'हमारे नेताओं से तो चंबल के डाकुओं का चरित्र अच्छा'
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‘वर्ष 1960 से लेकर 1982 तक 651 डाकुओं को आत्मसमर्पण कराया। उनमें से सिर्फ एक डाकू बलात्कारी था, जबकि आज हमारे जनप्रतिनिधियों की संख्या देखें तो ज्यादा दुष्कर्मी मिलेंगे’।
डॉ. राम मनोहर लोहिया के सहयोगी रहे और चंबल के कई दुर्दांत डाकुओं का आत्मसमर्पण कराने वाले कृष्णचंद्र सहाय ने शुक्रवार को गांधी भवन में आयोजित गोष्ठी में ये बातें कहीं।
‘चंबल घाटी में अहिंसात्मक ढंग से डाकुओं का आत्मसमर्पण व सत्याग्रह की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में सहाय ने कहा कि सिर्फ कानून से बलात्कार जैसी घटनाओं को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए जनमानस को बदलना होगा और इसकी जिम्मेदारी समाज के साथ-साथ सामाजिक संगठनों को भी उठानी होगी।
'महिलाएं खुद लेंगी अपने अपमान का बदला'
उन्होंने कहा कि अगर ये घटनाएं नहीं बंद हुईं तो महिलाएं फूलन देवी हो जाएंगी और अपने अपमान का बदला खुद लेंगी।
कार्यक्रम के अध्यक्ष रिटायर्ड आईएएस विनोद शंकर चौबे ने कहा कि कश्मीर में अलगाववाद की घटनाओं से वहां की महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इन धार्मिक उन्मादियों को शिक्षा से ही समझाया जा सकता है। रामप्यारे त्रिवेदी, सदानंद, सोचन यादव, सर्वेशचंद्र द्विवेदी ने भी विचार रखे।