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आरएसएस के नवनिर्वाचित सहकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले कल आएंगे लखनऊ, 27 मार्च को करेंगे प्रचारकों के साथ बैठक
Thu, 25 Mar 2021 11:20 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Thu, 25 Mar 2021 11:20 PM IST
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दत्तात्रेय होसबोले
- फोटो : file photo
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नवनियुक्त सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले शुक्रवार को लखनऊ आएंगे। सर कार्यवाह नियुक्त होने के बाद पहली बार लखनऊ आ रहे होसबोले शाम को लखनऊ पहुंचेंगे। वे राजधानी में संघ के प्रचारकों के साथ वैचारिक संगठनों से जुड़े लोगों से बातचीत करेंगे।
बता दें कि करीब 65 साल के दत्तात्रेय होसबाले को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह चुना। उनका कार्यकाल तीन साल के लिए है। होसबाले मात्र 13 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे। 17 साल की उम्र में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 20 साल की उम्र में जेपी की अगुआई में हुए आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण 16 महीने मीसा के तहत जेल में बंद रहे। अब उनके कंधे पर आरएसएस के नंबर दो (सरकार्यवाह) की जिम्मेदारी है।
भागवत के विश्वसनीय है दत्तात्रेय
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को गहराई से जानने वालों का कहना है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के विश्वसनीय और प्रिय दत्तात्रेय होसबाले के लिए यह पद 2018 से इंतजार कर रहा है। उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 से पहले आरएसएस का सरकार्यवाह बन जाना चाहिए था, लेकिन आरएसएस के भीतर की तमाम परिस्थितियों ने सुरेश भैय्या जी जोशी को तीन साल के लिए एक अवसर और दे दिया था। इस तरह से खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर सरकार्यवाह के दायित्व से मुक्ति पाने वाले भैय्या जी जोशी को 12 साल बाद (2009-2021) इससे मुक्ति मिल पाई। होसबोले को 2008 में आरएसएस का सह सरकार्यवाह बनाया गया था। दरअसल भैय्या जी जोशी अपने संवाद में केन्द्र सरकार पर चुटकी लेते रहते थे। उनका केन्द्र सरकार को घेरना सरकार में अपच भी हो रहा था।
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बता दें कि करीब 65 साल के दत्तात्रेय होसबाले को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह चुना। उनका कार्यकाल तीन साल के लिए है। होसबाले मात्र 13 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे। 17 साल की उम्र में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 20 साल की उम्र में जेपी की अगुआई में हुए आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण 16 महीने मीसा के तहत जेल में बंद रहे। अब उनके कंधे पर आरएसएस के नंबर दो (सरकार्यवाह) की जिम्मेदारी है।
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भागवत के विश्वसनीय है दत्तात्रेय
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को गहराई से जानने वालों का कहना है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के विश्वसनीय और प्रिय दत्तात्रेय होसबाले के लिए यह पद 2018 से इंतजार कर रहा है। उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 से पहले आरएसएस का सरकार्यवाह बन जाना चाहिए था, लेकिन आरएसएस के भीतर की तमाम परिस्थितियों ने सुरेश भैय्या जी जोशी को तीन साल के लिए एक अवसर और दे दिया था। इस तरह से खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर सरकार्यवाह के दायित्व से मुक्ति पाने वाले भैय्या जी जोशी को 12 साल बाद (2009-2021) इससे मुक्ति मिल पाई। होसबोले को 2008 में आरएसएस का सह सरकार्यवाह बनाया गया था। दरअसल भैय्या जी जोशी अपने संवाद में केन्द्र सरकार पर चुटकी लेते रहते थे। उनका केन्द्र सरकार को घेरना सरकार में अपच भी हो रहा था।
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