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Amethi News: जिला प्रशासन की जांच में खुलासा, अमेठी में मुआवजे के खेल में अफसरों ने लुटाए 380 करोड़
Tue, 01 Nov 2022 11:08 AM IST
शाहरुख खान
राजेश कुमार मिश्र, अमर उजाला, अमेठी
राजेश कुमार मिश्र, अमर उजाला, अमेठी
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 01 Nov 2022 11:08 AM IST
सार
अमेठी में छह वर्ष पूर्व बने लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े बाईपास के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया। अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर कृषि भूमि का मुआवजा राष्ट्रीय राजमार्ग के रेट पर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजस्व विभाग के अफसरों ने भूमि अधिग्रहण में बड़ा खेल करते हुए मुआवजे के नाम पर 380 करोड़ रुपये लुटा दिए। मामला अमेठी का है। छह वर्ष पूर्व बने लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े बाईपास के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया। अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर कृषि भूमि का मुआवजा राष्ट्रीय राजमार्ग के रेट पर कर दिया। इससे जिस मुआवजे पर 200 करोड़ रुपये ही खर्च होते, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को ढाई गुना ज्यादा 560 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एनएचएआई की ओर से 2020 में दायर मध्यस्थता अधिकरण की फाइल कुछ दिन पूर्व मौजूदा जिला मजिस्ट्रेट के सामने आई। इस वाद में एनएचएआई ने अभिनिर्णय व भुगतान पर प्रश्नचिह्न लगाया था। तब जिला मजिस्ट्रेट राकेश कुमार मिश्र ने एडीएम न्यायिक राजकुमार द्विवेदी की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय कमेटी से जांच कराई। जांच में सामने आया कि मुआवजा वितरण में गड़बड़ी न की जाती तो एनएचएआई के 380 करोड़ रुपये बच जाते। हालांकि इस मामले में राजस्व विभाग का कोई अफसर बोलने को तैयार नहीं है।
राजस्व विभाग के अफसरों ने ऐसे किया खेल
केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2016 में लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण (टू लेन से फोर लेन) की कवायद शुरू हुई। साथ ही, जिले से होकर गुजरने वाले 49.5 किमी मार्ग पर जगदीशपुर (उतेलवा से कनकूपुर) व मुसाफिरखाना में (मठा भुसुंठा से सराय सुलेमान) तक बाईपास का सर्वे भी हुआ। इस सर्वे में 30 गांव की जमीन आई जो कृषि कार्य से जुड़ी थी। वहीं, एनएच चौड़ीकरण में 15 गांव की कई हेक्टेयर जमीन आई।
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जांच टीम में शामिल एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राजस्व विभाग के तत्कालीन अफसरों ने जगदीशपुर बाईपास पर स्थित 95 हेक्टेयर व मुसाफिरखाना बाईपास पर 39 हेक्टेयर कृषि भूमि के स्वामियों को एनएच के रेट से भुगतान कर एनएचएआई को बड़ी आर्थिक क्षति पहुंचाई। प्रथम दृष्टया इसके प्रमाण भी मिले हैं।
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मामले का खुलासा तब हुआ जब एनएचएआई की ओर से 2020 में दायर मध्यस्थता अधिकरण की फाइल कुछ दिन पूर्व मौजूदा जिला मजिस्ट्रेट के सामने आई। इस वाद में एनएचएआई ने अभिनिर्णय व भुगतान पर प्रश्नचिह्न लगाया था। तब जिला मजिस्ट्रेट राकेश कुमार मिश्र ने एडीएम न्यायिक राजकुमार द्विवेदी की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय कमेटी से जांच कराई। जांच में सामने आया कि मुआवजा वितरण में गड़बड़ी न की जाती तो एनएचएआई के 380 करोड़ रुपये बच जाते। हालांकि इस मामले में राजस्व विभाग का कोई अफसर बोलने को तैयार नहीं है।
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राजस्व विभाग के अफसरों ने ऐसे किया खेल
केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2016 में लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण (टू लेन से फोर लेन) की कवायद शुरू हुई। साथ ही, जिले से होकर गुजरने वाले 49.5 किमी मार्ग पर जगदीशपुर (उतेलवा से कनकूपुर) व मुसाफिरखाना में (मठा भुसुंठा से सराय सुलेमान) तक बाईपास का सर्वे भी हुआ। इस सर्वे में 30 गांव की जमीन आई जो कृषि कार्य से जुड़ी थी। वहीं, एनएच चौड़ीकरण में 15 गांव की कई हेक्टेयर जमीन आई।
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जांच टीम में शामिल एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राजस्व विभाग के तत्कालीन अफसरों ने जगदीशपुर बाईपास पर स्थित 95 हेक्टेयर व मुसाफिरखाना बाईपास पर 39 हेक्टेयर कृषि भूमि के स्वामियों को एनएच के रेट से भुगतान कर एनएचएआई को बड़ी आर्थिक क्षति पहुंचाई। प्रथम दृष्टया इसके प्रमाण भी मिले हैं।