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कैग रिपोर्ट में खुलासा : सिंचाई विभाग ने ठेकेदार को पहुंचाया 96.98 करोड़ का अनुचित लाभ

Fri, 20 Aug 2021 07:33 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 20 Aug 2021 07:33 PM IST
सार

पीडब्ल्यूडी ने वन विभाग की स्वीकृति के बिना इंडो-नेपाल बॉर्डर खंड, लखीमपुर खीरी में एक सड़क को तीन मीटर से बढ़ाकर 7 मीटर चौड़ा कर दिया गया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में इसे वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन बताया है।

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Revealed in CAG report: Irrigation Department gave undue benefit of 96.98 crores to the contractor
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

सिंचाई व जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदार को 96.98 करोड़ का अनुचित लाभ पहुंचाया है। ठेकेदार ने बिना अनुमति खनन कर उपखनिजों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया, जबकि उनसे कोई वसूली नहीं की गई।

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विधानसभा में पेश की कैग रिपोर्ट के अनुसार, जांच में पता चला कि कनहर नदी में निर्माण के लिए सिंचाई विभाग मिर्जापुर के अधिकारियों ने ठेकेदार को अनुमति दी थी। ठेकेदारों को सुंदरी गांव में ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग कार्य की अनुमति दी गई। लेकिन उन्होंने नदी में उपलब्ध कोर्स सैंड, स्पिलवे फाउंडेशन के साथ ही सुंदरी खदान में पत्थर का उपयोग बिना अनुमति लिए किया।
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विभाग ने इसकी वसूली न करके ठेकेदार को 96.98 करोड़ का अनुचित लाभ दिया। इसी तरह झांसी की मऊरानी तहसील में 1073639 घनमीटर उत्खनित चट्टानों को बिना दर निर्धारण व अपारदर्शी प्रक्रिया से 90054 घन मीटर चट्टानों को अनुपयोगी घोषित किया। इससे 28.44 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। 
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बिना अनुमति वन विभाग की भूमि पर चौड़ी कर दी सड़क
पीडब्ल्यूडी ने वन विभाग की स्वीकृति के बिना इंडो-नेपाल बॉर्डर खंड, लखीमपुर खीरी में एक सड़क को तीन मीटर से बढ़ाकर 7 मीटर चौड़ा कर दिया गया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में इसे वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन बताया है। इतना ही नहीं इस परियोजना में भूमि अधिग्रहण की गति भी धीमी पाई गई है। इसके चलते परियोजना के कई कार्य समयसीमा के भीतर नहीं हो पाए। मशीनों की अलग-अलग दरें लगाए जाने से परियोजना लागत में 11.93 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लोक निर्माण विभाग ने वेब आधारित प्रणाली सृष्टि पर सीबीआर, यातायात घनत्व, पुलिया, पुल और सड़क दुर्घटनाओं आदि के रखरखाव को अगस्त 2019 शामिल नहीं किया था। राज्य सड़क निधि के 212 नमूना जांचों से पता चला कि 106 कार्यों के लिए राशि निर्धारित 24 माह के स्थान पर दो से सात वर्ष की अवधि में अवमुक्त की गई। विभाग में अगस्त 2014 से मार्च 2019 के बीच ईंट टेंडर के माध्यम से निविदाएं आमंत्रित की गईं। लेकिन, 78 प्रतिशत से अधिक अनुबंधों में दस्तावेजों को भौतिक रूप से स्वीकार किया गया। 


मिट्टी नहीं बेची, हुआ नुकसान 
राजकीय निर्माण निगम को डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के नए परिसर में निकली मिट्टी को बेचा नहीं गया। इस तरह से राजकीय खजाने को 1.41 करोड़ के राजस्व से वंचित किया गया। राज्य सेतु निगम ने वाराणसी में सामनेघाट-रामनगर रोड पर दो लेन सेतु बनाने का काम 2015 में दिया था। इसमें एक ठेकेदार को कार्य आवंटन में अनुचित लाभ देने के कारण सेतु निगम को 2.20 करोड़ का नुकसान हुआ।

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