अलग रंग-ढंग में दिखेगा लखनऊ का चारबाग स्टेशन
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चार साल से अटके चारबाग स्टेशन की रिमाडलिंग करने का काम अब किसी भी वक्त शुरू हो सकता है। इस कार्य के पूर्व रूट रिले इंटरलॉकिंग (आरआरआई) का काम होना था, जिसे रेल मंत्रालय ने पास कर दिया है।
यह कार्य स्टेशन की रिमाडलिंग में सबसे बड़ा रोड़ा था। रेल अफसरों के मुताबिक काम दो साल में खत्म हो जाएगा। वित्तीय वर्ष 2011-12 में चारबाग स्टेशन की रिमाडलिंग का काम मंजूर हुआ था।
इसके तहत स्टेशन यहां से गुजरने वाली अप-डाउन लाइनों को डबल करना था, जिससे ट्रेनों को आउटर में रोकने की समस्या दूर हो सके। वहीं ट्रेनों की स्पीड बढ़ाना भी इसका लक्ष्य था।
लाइनें डबल होने के बाद एक-एक ट्रेन को पास करने का झंझट भी समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म को भी चौड़ा किया जाना था, जिससे ट्रेनें स्टेशन में पहले से ज्यादा अंदर जा सकें।
इसलिए अटका था काम
गाड़ियों को घूमने में होने वाली दिक्कत का भी समाधान होना था। रिमाडलिंग के पूर्व आरआरआई को नए सिरे से व्यवस्थित करना आवश्यक था, क्योंकि नई व्यवस्था के तहत ट्रेनों के संचालन के पूर्व तमाम सिग्नल शिफ्ट करना जरूरी है। यह कार्य रिमॉडलिंग से लगभग तीन गुना महंगा था।
कीमत ज्यादा होने के चलते रिमाडलिंग का काम वहीं अटक गया। बीते माह आरआरआई के कार्य को लेकर रेल मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया था। बुधवार को महाप्रबंधक के साथ हुई डिवीजनल अफसरों की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी देने के संकेत मिले हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी आरआरआई सिस्टम संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की बात कही है।
‘रिमॉडलिंग से लखनऊ स्टेशन पर आने वाली गाड़ियों के प्लेटफॉर्म तक न आने की दिक्कत समाप्त हो जाएगी। वहीं गाड़ियों का घूमना आसान हो जाएगा। ट्रेनों के देर से आने और आउटर पर रोकने आदि की समस्या से भी काफी हद तक छुटकारा मिलेगा।’
राजेश दत्त बाजपेई सीनियर डीओएम, उत्तर रेलवे