फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   riots because of BJP and Sp

चुनाव में जीत: सांप्रदायिकता बना ट्रंपकार्ड

Mon, 11 Aug 2014 01:23 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 11 Aug 2014 01:23 AM IST
विज्ञापन
riots because of BJP and Sp

उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव वाली घटनाओं पर भाजपा आक्रामक रवैया अपनाए हुए है। सत्ताधारी सपा उसका काउंटर नहीं कर पा रही है। सामाजिक तनाव की घटनाओं वाले स्थानों पर सपा नेता निराशाजनक भाव में दिख रहे हैं।

विज्ञापन


जनाधार सिकुड़ने के डर से बसपा हाशिये पर आ गई है। वह किसी भी घटना में स्टैंड नहीं ले पा रही है। मुजफ्फरनगर दंगे से शुरू हुई भाजपा की आक्रामक राजनीति अब पश्चिमी यूपी और प्रदेश भर में पहुंच गई है।
विज्ञापन


हर छोटी-बड़ी घटना पर भाजपा के स्थानीय से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेता पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री की तमाम कोशिशों के बावजूद सपा नेता ऐसी घटनाओं से खुद को अलग रखे हुए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

डरा-धमका कर चुप नहीं किया जा सकता

riots because of BJP and Sp

पश्चिमी यूपी से ताल्लुक रखने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. सुधीर पंवार कहते हैं कि पश्चिमी जिलों में आबादी की संरचना और अनुपात इस तरह का है कि हिंदू-मुस्लिमों को डरा-धमका कर चुप नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक स्तर पर दिक्कतें तब शुरू हुईं जब सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों ने ही मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के लिए उनका तुष्टिकरण शुरू कर दिया।

इससे मुसलमानों को राजनीति में प्रतिनिधित्व भी ज्यादा मिला। राम मंदिर आंदोलन के समय भाजपा ने धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश की लेकिन सपा-बसपा के गठबंधन से दलित-पिछड़ों की एकजुटता ने उसे नाकाम कर दिया था।

लोकसभा चुनाव में भाजपा ध्रुवीकरण कराने में सफल रही तो उसके पीछे मुजफ्फरनगर दंगे का अहम भूमिका रही। इस दंगे में मुस्लिमों के सामने जाटों के खड़ा होने का एक कारण यह भी था कि सामाजिक तौर पर उनकी ताकत राजनीति में परीलक्षित नहीं हो रही थी। भाजपा को इसका अहसास है।

गर्वनेंस पर राजनीति हावी

riots because of BJP and Sp

भाजपा लोकसभा चुनाव के प्रयोग को विधानसभा में भी दोहराना चाहती है। इसलिए सामाजिक तनाव बढ़ाने वाली घटनाओं में आक्रामक बनी हुई है।

प्रो. पंवार कहते हैं कि सपा सरकार की गर्वनेंस पर उसकी राजनीति हावी दिखती है। सत्ताधारी पार्टी को अपनी राजनीति और सरकार में संतुलन साधना होता है। यूं भी सत्ता में होने के कारण सपा, भाजपा की तरह आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति नहीं कर सकती। वह कहते हैं कि दंगों ने बसपा को हाशिये पर ला दिया है।

उसकी स्थिति पश्चिमी यूपी में चौधरी अजित सिंह जैसी हो गई। वे न मुसलमानों का मोह छोड़ पा रहे और न ही अपने बेस वोट का। मुजफ्फरनगर में एक सामाजिक संगठन चलाने वाले असद फारूखी कहते हैं कि वाट्स एप और फेसबुक के जरिये इन दिनों जहरीला प्रचार हो रहा है।

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद, लगता है कि पश्चिमी यूपी को सियासी प्रयोगशाला बनाया जा रहा है। जब तक लोग साजिशों को समझेंगे तब तक काफी देर हो चुकी होगी।

दो माह में सांप्रदायिक विवाद

riots because of BJP and Sp
क्षेत्र--विधानसभा--उपचुनाव की सीटें
पश्चिमी यूपी--259--05 (सहारनपुर, नोएडा, कैराना, बिजनौर और ठाकुरद्वारा)
अवध--53--01 (लखनऊ)        
तराई--29--02 (निघासन, बल्ह)
पूर्वी यूपी--16--02 (सिराथू, रोहनिया)
बुंदेलखंड--06--02 (चरखारी, हमीरपुर)

पश्चिमी यूपी: 259 घटनाएं
सहारनपुर--47
शामली--30
मेरठ--30
मुरादाबाद--30
संभल--30

अमरोहा--28
बुलंदशहर--15
सहारनपुर--15
गाजियाबाद/नोएडा--13
बागपत--10
रामपुर--10

अवध क्षेत्र में हुई घटनाएं

riots because of BJP and Sp

लखनऊ--10
उन्नाव--22
कानपुर--16
बाराबंकी--05

तराई क्षेत्र: 29 घटनाएं:
बहराइच--10
बलरामपुर--08
खीरी--07
श्रावस्ती--04

पूर्वी यूपी: 16 घटनाएं
वाराणसी--05
प्रतापगढ़--05
फतेहपुर--02
कौशांबी--02
मिर्जापुर--02
बुंदेलखंड--6 घटनाएं

हमीरपुर--03
महोबा--03

तनाव का पैटर्न एक जैसा

riots because of BJP and Sp

वेस्ट यूपी के सभी जिलों में तनाव की घटनाओं का पैटर्न एक जैसा है। नगीना क्षेत्र में रामपुर गांव में 20 जून को सामुदायिक केंद्र में म्यूजिक बजाने से मना करने को लेकर शुरू हुए विवाद में दो संप्रदाय आमने-सामने आ गए।

पांच दिन बाद शेरकोट क्षेत्र के नूरपुर छीपरी गांव में ग्राम प्रधान के भतीजे के जन्म दिन पर म्यूजिक बजाने से मना करने पर शुरू हुआ विवाद तनाव में बदल गया। एक धर्मस्थल को क्षतिग्रस्त तक करने की कोशिशें हुईं।

अब ग्रामीण कहते हैं, सब कुछ गलतफहमी में हुआ। जुलाई के मध्य में इसी जिले में बिजनौर-नजीबाबाद के बीच हाईवे पर स्थित किरतपुर कस्बे में गेट के निर्माण का इसलिए विरोध हुआ कि उसका ऊपरी हिस्सा मीनार जैसा है।

इसे लेकर कई दिनों तक माहौल गरमाया रहा। बाद में इसी पैटर्न पर कांठ, संभल और हद तक सहारनपुर में हिंसक विवाद हुए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed