरा करेगा।
हालांकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के संगठन मंत्री धर्मपाल कहते हैं कि इस कार्यक्रम का राजनीति से कोई लेनादेना नहीं है। यह अभियान विशुद्ध रुप से सांगठनिक है।