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तेल चोरी मामला: सीएम योगी के निर्देशों को अनसुना कर अधिकारी ही करा रहे हैं फजीहत
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 01 Jun 2017 02:13 PM IST
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पेट्रोल पंपों पर घटतौली को लेकर हाईकोर्ट की फटकार ने एक बार फिर अफसरों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। लगातार दूसरा मौका है, जब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को न सिर्फ फटकारा, बल्कि सरकार और अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
इससे पहले जब 22 मई को हाईकोर्ट ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया था तब सीएम योगी ने अफसरों के साथ बैठक कर साफ निर्देश दिए थे कि घटतौली कर रहे पंपों के खिलाफ कार्रवाई में कोई ढिलाई न बरती जाए।
योगी ने मुख्य सचिव राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार, डीजीपी सुलखान सिंह, एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश, एसएसपी अमित पाठक के साथ खाद्य एवं रसद विभाग व तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक में सख्त हिदायत दी थी। मुख्यमंत्री ने पेट्रोल पंपों के खिलाफ जांच में सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए अफसरों को बहानेबाजी से बाज आने को भी कहा था।
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इससे पहले जब 22 मई को हाईकोर्ट ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया था तब सीएम योगी ने अफसरों के साथ बैठक कर साफ निर्देश दिए थे कि घटतौली कर रहे पंपों के खिलाफ कार्रवाई में कोई ढिलाई न बरती जाए।
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योगी ने मुख्य सचिव राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार, डीजीपी सुलखान सिंह, एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश, एसएसपी अमित पाठक के साथ खाद्य एवं रसद विभाग व तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक में सख्त हिदायत दी थी। मुख्यमंत्री ने पेट्रोल पंपों के खिलाफ जांच में सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए अफसरों को बहानेबाजी से बाज आने को भी कहा था।
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कौन लगा रहा सरकार की मंशा पर पलीता
सीएम आदित्यनाथ योगी
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एसटीएफ ने पेट्रोल पंप पर तेल चोरी पकड़ी और कार्रवाई शुरू की तो चारों तरफ एसटीएफ के साथ सरकार की भी तारीफ होने लगी। लेकिन एसटीएफ की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी और एक के बाद एक पेट्रोल पंप जद में आते गए तो सरकार पर पेट्रोल पंप मालिकों का भी दबाव बढ़ने लगा।
वजह साफ है कि बहुत से पेट्रोल पंप राजनीतिक दलों के नेताओं, उनके रिश्तेदारों या फिर उनसे जुड़े लोगों के हैं, जिसमें सत्तारूढ़ दल के नेता भी शामिल हैं।
दबाव बढ़ने के बाद शासन ने एसटीएफ के हाथ बांध दिए।
दो मई को जिलेवार संबंधित अधिकारियों की टीम बनाकर उन्हें कार्रवाई के निर्देश दिए गए और कहा गया कि एसटीएफ अब सहयोगी की भूमिका में रहेगी। यह सारे निर्देश मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद दिए गए थे।
शक पैदा हो रहा है कि कहीं अधिकारी पेट्रोल पंप मालिकों के दबाव में तो काम नहीं कर रहे? क्योंकि जिस हिसाब से एसटीएफ ने तेल चोरी का खुलासा किया था और गिरफ्तार लोगों से पूछताछ की थी, उससे नहीं लगता कि सिर्फ चंद पेट्रोल पंप की डिस्पेंसिंग यूनिट ही पकड़ी जाएगी। इसका दायरा बढ़ सकता था, लेकिन शासन ने ही इस अभियान पर पलीता लगा दिया।
वजह साफ है कि बहुत से पेट्रोल पंप राजनीतिक दलों के नेताओं, उनके रिश्तेदारों या फिर उनसे जुड़े लोगों के हैं, जिसमें सत्तारूढ़ दल के नेता भी शामिल हैं।
दबाव बढ़ने के बाद शासन ने एसटीएफ के हाथ बांध दिए।
दो मई को जिलेवार संबंधित अधिकारियों की टीम बनाकर उन्हें कार्रवाई के निर्देश दिए गए और कहा गया कि एसटीएफ अब सहयोगी की भूमिका में रहेगी। यह सारे निर्देश मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद दिए गए थे।
