मिशन यूपी पर आगे बढ़ा संघ, लिया कड़ा फैसला!
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में छोटों के साथ ही बड़े पदाधिकारियों के भी पेंच कसना शुरू हो गए हैं। तय किया गया है कि संगठन के बड़े पदाधिकारियों को भी शाखाओं की सक्रियता की जिम्मेदारी लेनी होगी।
सिर्फ निर्देश व सुझाव देने से काम नहीं चलेगा। अब काम में हाथ भी बंटाना होगा। साथ ही काम का पूरा ब्यौरा रखना होगा। संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों की शुक्रवार को हुई बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा हुई।
चार दिनों से संघ शाखाओं की घटती संख्या, कम होती सक्रियता और निरंतर गिरती गुणवत्ता जैसी चुनौतियों से निपटने को मंथन में जुटे सरकार्यवाह सुरेश जोशी भैया जी ने जिला टोली की रिपोर्ट के आधार पर प्रांतीय पदाधिकारियों से जानकारी ली।
कुछ ने तो जानकारी दे दी लेकिन ज्यादातर पदाधिकारी कई सवालों पर अटक गए। कुछ ने बताया पर काफी हिचक के साथ। इसे देखते हुए सरकार्यवाह ने बड़े पदाधिकारियों को भी शाखाओं में जिम्मेदारी निभाने को कहा।
शाखा लगाने वालों से संपर्क व संवाद पर जोर
बैठक में महसूस किया गया कि शाखाएं लगाने पर ध्यान कम हुआ है। इस वजह से संघ की साख भी प्रभावित हुई है। साथ ही संबद्ध संगठनों की ताकत घटी है। तय हुआ कि अब सिर्फ निर्देश व नसीहत देने से काम नहीं चलेगा बल्कि जिलों से लेकर प्रांत व क्षेत्र तक के पदाधिकारियों को प्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदारी लेनी होगी।
उन्हें शाखावार जिम्मेदारी संभालने वालों से संपर्क व संवाद बढ़ाना पडे़गा। इसके अलावा शाखाओं के साथ संबंधित स्थान पर चल सकने वाले रचनात्मक कार्यों को शुरू करने और उसमें सक्रिय भागीदारी पर भी ध्यान देना पड़ेगा।
भविष्य में जिम्मेदारियों में हो सकता फेरबदल: प्रांतीय टोली से विचार-विमर्श का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। शनिवार सुबह भी संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श चलेगा। फिर सरकार्यवाह भैया जी मंथन के निष्कर्षों को सामने रखेंगे।
साथ ही लक्ष्य पूरा करने के सिलसिले में कुछ सुझाव देंगे तो कार्ययोजना पर भी बातचीत होगी। चर्चा यह भी है कि सरकार्यवाह पांच दिन के प्रवास में संघ व शाखाओं के कामकाज के बारे में जो जमीनी जानकारी ली है। उसी आधार पर भविष्य में संघ की जिम्मेदारियों में कुछ फेरबदल हो सकता है।