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हिंदुस्तान न कभी असहिष्णु देश था, न हो सकता है: संघ

Tue, 23 Feb 2016 01:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 23 Feb 2016 01:36 AM IST
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RSS speaks about intolerance in India.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय अधिकारी और संघ से संबद्ध मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के केंद्रीय मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने कहा कि हिंदुस्तान न कभी असहिष्णु देश था, न हो सकता है।

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अगर आज जेएनयू के अंदर ‘इंडिया गो बैक, इंडिया तेरे टुकड़े करेंगे हजार’ जैसे नारे लगे तो इसके बीज पिछली सरकार ने वहां बोए थे।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने 18 फरवरी से देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे आयोजन शुरू किए हैं, जिनमें देश की हिफाजत के लिए कलमात पढ़कर दुआएं की जा रही हैं। सोमवार को लखनऊ के बालागंज में हुए इस आयोजन में हिस्सा लेने आए इंद्रेश कुमार से ‘अमर उजाला’ ने बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश:
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प्रश्न- इस कार्यक्रम की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब-
कभी सीमाओं पर घुसपैठ, कभी गोलीबारी तो कभी दंगे-फसाद से देश परेशान है। आदमी पर मुसीबत आती है तो वह मालिक की इबादत करता है। इसी प्रकार जब मुल्क पर मुसीबतें आती हैं तो मालिक से सामूहिक रूप से फरियाद जरूरी होती है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि अपने मुल्क से नफरत का नामो निशान मिट जाए, मोहब्बत आ जाए।
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अमन-सुकून आ जाए। सीमाओं पर घुसपैठ न हो, गोलाबारी न हो, हिंसा न हो। इसके लिए देश में कई स्थानों पर हजारों मुसलमान आयत-ए-करीमा का जाप कर रहे हैं।

...ये कांटे आज के नहीं पिछली सरकार ने बोए थे

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प्रश्न- ...लेकिन कहा तो यह जाता है कि जबसे मोदी सरकार आई है, लोगों के बीच अविश्वास बढ़ा है, नफरत और असहिष्णुता बढ़ी है?

जवाब-
यह झूठ है। छुपे में जो जहर और शैतान था, वह नई सरकार के आने के बाद सामने आ गया है। इसी वजह से ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं कि जो भी शैतानी कांटे हैं, उन सबसे मुल्क की हिफाजत हो सके। ये कांटे आज के नहीं हैं, ये पिछली सरकार के बोए हुए हैं, जो आज दिख गए हैं।

प्रश्न- वे कौन-कौन सी चीजें हैं जो देश में हिंदू और मुसलमानों को जोड़ती हैं, उन्हें एक करती हैं?

जवाब-
इस देश में किसी भी मजहब का आदमी हो, हम सबके पूर्वज साझे हैं, मुल्क साझा है। इस हकीकत को कोई बदल नहीं सकता है। इसी तरह हमारी तहजीब साझी है। किसी की न जुबान विदेशी है न जाति-उपजाति। सिर्फ इबादत के तौर-तरीके अलग हैं।

हिंदुस्तान के बारे में अंतिम रसूल ने फरमाया था कि तनहाई में मुझे सुकून की ठंडी हवा आती है तो वह हिंदुस्तान से आती है। दुनिया को कोई सुकून दे सकता है तो वह सरजमीं हिंदुस्तान है, वे लोग हिंदुस्तानी हैं, वह तहजीब हिंदुस्तान की है। इन सब बातों से जुड़कर चलेंगे तो आने वाले समय में प्यार-मोहब्बत-भाईचारा पैदा हो सकती है।

हिंदुस्तान के लिए पढ़े गए 51 लाख कलमात

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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से बालागंज में लाल मस्जिद के निकट सोमवार को हुई ‘हमारा मुल्क’ संगोष्ठी में मुल्क की हिफाजत के लिए कलमात पढ़कर दुआएं की गईं।

इसमें 51 लाख कलमात पढ़े गए। बड़ी संख्या में लोगों ने करीब ढाई घंटे तक आयत-ए-करीमा पढ़ीं। कार्यक्रम में नगर के तमाम उलमा-ए-दीन उपस्थित थे।

बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी शिरकत की। कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार के अलावा मतदाता जागरण मंच के डॉ. शेख सिराज, कमरुलहुदा, तारिक दुर्रानी तथा अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे।

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