आरसंस की मनमानी पर रेरा की सख्ती, लगाया जुर्माना, तय समय में पंजीकरण नहीं हुआ तो होगी वसूली
मनमानी पर उतारू बिल्डर आरसंस के खिलाफ रेरा ने और सख्ती दिखाते हुए 38.15 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अगर बिल्डर ने तीन महीने में पंजीकरण के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की तो रेरा रकम की वसूली को कार्रवाई करेगा।
इसके अलावा बिल्डर के खिलाफ एसआईटी जांच पर मुहर लगाते हुए इसकी संस्तुति गृह विभाग से करने का फैसला किया गया है। सरकारी सेवा में होने के बाद भी बिल्डर के प्रतिनिधि विपिन श्रीवास्तव के खिलाफ संपत्ति और आचरण की जांच की सिफारिश रेरा ने की हुई है।
रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार और सदस्य भानु प्रताप सिंह का यह आदेश 117 शिकायतों और सचिव अबरार अहमद की जांच रिपोर्ट व संस्तुति की सुनवाई के बाद आया है। रेरा ने सुनवाई में पाया कि देवा रोड पर राम स्वरूप विश्वविद्यालय के सामने लखनऊ और राजधानी की सीमा पर बाराबंकी में बताए गए प्रोजेक्टों में बिल्डर ने फ्रॉड किया। रेरा के सामने आईं शिकायतों में 12 जीवनदीप, छह प्रखर सिटी-1, दो जीवन प्रकाश और 97 शिकायतें प्रखर सिटी-2 की हैं।
सचिव अबरार अहमद ने खुद इन शिकायतों की सुनवाई के पहले जांच कराई। तकनीकी सलाहकार ने भी सत्यापन कर रिपोर्ट दी। इसके बाद सचिव ने 22 अप्रैल 2019 को अपनी संस्तुतियां रेरा के चेयरमैन को सौंपी थीं। इसके बाद बिल्डर को मौका दिया गया। इसमें उसने तर्क रखते हुए परियोजना को स्वीकृत कराकर डेढ़ साल में प्रोजेक्ट को पूरा करने की बात कही। नवंबर 2020 तक प्रोजेक्टों में कब्जा देना या नियमानुसार पैसा वापस करने की बात कही गई।
किस प्रोजेक्ट में कितनी बुकिंग
- जीवनदीप कॉलोनी 1800
- प्रखर सिटी-1 475
- प्रखर सिटी-2 425
- जीवन ज्योति 74
आवंटियों से वसूले 82.21 करोड़ नहीं लौटाए
...और बाद में बढ़ा दी भूखंडों की कीमत
प्रखर सिटी-2 के आवंटियों ने बताया कि 2012 में बिल्डर ने उन्हें 325 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से बुकिंग कराई। अब इन पर कब्जा देने की जगह कीमत बढ़ाकर 1050 रुपये प्रति वर्गफीट कर दी गई। यहां 1000 और 2000 वर्गफीट के भूखंड बिल्डर ने बेचे हैं।
80 एकड़ की इस जमीन के लिए देव सिटी केनाम से आवेदन एलडीए में किया गया, जिस ले-आउट को 2017 में ही निरस्त कर दिया गया था। इसकी अनुमानित लागत 166 करोड़ रुपये बताई गई थी। यहां आवंटियों को धोखे में रखकर करीब 15 करोड़ रुपये जमा करा लिए गए।
आवंटियों से ली रकम से खरीदी जमीन
रेरा ने जांच में पाया कि आवंटियों से पैसा जमा करा बिल्डर नई जमीनें खरीद रहा था। प्रोजेक्ट को पूरा कर कब्जा देने के लिए उसकी ओर से प्रयास ही नहीं किए गए। किसी भी प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने के साक्ष्य सत्यापन में नहीं मिले। यह पूरी तरह से आवंटियों से जमा कराई रकम का दुरुपयोग है।
अब बिल्डर के पास प्रोजेक्ट पूरा करने को पैसा ही नहीं है। ऐसे में रेरा ने बिल्डर पर भरोसा करना ठीक नहीं समझा कि वह अपने शपथ पत्र के मुताबिक प्रोजेक्ट पूरा कर आवंटियों को पैसा देगा। विकासकर्ता खुद भी रेरा के सामने आने की जगह फरार बने रहे।
सुनवाई में आए सरकारी आदमी की जांच की संस्तुति
रेरा में सुनवाई के बीच निदेशक आशीष श्रीवास्तव व अन्य कभी शामिल ही नहीं हुए। केवल प्रतिनिधि के रूप में अवर अभियंता विपिन श्रीवास्तव आते रहे। हालांकि बाद में उनका भी आना बंद हो गया। विपिन खुद 2006 से बख्शी का तालाब विकासखंड में तकनीकी सहायक हैं। रेरा ने अब उनके खिलाफ भी संपत्ति के साथ आचरण की जांच की संस्तुति की है। इसके लिए संबंधित विभाग को सूचना भेजी जाएगी।