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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Revised DPR will have to be given for Golf City: Decision in LDA board meeting, time till 2026 for development of Metro City

गोल्फ सिटी के लिए देनी होगी संशोधित डीपीआर : एलडीए बोर्ड की बैठक में फैसला, मेट्रो सिटी के विकास के लिए 2026 तक का समय

Tue, 10 May 2022 01:39 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, c
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, c Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 10 May 2022 01:39 PM IST
सार

एलडीए बोर्ड ने 15 दिसंबर 2021 को लिए गए सीजी सिटी में भूखंड की कीमतें फ्रीज करने के फैसले को निरस्त कर दिया है। ऐसे में अब यहां वापस कीमतें बढ़ सकेंगी। सीजी सिटी से लगी योजना में करीब दोगुनी दरें होने के बाद भी अधिकारियों ने मनमाने तरीके से पहले सीजी सिटी की दरों को फ्रीज कर बढ़ाने पर रोक लगा दी थी।

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Revised DPR will have to be given for Golf City: Decision in LDA board meeting, time till 2026 for development of Metro City
एलडीए - फोटो : amar ujala

विस्तार

अंसल गोल्फ सिटी, मेट्रो सिटी गर्व बिल्डटेक में सालों से अपना भूखंड, भवन मिलने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। ओमेक्स को मेट्रो सिटी का प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए पांच साल का समय मिल गया है। वहीं, एलडीए समिति की शर्तें पूरा करने पर अंसल एपीआई को भी सुशांत गोल्फ सिटी पूरा करने के लिए पांच वर्ष मिलेंगे। इसके लिए अंसल एपीआई को समिति की शर्तों को शामिल करते हुए संशोधित डीपीआर एलडीए को देकर स्वीकृति लेनी होगी।

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एलडीए बोर्ड की सोमवार की बैठक में ये फैसले हुए। पूर्व में शासन से पांच साल का अतिरिक्त समय देने का फैसला लिया जा चुका है। इसके लिए अंसल एपीआई ने संशोधित डीपीआर एलडीए को दी थी। एलडीए सचिव पवन गंगवार ने बताया कि समय विस्तार के लिए आए प्रस्ताव को सशर्त अनुमति दी गई है। इसके लिए समिति की शर्तों को शामिल करते हुए संशोधित डीपीआर देनी होगी। इसके बाद ही शुल्क जमा कर अंसल को विकास कार्य पूरा करने का मौका मिलेगा। इससे पहले गोल्फ सिटी का क्षेत्रफल भी अंसल एपीआई एक तिहाई घटा चुका है। वहीं, अर्जन विवाद के चलते 143 एकड़ जमीन पर विकास कार्य कराने के लिए एक साल का जीरो पीरिएड भी मिला है। 2017 में अंसल एपीआई के अनुबंध की समयसीमा खत्म हो चुकी है। अब डीपीआर स्वीकृत होने से पांच साल का समय अंसल के पास विकास कार्य पूरा करने के लिए होगा।
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मेट्रो सिटी के लिए ओमेक्स को कोरोना संक्रमण, आउटर रिंगरोड के निर्माण, अर्जनीय विवाद से काम प्रभावित होने पर पांच साल का जीरो पीरिएड मिला है। अनुबंध के मुताबिक विकास की समयसीमा 2021 में खत्म हो चुकी है। अब ओमेक्स यहां 2026 तक काम कर सकेगा। वहीं, गोमतीनगर विस्तार सेक्टर-7 के लिए ओमेक्स के सुझाए ले-आउट संशोधन को भी बोर्ड ने मंजूरी दे दी। बोर्ड बैठक में वीसी अक्षय त्रिपाठी के अलावा सचिव पवन गंगवार, अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा, नामित सदस्य रामकृष्ण यादव, राघवराम तिवारी थे।
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जेम पोर्टल से होगी तैनाती
बोर्ड ने फै सला लिया कि वित्त एवं लेखा विभाग में आउटसोर्सिंग सेवाप्रदाता से सीधे प्रधान लिपिक, अनुभाग अधिकारी, सहायक लेखाकार की तैनाती नहीं होगी। जेम पोर्टल से ही नियुक्ति की जाएगी। वहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियुक्त नहीं किया जाएगा।

रिफा-ए-आम में बनेगा अस्पताल
एलडीए की रिफा-ए-आम योजना में ग्रुप हाउसिंग की 3600 में से 1500 वर्गमीटर जमीन पर नर्सिंग होम के लिए भू-उपयोग को अनुमति मिल गई है। कोविड में अस्पताल की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया। वहीं, बसंतकुंज योजना के सेक्टर-डी में पुलिस थाने के इस्तेमाल से बाहर हुई जमीन को नर्सिंग होम की जगह व्यावसायिक किया गया है। विराजखंड में छोटे भूखंड सीपी-89 व सीपी-90 को जोड़कर बड़ा भूखंड बनाया गया है। इसी तरह कानपुर रोड योजना के सेक्टर बी में केबी-32 व केबी 33 को जोड़कर बड़ा भूखंड बनाया गया है। तालकटोरा रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया के भूखंड 148ए को अब आवासीय भू-उपयोग कर दिया गया है।

सीजी सिटी में कीमतें बढ़ेंगी
एलडीए बोर्ड ने 15 दिसंबर 2021 को लिए गए सीजी सिटी में भूखंड की कीमतें फ्रीज करने के फैसले को निरस्त कर दिया है। ऐसे में अब यहां वापस कीमतें बढ़ सकेंगी। सीजी सिटी से लगी योजना में करीब दोगुनी दरें होने के बाद भी अधिकारियों ने मनमाने तरीके से पहले सीजी सिटी की दरों को फ्रीज कर बढ़ाने पर रोक लगा दी थी। भविष्य में ऑडिट आपत्ति की आशंका को देखते हुए अब पुराना फैसला निरस्त कर दिया गया है।


छूट चाहिए तो बोर्ड में प्रस्ताव लाइए
कोरोना की दूसरी लहर में एलडीए से संपत्तियां खरीदने वाले कई लोग बैंकों व प्राधिकरण में काम ठप होने से अप्रैल व मई 2021 में नियमानुसार कीमतों में छूट का फायदा नहीं ले सके। ऐेसे आवंटियों के केस की सुनवाई बोर्ड खुद करेगा। ऐसे केस का प्रस्ताव बनाकर बोर्ड के सामने रखना होगा। हालांकि, अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया कि यह प्रक्रिया कहीं अधिक पेचीदा हो सकती है, क्योंकि आमतौर पर बोर्ड तीन से चार महीने के बाद ही बैठक कर पाता है।


 

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