शक पैदा हो रहा है कि कहीं अधिकारी पेट्रोल पंप मालिकों के दबाव में तो काम नहीं कर रहे? क्योंकि जिस हिसाब से एसटीएफ ने तेल चोरी का खुलासा किया था और गिरफ्तार लोगों से पूछताछ की थी, उससे नहीं लगता कि सिर्फ चंद पेट्रोल पंप की डिस्पेंसिंग यूनिट ही पकड़ी जाएगी। इसका दायरा बढ़ सकता था, लेकिन शासन ने ही इस अभियान पर पलीता लगा दिया।
मुख्य सचिव ने जारी किया था निर्देश
राहुल भटनागर
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एसटीएफ के खुलासे और लगातार कार्रवाई के बाद पेट्रोल पंप मालिक बौखलाकर हड़ताल पर चले गए थे। पंप यूनियन के नेताओं ने सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी, जिसके बाद मुख्य सचिव राहुल भटनागर की ओर से यह निर्देश जारी किए गए थे कि पेट्रोल पंप मालिकों को जांच में परेशान न किया जाए।
मुख्य सचिव ने अपने आदेश में चिप की आशंका होने पर संबंधित डिस्पेंसिंग यूनिट को ही सील करने, चिप होने या न होने के साक्ष्य मिलने के बारे में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए थे।
यानी पेट्रोल पंप पर खामियां मिलने के बाद भी न तो एफआईआर के निर्देश थे और न ही किसी तरह की अन्य कार्रवाई के।सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल चोरी अकेले पेट्रोल पंप मालिकों के बस की बात नहीं।
इसमें पेट्रोल पंप मालिक से लेकर, खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी, बाट-माप विभाग के अधिकारी, पेट्रोल मशीनों के टेक्नीशियन और तेल कंपनियां सब हिस्सेदार थीं। कुल मिलाकर सुनियोजित तरीके से आम लोगों की जेब पर डाका डाला जा रहा था। तेल चोरी की इस बेईमानी में नीचे से लेकर कई स्तर तक के अधिकारियों को शामिल बताया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने अपने आदेश में चिप की आशंका होने पर संबंधित डिस्पेंसिंग यूनिट को ही सील करने, चिप होने या न होने के साक्ष्य मिलने के बारे में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए थे।
यानी पेट्रोल पंप पर खामियां मिलने के बाद भी न तो एफआईआर के निर्देश थे और न ही किसी तरह की अन्य कार्रवाई के।सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल चोरी अकेले पेट्रोल पंप मालिकों के बस की बात नहीं।
इसमें पेट्रोल पंप मालिक से लेकर, खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी, बाट-माप विभाग के अधिकारी, पेट्रोल मशीनों के टेक्नीशियन और तेल कंपनियां सब हिस्सेदार थीं। कुल मिलाकर सुनियोजित तरीके से आम लोगों की जेब पर डाका डाला जा रहा था। तेल चोरी की इस बेईमानी में नीचे से लेकर कई स्तर तक के अधिकारियों को शामिल बताया जा रहा है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी नहीं चेते अधिकारी
डेमो
- फोटो : file photo
22 मई को हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि आखिर जहां चिप पकड़ी जा रही है, वहां एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हो रही है? इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ मीटिंग कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि तेल चोरों को बख्शा न जाए।
लेकिन अधिकारियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यहां तक कि पूर्व में दर्ज हुई एफआईआर में भी बाकी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया।
खाद्य एवं रसद विभाग के एक अधिकारी की मानें तो अब तक 6600 पेट्रोल पंपों में से 2365 पेट्रोल पंपों की 7493 यूनिट की जांच की जा चुकी है। इसमें 105 मशीनों में चिप होने के सुबूत मिले हैं, जबकि 221 डिस्पेंसिंग यूनिट में घटतौली पकड़ी गई है
लेकिन अधिकारियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यहां तक कि पूर्व में दर्ज हुई एफआईआर में भी बाकी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया।
खाद्य एवं रसद विभाग के एक अधिकारी की मानें तो अब तक 6600 पेट्रोल पंपों में से 2365 पेट्रोल पंपों की 7493 यूनिट की जांच की जा चुकी है। इसमें 105 मशीनों में चिप होने के सुबूत मिले हैं, जबकि 221 डिस्पेंसिंग यूनिट में घटतौली पकड़ी गई है