{"_id":"6ac80bd785571d8c0f080bfd","slug":"robotic-surgery-for-liver-cancer-performed-on-two-seven-month-old-baby-girls-at-sgpgi-lucknow-news-c-13-lko1070-1957681-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: एसजीपीजीआई में सात माह की दो बच्चियाें के लिवर कैंसर की रोबोटिक सर्जरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: एसजीपीजीआई में सात माह की दो बच्चियाें के लिवर कैंसर की रोबोटिक सर्जरी
विज्ञापन
एसजीपीजीआई में सात माह की दो बच्चियाें के लिवर कैंसर की रोबोटिक सर्जरी।
लखनऊ। एसजीपीजीआई के डॉक्टरों ने सात माह की दो बच्चियों के लिवर कैंसर की रोबोटिक सर्जरी कर जान बचाने में कामयाबी हासिल की। डॉक्टरों का दावा है कि इतनी कम उम्र में बच्चों के लिवर कैंसर की रोबोटिक सर्जरी देश में पहली बार की गई है। एक बच्ची को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि दूसरी को शुक्रवार को डिस्चार्ज किया जाएगा।
पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशलिटीज विभागाध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार ने बताया कि एक बच्ची रायबरेली और दूसरी मथुरा की है। रायबरेली की पांच किलो की बच्ची में जांच के दौरान हेपेटोब्लास्टोमा पाया गया। कीमोथेरेपी से ट्यूमर छोटा करने के बाद पांच सितंबर को रोबोट की मदद से लिवर के बाएं हिस्से का कैंसरग्रस्त भाग निकाला गया। ऑपरेशन में करीब 10 घंटे लगे। बच्ची की छुट्टी कर घर भेज दिया गया है। मथुरा की छह किलो की बच्ची में भी हेपेटोब्लास्टोमा की पुष्टि हुई। कीमोथेरेपी के बाद तीन अक्तूबर को रोबोटिक सर्जरी की गई, जिसमें करीब छह घंटे लगे। बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार है।
डॉ. विजय उपाध्याय ने बताया कि पेट में चार छोटे छेद कर ऑपरेशन किया गया और दोनों बच्चियों को रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी। प्रत्येक ऑपरेशन पर करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए। दोनों बच्चियों की आगे भी कीमोथेरेपी जारी रहेगी। हालांकि लिवर कैंसर के 90 फीसदी बच्चों में दोबारा कैंसर होने का खतरा बहुत कम होता है। संस्थान निदेशक ने ऑपरेशन टीम को बधाई दी।
विज्ञापन
ये रहे ऑपरेशन टीम में
टीम में डॉ. बसंत कुमार, डॉ. विजय उपाध्याय, डॉ. अंकुर मण्डेलिया, डॉ.अंजू, डॉ.तरुण, डॉ.रोहित, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अरमानजीत सिंह, डॉ. कोमल पासवान, डॉ. अंशिता और नर्सिंग ऑफिसर रीता आर्य, प्रियंका शर्मा, मनु के, शबनम आरा, जितिन, श्रवण, मनोज कुमार शामिल रहे।
विज्ञापन
पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशलिटीज विभागाध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार ने बताया कि एक बच्ची रायबरेली और दूसरी मथुरा की है। रायबरेली की पांच किलो की बच्ची में जांच के दौरान हेपेटोब्लास्टोमा पाया गया। कीमोथेरेपी से ट्यूमर छोटा करने के बाद पांच सितंबर को रोबोट की मदद से लिवर के बाएं हिस्से का कैंसरग्रस्त भाग निकाला गया। ऑपरेशन में करीब 10 घंटे लगे। बच्ची की छुट्टी कर घर भेज दिया गया है। मथुरा की छह किलो की बच्ची में भी हेपेटोब्लास्टोमा की पुष्टि हुई। कीमोथेरेपी के बाद तीन अक्तूबर को रोबोटिक सर्जरी की गई, जिसमें करीब छह घंटे लगे। बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार है।
विज्ञापन
डॉ. विजय उपाध्याय ने बताया कि पेट में चार छोटे छेद कर ऑपरेशन किया गया और दोनों बच्चियों को रक्त चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ी। प्रत्येक ऑपरेशन पर करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए। दोनों बच्चियों की आगे भी कीमोथेरेपी जारी रहेगी। हालांकि लिवर कैंसर के 90 फीसदी बच्चों में दोबारा कैंसर होने का खतरा बहुत कम होता है। संस्थान निदेशक ने ऑपरेशन टीम को बधाई दी।
विज्ञापन
ये रहे ऑपरेशन टीम में
टीम में डॉ. बसंत कुमार, डॉ. विजय उपाध्याय, डॉ. अंकुर मण्डेलिया, डॉ.अंजू, डॉ.तरुण, डॉ.रोहित, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अरमानजीत सिंह, डॉ. कोमल पासवान, डॉ. अंशिता और नर्सिंग ऑफिसर रीता आर्य, प्रियंका शर्मा, मनु के, शबनम आरा, जितिन, श्रवण, मनोज कुमार शामिल रहे।