मोदी के लिए काशी की जंग लड़ रहा संघ
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काशी का असली रण भगवा सेनाएं पर्दे के पीछे लड़ रही हैं। संघ के रणनीतिकारों ने इस व्यूह रचना को अंतिम रूप दे दिया है।
रचना इस तरह की गई है कि हर पांच घर पर एक आदमी तैनात रहे। चुनाव की पूरी कमान मोदी के करीबी लोगों ने संभाल रखी है। ये ऐसे लोग हैं, जो जितने मोदी के विश्वासपात्र हैं, संघ को भी उन पर उतना ही भरोसा है।
इसके अलावा टीम में वाराणसी के भी उन लोगों को शामिल किया गया है जो काम तो दूसरे क्षेत्रों में करते हैं लेकिन संघ के बेहद भरोसेमंद हैं। रणनीति ऐसी है, जिसमें सामाजिक सरोकारों और जातीय गणित का पूरा ध्यान रखा गया है।
कई और हैं अमित शाह जैसे
अमित शाह को भले ही सार्वजनिक तौर पर नरेंद्र मोदी का सबसे करीबी माना जा रहा है, लेकिन काशी की व्यूह रचना पर नजर डालें तो साफ हो जाता है कि सिर्फ शाह ही नहीं बल्कि अन्य कई लोग मोदी की टीम में शामिल हैं।
ये न सिर्फ उनके करीबी हैं बल्कि पर्दे के पीछे की पूरी लड़ाई लड़ रहे हैं।
इनमें गुजरात में विधायक रह चुके सुनील ओझा, संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुनील देवधर और अरुण सिंह शामिल हैं। ये तीनों लोग गुजरात से हैं।
तैनात हुए नमो वॉलंटियर
जानकारी के मुताबिक, काशी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लगभग 125 शाखाएं हैं। यहां लोगों को इन दिनों व्यायाम और संस्कृति रक्षा का ज्ञान समझाने के बजाय घर-घर मोदी मंत्र पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
शाखाओं पर आने वाले प्रतिदिन सुबह अपने लिए आवंटित क्षेत्र व घरों में संपर्क करते हैं। उन्हें मोदी के बारे में बताते हैं। विरोधियों के हमलों को तर्कों से काटकर उन्हें भाजपा से जोड़े रखने की कोशिश करते हैं।
काशी में युवकों को जोड़कर ‘नमो वॉलंटियर’ नाम की टीम गठित की गई है। इनके छोटे-छोटे समूह बनाकर इन्हें घर-घर संपर्क की जिम्मेदारी दी गई है।
इन लोगों को इस तरह बांटा गया है कि काशी के लगभग 17 लाख मतदाताओं से मतदान के पहले तीन-तीन बार संपर्क हो जाए। इस टीम के प्रमुखों को रोज की रिपोर्ट देती होती है।
मोदी लहर के साथ जातीय गणित
मोदी लहर के बावजूद काशी की जातीय गणित को भी ध्यान में रखकर पूरी रणनीति तैयार की गई है।
काशी संसदीय क्षेत्र के किस-किस इलाके में कौन-कौन सी जातियां प्रभावी हैं, इस बात को ध्यान में रखकर उन जातियों के लोगों को भाजपा से जोड़ने को काम चल रहा है।
इसके लिए संबंधित जातियों के लोगों को भेजकर उनसे मोदी के लिए वोट मांगा जा रहा है। उस जाति के पार्टी नेता को बुलाकर उन लोगों के बीच भेजा जा रहा है।
हो रहा है मोदी का प्रचार
पेशे से व्यवसायी और मोदी के विश्वासपात्र अरुण सिंह पर मुख्य जिम्मेदारी डैमेज कंट्रोल तथा जनसंपर्क पर नजर रखने की है।
जानकारी के मुताबिक, मृदुभाषी अरुण सिंह लोगों से लगातार टेलीफोन पर संपर्क रखते हैं। अगर किसी की नाराजगी की बात उन्हें पता चलती है तो वे खुद उससे बात करते हैं।
सिंह सोशल मीडिया के भी अच्छे जानकार हैं। इसलिए उनकी देखरेख में काशी में मोदी के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए बाकायदा एक टीम काम कर रही है।
संघ ने झोंकी पूरी ताकत
सुनील ओझा और सुनील देवधर चुनाव तैयारियों का काम संभाल रहे हैं। कहां कौन सी प्रचार सामग्री पहुंची, उसका किस तरह इस्तेमाल हो रहा है। साथ ही कहां क्या समस्या आ रही है, इस सब पर नजर रखते हैं।
इन तीनों लोगों की रोज कोर कमेटी, चुनाव संयोजक, सह संयोजक, पालक और प्रभारी के साथ प्रतिदिन शाम को मीटिंग होती है। पूरे दिन के प्रचार की समीक्षा होती है। इन लोगों द्वारा बनाई गई 50 आई-आईटियंस की टीम भी पूरी रिपोर्ट रखती है।
इसमें यह भी बताया जाता है कि आज किस टीम ने कितने घरों में संपर्क किया और कितने घरों में नहीं जा सके। जितने घर रह जाते हैं उनके लिए अगले दिन विशेष योजना बनाई जाती है और अलग से लोगों को भेजा जाता है।
संघ काशी को लेकर कितना संजीदा है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि संघ के सभी संगठनों की तरफ से एक बार अपने-अपने स्तर से जनसंपर्क किया जा चुका है। संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठकें भी काशी में हो चुकी हैं।