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अजित सिंह ने यूपी में दिए महागठबंधन के संकेत, की नीतीश की तारीफ

Sun, 25 Sep 2016 02:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 25 Sep 2016 02:23 AM IST
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 RLD chief says charan singh and lohia's followers should come together.
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह - फोटो : amar ujala
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने डॉ. लोहिया और चौधरी चरण सिंह के अनुयायियों से मतभेद भुलाकर एक साथ आने की अपील की। उन्होंने बिहार के सीएम नीतीश कुमार की खुले दिल से तारीफें की। कहा-बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व शरद यादव चौधरी साहब के अनुयायी रहे हैं।
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बिहार सरकार की गुड गवर्नेंस देखकर चौधरी चरण सिंह के सुशासन के दिनों की याद ताजा होती है। उनकी इस अपील और रुख को प्रदेश में नए राजनीतिक गठजोड़ की पृष्ठभूमि के तौर पर देखा जा रहा है।
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अजित सिंह ने कहा, राजनीति के दो महापुरुष डॉ. लोहिया व चौधरी चरण सिंह जिन वर्गों के लिए उम्र भर संघर्ष करते रहे, जिनके प्रयासों से किसानों, पिछड़े वर्गों एवं वंचित समाज के लोगों को भागीदारी मिली, आज वे उपेक्षित हैं। सबसे ज्यादा आत्महत्या इन्हीं समूहों के लोगों ने की हैं। मौजूदा समय में किसानों की दुर्गति है। लाभकारी मूल्य मिलना तो दूर, लागत निकलना भी दूभर हो गया है।
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उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश दोनों महापुरुषों की जन्म एवं कर्मभूमि है। अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। समय का तकाजा है कि डॉ. लोहिया और चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व एवं नीतियों में विश्वास रखने वाले दल एवं व्यक्तियों के समूह एक साथ मिलकर काम करें। आपसी मतभेदों को भुलाकर एक मंच पर एकत्रित हों।

रालोद अध्यक्ष ने कहा, मैं समान विचारधारा वाले दलों एवं व्यक्ति समूहों से अनुरोध करता हूं कि राष्ट्रीय संकट की इस घड़ी में एक साथ काम करने का संकल्प लें ताकि प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों में किसानों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों को उनका हक दिलाने के लिए कारगर मंच मुहैया कराया जा सके।

इस तारीफ के मायने क्या...

 RLD chief says charan singh and lohia's followers should come together.

रालोद, नीतीश, छोटे दलों में दोस्ती के संकेत
चौधरी अजित सिंह की अपील को नीतीश कुमार की अगुवाई वाले जनता दल यू और कई छोटे दलों के एक साथ आने का संकेत माना जा रहा है। भविष्य में ये सभी दल कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर 2017 के विधानसभा चुनाव में विकल्प पेश करने का दावा कर सकते हैं।

अजित ने बिहार में नीतीश के नेतृत्व वाली सरकार की तारीफ की है, नीतीश व शरद यादव को चौधरी चरण सिंह का अनुयायी बताया। इससे जाहिर है कि रालोद का उनके साथ दोस्ती का हाथ बढ़ चुका है। तीन दिन पहले ही अजित सिंह ने लखनऊ में पूर्वांचल, मध्य यूपी और बुंदेलखंड के पिछड़े व अति पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधियों से बातचीत कर इन क्षेत्रों में आठ रैलियां करने और रालोद की सक्रियता बढ़ाने का एलान किया था।

शनिवार को सामाजिक न्याय मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जसवंत सिंह ने अजित व जयंत चौधरी से दिल्ली में मिलकर चौधरी चरण सिंह के अनुयायियों को एकजुट करने में हर संभव सहयोग का वादा किया। ये सारे घटनाक्रम प्रदेश में रालोद की सक्रिय भागीदारी से प्रदेशस्तरीय गठबंधन की दिशा में बढ़ने का इशारा कर रहे हैं। इसके नतीजे अगले कुछ दिनों में दिखने लगेंगे।

...लेकिन मुलायम से दूरी के संकेत

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रालोद अध्यक्ष ने भले ही लोहिया व चरण सिंह के अनुयायियों से एक मंच पर आने की अपील की है, लेकिन मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी से दूरी बनाए रखने के संकेत भी दिए हैं। गुड गवर्नेंस के लिए नीतीश सरकार की तारीफ करने वाले अजित सिंह ने सीएम अखिलेश यादव व सपा सरकार को लेकर एक शब्द नहीं बोला।

नीतीश, शरद यादव को चौधरी साहब का अनुयायी बताया लेकिन मुलायम सिंह को लेकर चुप्पी साधे रखी। उनकी अपील से सपा से एका का संदेश जाता नहीं दिख रहा है। अजित सिंह ने तीन दिन पहले लखनऊ में ही समाजवादी पार्टी के परिवारवाद पर कटाक्ष भी किया था। उन्होंने कहा था, डॉ. लोहिया परिवारवाद के खिलाफ थे लेकिन यहां तो मुलायम परिवार ही समाजवादी परिवार है।

चार को बड़ौत जाएंगे शरद, नीतीश व मरांडी
रालोद व जदयू की दोस्ती की नींव 4 अक्टूबर को रालोद की बड़ौत रैली में पड़ जाएगी। चौधरी अजित सिंह के बागपत संसदीय क्षेत्र में होने वाली इस रैली में नीतीश कुमार, शरद यादव, केसी त्यागी, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और बसपा छोड़ने वाले पूर्व मंत्री बीएस-4 के अध्यक्ष आरके चौधरी और कुछ अन्‍य छोटे दलों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। जदयू और रालोद पहले भी नजदीक आए थे। उस समय दोनों दलों के विलय किए जाने की चर्चा थी लेकिन आखिरी वक्त में यह दोस्ती परवान नहीं चढ़ सकी थी।

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