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अपराध के मामले में जनता से आगे निकले माननीय

Fri, 04 Oct 2013 02:17 AM IST
अंकुर तिवारी/लखनऊ
अंकुर तिवारी/लखनऊ Updated Fri, 04 Oct 2013 02:17 AM IST
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report on criminal politician

जनता से ज्यादा अपराधी हमारे नेताओं के बीच में हैं। यूपी में तो माननीयों में अपराध की दर आम आदमी के मुकाबले कई गुना ज्यादा है।

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आम जनता के बीच हजारों में एक अपराधी है तो नेताओं में हत्या जैसे अपराध के आरोपियों को ढूंढने के लिए दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं करना पड़ता।

विधानसभा सदस्यों पर दर्ज आपराधिक मामले और प्रदेश में हुए संगीन अपराधों का तुलनात्मक अध्ययन कुछ ऐसा ही बयां कर रहा है।

विधायकों के दाखिल किए गए हलफनामों के आधार पर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट और नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों को इस तुलनात्मक अध्ययन का आधार बनाया गया है।
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गंभीर अपराध के मामलों से जुड़े माननीयों की दर चौंकाने वाली है। हत्या जैसे गंभीर अपराध को ही ले लीजिए। वर्ष 2012 की विधानसभा के लिए चुने गए 403 विधायकों में हर 11वें पर हत्या का मुकदमा चल रहा है।
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जबकि 25 या उससे अधिक उम्र के आठ करोड़ 62 लाख 62 हजार 985 में से हर 2897 वें व्यक्ति पर हत्या का मामला चल रहा है। हत्या के प्रयास के मामलों में तो माननीयों की स्थिति और भी खराब है।

प्रदेश में हर चौथे माननीय पर हत्या के प्रयास का मामला चल रहा है। जबकि आम आदमी में यह आंकड़ा 4342 व्यक्तियों में से एक पर है। बलात्कार के मामलों में विधायकों की स्थिति थोड़ी बेहतर है।

101 विधायकों में से एक पर रेप का मुकदमा है। वहीं आम जनता में यह आंकड़ा 18268 पर एक व्यक्ति का है। लोगों को गंभीर रूप से चोट पहुंचाने के मामलों में भी माननीय आगे हैं।


हर 15वें विधायक पर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले चल रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजेश मिश्रा कहते हैं कि हमारे समाज में सफेदपोश अपराधियों की संख्या ज्यादा है।

इनमें से ज्यादातर विशिष्ट वर्ग के हैं जैसे राजनेता, बिल्डर व पूंजीपति। अपराधी राजनेता राबिनहुड का मुखौटा ओढ़े हुए हैं। बाहर चाहे वे कैसे भी हों अपने क्षेत्र में वे किसी न किसी रूप में लोगों की मदद करते हैं। यही वजह है कि उनकी स्वीकार्यता बनी हुई है।

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