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Lucknow News: प्रोस्टेट, फेफड़े और गले के कैंसर में रोबोटिक सर्जरी प्रभावी विकल्प
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लखनऊ। कैंसर सर्जरी में रोबोटिक तकनीक से शरीर के भीतर छोटे चीरे के जरिये बारीक उपकरणों को नियंत्रित कर ऑपरेशन करना आसान हो रहा है। इससे शरीर के संकरे और जटिल हिस्सों में ट्यूमर निकालने के साथ आसपास की नसों और महत्वपूर्ण अंगों को बचाने में मदद मिल सकती है। स्वदेशी रोबोटिक सिस्टम विकसित होने से इस तकनीक की लागत घटाने और ज्यादा मरीजों तक पहुंचाने की उम्मीद बढ़ी है। यह जानकारी कैंसर सर्जन डॉ. विवेक गर्ग ने शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (आईएएसओ) की 39वीं कॉन्फ्रेंस में दी। आयोजन लखनऊ ऑन्कोलॉजी एसोसिएशन की ओर से किया जा रहा है।
डॉ. गर्ग ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल प्रोस्टेट, एंडोमेट्रियम, कोलोरेक्टल, फेफड़े, गुर्दे और मुंह-गले के कुछ कैंसर के ऑपरेशन में किया जा सकता है। इससे संकरे हिस्सों में सटीक सर्जरी और महत्वपूर्ण नसों को बचाने में मदद मिलती है।
केजीएमयू के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने कहा कि भारतीय रोबोट आने से ऑपरेशन की लागत कम होने की उम्मीद है। स्वदेशी तकनीक से उपकरणों और सर्जरी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का खर्च भी घट सकता है।
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लोहिया संस्थान के डॉ. आकाश अग्रवाल ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी से कैंसर दोबारा होने का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसका लाभ मरीज की स्थिति और ऑपरेशन के प्रकार पर निर्भर करता है।
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डॉ. गर्ग ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल प्रोस्टेट, एंडोमेट्रियम, कोलोरेक्टल, फेफड़े, गुर्दे और मुंह-गले के कुछ कैंसर के ऑपरेशन में किया जा सकता है। इससे संकरे हिस्सों में सटीक सर्जरी और महत्वपूर्ण नसों को बचाने में मदद मिलती है।
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केजीएमयू के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने कहा कि भारतीय रोबोट आने से ऑपरेशन की लागत कम होने की उम्मीद है। स्वदेशी तकनीक से उपकरणों और सर्जरी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का खर्च भी घट सकता है।
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लोहिया संस्थान के डॉ. आकाश अग्रवाल ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी से कैंसर दोबारा होने का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसका लाभ मरीज की स्थिति और ऑपरेशन के प्रकार पर निर्भर करता है।