गोमती किनारे बनेगी सड़क, मिलेगी आपको बड़ी राहत
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गोमती नदी के किनारे सड़क बनाई जाएगी। वहीं किनारे पर पहले से मौजूद सड़कों को चौड़ा किया जाएगा। ला-मार्टीनियर बंधे के करीब पार्किंग बनाई जाएगी। इस पार्किंग की क्षमता 500 कारों की होगी।
मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने इस प्रोजेक्ट के सिलसिले में रविवार को सिंचाई विभाग के सीनियर अफसरों और इंजीनियरों के साथ जायजा लिया। उन्होंने इंजीनियरों को प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए। यह पहल पुराने लखनऊ को नए से जोड़ने और इनके बीच आवागमन सुगम बनाने को की जा रही है।
सिंचाई विभाग फिलहाल नदी में कुड़ियाघाट से लेकर ला-मार्टीनियर बंधे तक नदी का चैनलाइजेशन करवा रहा है, जिससे नदी को सौ से सवा सौ मीटर तक चौड़ाई में सीमित किया जा रहा है। बाकी बचे स्थानों पर रिवर फ्रंट डवलपमेंट की योजना है।
इसी प्रोजेक्ट के साथ सरकार चाहती है कि नदी के किनारों का उपयोग आवागमन के लिए भी हो। निरीक्षण के दौरान शिवपाल सिंह ने इंजीनियरों के साथ किनारों की खाली हो रही जगह की उपयोगिता पर चर्चा की।
बेहतर होगी ट्रैफिक की व्यवस्था
इस दौरान सामने आया कि लाल पुल से लेकर गांधी सेतु तक नदी के किनारों के अधिकतर स्थानों पर पहले से सड़कें मौजूद हैं। हालांकि ये सड़कें बहुत चौड़ी नहीं हैं, वहीं कई जगहों पर आपस में बेहतर ढंग से कनेक्टेड नहीं हैं। इस वजह से इन पर ट्रैफिक का ज्यादा दबाव नहीं होता। शहर के बाकी हिस्सों में पुराने लखनऊ और नए लखनऊ के बीच मौजूद सड़कें भारी ट्रैफिक से बेहाल रहती हैं।
गोमती किनारे सड़क बनने से एक नया विकल्प दिया जा सकता है। मंत्री ने इंजीनियरों को कहा है कि प्रस्ताव लाल पुल से लेकर गोमती के दोनों किनारों से लगते हुए जनेश्वर मिश्र पार्क तक सड़कों के लिए बनाया जाए।
एक्सईएन रूप सिंह ने बताया कि फिलहाल डालीगंज पुल से लेकर सड़क बनाने के लिए प्रस्ताव बनाया जाएगा और अगले चरण में लाल पुल के हिस्से को जोड़ा जाएगा। निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव दीपक सिंघल सहित कई इंजीनियर मौजूद थे।
निरीक्षण के दौरान शिवपाल सिंह ने सिंचाई विभाग के इंजीनियरों से कहा कि बैराज से लेकर ला मार्टीनियर बंधे तक जारी रिवर फ्रंट डवपलमेंट के कार्यों को 1 नवंबर तक पूरा करें।
गोमती में पानी की मात्रा बढ़ाने लिए इंजीनियरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गोमती को घाघरा नदी से जोड़ने का प्रस्ताव भी तैयार करें। नदी में पानी की आवक बढ़ाने से नदी को प्रदूषण मुक्त रखने में मदद मिलेगी।