कश्मीरी युवक बोले, लखनऊ भी घर जैसा सा ही लगता है, डरने की क्या जरूरत
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हम शहर में सुरक्षित हैं और लखनऊ भी घर सा ही लगता है, यहां डर का क्या काम। रही बात हिंसा की तो इससे सरकार निपट ही लेगी। ये बातें कश्मीर के कुलगाम से साथियों संग आकर समतामूलक चौराहे, गोमतीनगर के इलाकों में मेवे बेच रहे मंजूर अहमद ने अमर उजाला से शनिवार को बातचीत के दौरान कहीं।
मंजूर अहमद ने बताया कि अमीनाबाद में किराए के मकान में रहते हैं। सुबह खाना बनाने व खाने के बाद मेवे लेकर दोपहर से पहले यहां पहुंचे जाते हैं। शाम तक माल बेचते हैं और रात होने से पहले ही लौट जाते हैं। यहां रहते हुए एक माह से अधिक हो गया है। लेकिन अभी तक न तो सड़क पर ही कोई दिक्कत सामने आई है न ही मोहल्ले में। अब तो मौसम भी हमारे कश्मीर सा हो चला है, तो दिनभर साथियों के साथ रहने के चलते घर की याद नहीं रहती।
पुराने शहर के तनावपूर्ण माहौल के बारे में पूछने पर पर मंजूर कहते हैं कि अखबारों में पढ़ते तो हैं, लेकिन डर नहीं लगता। यहां इस इलाके में पुलिसिया सक्रियता इतनी है कि सबकुछ सामान्य लगता है। नया शहर हर गुजरते साल के साथ बदलता जा रहा है।
तीन-चार सालों से यहां साथियों संग आ रहे मंजूर ने बताया कि कश्मीर से 12-14 लोगों का दल आया है, कुछ लोग रोज यहीं बैठे हैं तो कई डालीगंज पुल के आसपास मेवे की रेड़ी लगाते हैं। साथ आए सब्जाद ने बताया कि पुलिस भी तंग नहीं करती, हां कभी कभार वीआईपी मूवमेंट होता है या एसएनए मोड़ की तरफ अगर ट्रैफिक बढ़ता है तो दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ता है। सब्जाद ने बताया कि कुछेक दिनों में इलाके के और भी लोग यहां गर्म ऊनी कपड़े बेचने पहुंचेंगे।