मंत्री ने जताई संरक्षण गृह में बालिकाओं के शोषण की आशंका
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महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने देवरिया के बालिका संरक्षण गृह में बालिकाओं के शोषण की आशंका जताई है। उन्होंने कहा, हालांकि अभी मामले की रिपोर्ट नहीं आई है लेकिन अगर कुछ गलत हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और एडीजी महिला हेल्पलाइन अंजू गुप्ता को जांच के लिए भेजा गया है। वह मंगलवार को एनेक्सी मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।
जोशी ने बताया कि देवरिया के मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान का 2010 में पंजीकरण हुआ था। उसी वर्ष इसे बाल, बालिका और महिला संरक्षण गृह का काम भी दे दिया गया।
2017 में जब इस संस्था को बंद करने के आदेश दिए गए थे, तब वहां 28 बालिकाएं और लड़के थे। संस्था के रिकॉर्ड में 42 बालक-बालिकाओं की जानकारी मिली है। जबकि जांच में वहां 23 लड़कियां ही मिली हैं। बाकी कहां गई? इसका पता लगाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हाईपावर कमेटी ने लड़कियों से बातचीत की है। कई अन्य के बयान भी दर्ज किए गए हैं। कई नई जानकारियां सामने आ रही हैं। बयानों के अनुसार, संस्था का रिकॉर्ड गड़बड़ मिला है।
मंत्री ने कहा, हाईकोर्ट के फैसले के बाद 2017 में सीबीआई ने सभी बाल गृहों की जांच की थी। इसके बाद हमारी सरकार ने 21 संरक्षण गृहों की मान्यता समाप्त कर दी है। सपा और बसपा ने इन पर नजर रखने वाली कमेटी में गलत लोगों को रखा था।
सरकार 70 से अधिक लोगों पर कार्रवाई कर रही है। जांच के बाद जिन बालिका संरक्षण गृहों में अच्छी सुविधाएं नहीं पाई जाएंगी तो उनको दी जाने वाली सरकारी सहायता रोक दी जाएगी।
सपा-बसपा के कार्यकाल में हुआ गड़बड़
रीता जोशी ने देवरिया कांड में सपा-बसपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया। कहा, जो दल हल्ला मचा रहे हैं उनके ही कार्यकाल में ये संरक्षण गृह फले-फूले। वे बताएं कि उन्होंने कितने लोगों को सरकारी सहायता से आगे बढ़ाया।
सपा के कार्यकाल में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी का गठन हुआ था। बसपा के जवाब में कहा, संस्था का पंजीकरण 2010 में हुआ था। आखिर किस आधार पर उसे इतना बड़ा कार्य दिया गया। इस मामले में स्थानीय स्तर पर लापरवाही बरती गई है।
यदि थोड़ी सी सावधानी बरती जाती तो ये घटना नहीं होती। सरकार अब मंडल स्तर पर बाल संरक्षण गृह खोलेगी। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के सुझावों पर अमल किया जाएगा। भाजपा सरकार एक एनजीओ को काम सौंप रही है।
यदि जरूरत पड़ी तो इस मामले में थर्ड पार्टी जांच भी कराई जाएगी। उन्होंने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।