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Nikay Chunav: खतौली में मिली सफलता से निकाय चुनाव में बढ़ी रालोद की दावेदारी, महापौर के लिए करेगी दावा

Mon, 12 Dec 2022 10:47 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 12 Dec 2022 10:47 AM IST
सार

खतौली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में रालोद महापौर सहित कई और सीटों पर अपनी दावेदारी कर सकती है। रालोद की नजर मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ पर है।

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RLD may demand a big share after win in khatauli assembly seat.
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

खतौली विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में मिली सफलता से गदगद रालोद की दावेदारी निकाय चुनाव में भी बढ़ गई है। चूंकि सपा-रालोद का गठबंधन है, ऐसे में पश्चिमी यूपी की कई अहम सीटों पर टिकट के लिए रालोद अपना दावा पेश कर सकता है। यही कारण है कि निगम और पालिका क्षेत्रों में दावेदारों ने भी अपनी मशक्कत भी शुरू कर दी है।

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खतौली उपचुनाव में जीत के बाद रालोद थिंक टैंक का मानना है कि किसान उनके साथ आ गए हैं। नगर निकाय चुनाव में भी रालोद इसका फायदा मिलेगा। इसलिए पश्चिम की कई सीटों पर उसके उम्मीदवार उतारे जाएं। इससे नया समीकरण बनेगा। खास तौर से नगर निगम महापौर सीटों पर दावेदारी का दावा करने की तैयारी है। जैसे मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ आदि पर रालोद की निगाह है।
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पार्टी का मानना है कि नए समीकरणों का लाभ रालोद को ज्यादा मिल सकता है। सपा बाकी जगह पर अपने उम्मीदवार उतारे। इसी तरह से पालिका परिषद अध्यक्षों पर भी दावेदारी की मंशा है। हालांकि टिकटों के बंटवारे पर लंबा मंथन होगा और उसी के बाद फैसला लिया जाएगा।

जातिगत आंकड़ों का कर रहे गुणा भाग
दरअसल इन सीटों पर रालोद जातिगत आंकड़ों का गुणाभाग कर रहा है। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि मुस्लिम तो उनके साथ सपा की बदौलत आ ही जाएंगे। बाकी जातियों को वह अपने हिसाब से जोड़ेंगे। कहीं जाटों में सेंध लगेगी तो कहीं गुर्जरों में। कहीं दलित वोटरों पर दांव लगाया जाएगा तो कहीं अन्य पर। इसी आधार पर रालोद अपना समीकरण तैयार कर रहा है।

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