Lucknow: अब कॉपरटी-नसबंदी गुजरे जमाने की बात... रॉड इम्प्लांट कराएं, तीन साल के लिए गर्भधारण से छुट्टी पाएं
लखनऊ के दो अस्पतालों में रॉड इम्प्लांट की सुविधा दी जाएगी। प्लास्टिक की रॉड जांघ या बाजू में प्रत्यारोपित कराने के बाद महिलाएं तीन साल तक गर्भवती नहीं होंगी।
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कॉपरटी-नसबंदी गुजरे जमाने की बात हो गई। अब महिलाएं रॉड इम्प्लांट के जरिए अनचाहे गर्भ से बच सकेंगी। उन्हें दूसरे परिवार नियोजन उपाय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। महिलाओं के शरीर के किसी भी हिस्से में एक छोटा सा इम्प्लांट प्रत्यारोपित किया जाएगा। प्रत्यारोपण बाद महिलाएं तीन साल तक गर्भाधरण नहीं कर पाएंगी। एनएचएम के जरिए पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लखनऊ में यह योजना शुरू की गई है। डॉक्टरों का कहना है इम्प्लांट प्रत्यारोपण बेहद आसान प्रक्रिया है। इसमें किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। यह पूरी तरह से सुरक्षित परिवार नियोजन का साधन है।
परिवार नियोजन को बढ़ावा देने लिए स्वास्थ्य विभाग हर साल जिले में करीब 40 हजार महिलाओं को कॉपरटी लगा रहा है। कुछ महिलाएं इसे लगाने में असहज महसूस करती थीं। इसकी जगह पर परिवार नियोजन के दूसरे उपाय करती हैं। स्टेट एनएचएम के जरिए अब परिवार नियोजन लिए महिलाओं में रॉड इम्प्लांट प्रत्यारोपित किया जाएगा। लखनऊ में पॉयलेट प्रोजेक्ट के तहत अवंतीबाई व क्वीनमेरी अस्पताल को चुना गया है। यहां पर इम्प्लांट प्रत्यारोपण होगा। प्रत्यारोपण के तीन साल तक महिलाएं गर्भवती नहीं होंगी। विशेषज्ञों का कहना है इम्प्लांट प्रक्रिया बेहद सरल व पूरी तरह से सुरक्षित है। इसमें छोटी सीक बराबर इम्प्लांट होगा। जिसे महिला की जांघ या बाजू में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा। सीएमओ प्रवक्ता योगेश के मुताबिक, एनएचएम जरिए इम्प्लांट प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पहले चरण में दो महिला अस्पताल में शुरू होनी है।
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रॉड इम्प्लांट से रिलीज होगा हॉर्मोन
अनचाहे गर्भ से बचने के लिए एक विशेष तरह का इम्प्लांट विकसित किया गया है। यह एक प्रकार से बर्थ कंट्रोल इम्प्लांट है, यह माचिस की तीली के आकार की एक छोटी और पतली छड़ होती है, जो महिलाओं के शरीर में एक प्रकार का हार्मोन रिलीज करने में मदद करता है। जिसे प्रोजेस्टिन कहा जाता है, जो महिलाओं को गर्भवती होने से रोकता है। एक बार इम्प्लांट लगवाने के बाद महिला तीन साल तक गर्भधारण से बच सकती है। छोटे से इम्प्लांट को महिला की जांघ या बाजू में भी लगाया जा सकेगा।
क्या है ये : गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण (रॉड, इम्प्लानन) गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण एक छोटी प्लास्टिक की छड़ी होती है जिसे ऊपरी बांह के अंदर की त्वचा के नीचे डाला जाता है। यह हार्मोन प्रोजेस्टिन को धीरे-धीरे जारी करने के लिए तीन साल तक वहां रह सकता है।
जिले में हर साल करीब छह हजार महिलाओं की नसंबदी
जनसंख्या नियंत्रण लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस साल करीब 6113 महिलाओं की नसबंदी कराई। पुरुष नसबंदी में पीछे रहे। 293 पुरुषों ने इस साल नसबंदी कराई। इसके अलावा परिवार नियोजन साधन में कंडोम वितरण का आंकड़ा बीते वर्ष 26,28,912 था, जबकि इस साल बढ़कर 33,66,211 हो गया। वहीं, महिलाओं ने गर्भनिरोधक गोलियां, कॉपर टी सहित अन्य परिवार नियोजन के साधन पिछले वर्ष 4,04,863 इस्तेमाल किए, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 5,00982 रहा। सीएमओ ने बताया कि जिले में पुरुष नसबंदी की स्थिति में सुधार लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग सघन प्रयास कर रहा है। यहां तक कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को भी ज्यादा रखा गया है।