{"_id":"60bfc9f98ebc3ef437599293","slug":"relief-from-high-court-to-the-then-sp-cdo-of-barabanki-ban-on-proceedings-in-criminal-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाराबंकी के तत्कालीन एसपी, सीडीओ को हाईकोर्ट से राहत, अपराधिक मामले में कार्यवाही पर लगाई रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाराबंकी के तत्कालीन एसपी, सीडीओ को हाईकोर्ट से राहत, अपराधिक मामले में कार्यवाही पर लगाई रोक
Wed, 09 Jun 2021 01:20 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 09 Jun 2021 01:20 AM IST
सार
राम प्रताप के प्रार्थना पत्र पर सीजेएम ने बीडीओ अनूप कुमार सिंह व ग्राम्य विकास अधिकारी बीना के खिलाफ वादी पर हमला करने इत्यादि आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश बाराबंकी जनपद के देवां थाने को दिया था।
विज्ञापन
लखनऊ हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक आपराधिक मामले में बाराबंकी के तत्कालीन एसपी अरविंद चतुर्वेदी व सीडीओ मेघा रूपम समेत खंड विकास अधिकारी, ग्राम्य विकास अधिकारी, थानाध्यक्ष देवां व एसआई जैद अहमद को बड़ी राहत दी है। इन अफसरों को बाराबंकी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट(सीजेएम) ने विचारण के लिए तलब किया था। कोर्ट ने फिलहाल केस से सम्बंधित प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खाँ ने यह आदेश राज्य सरकार की तरफ से दायर पुनरीक्षण याचिका पर दिया। इसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के 17 फरवरी 2021 के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही पेश हुए। दरअसल, स्थानीय निवासी राम प्रताप के प्रार्थना पत्र पर सीजेएम ने बीडीओ अनूप कुमार सिंह व ग्राम्य विकास अधिकारी बीना के खिलाफ वादी पर हमला करने इत्यादि आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश बाराबंकी जनपद के देवां थाने को दिया था।
विज्ञापन
उक्त एफआईआर पर जांच के दौरान घटना की जांच सीडीओ द्वारा भी की गई। सीडीओ ने अपनी जांच में राम प्रताप के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उधर, पुलिस ने सीडीओ की रिपोर्ट को देखते हुए, विवेचना के उपरांत अभियुक्तों को क्लीन चिट देते हुए, फाइनल रिपोर्ट लगा दी। उक्त फाइनल रिपोर्ट के विरुद्ध एक प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र वादी द्वारा दाखिल किया गया।
विज्ञापन
सीजेएम ने उक्त प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लेते हुए, उपरोक्त सभी अधिकारियों को तलब कर लिया। राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही का कहना था कि सीजेएम का तलबी आदेश मनमाना और अविधिपूर्ण है। कहा गया कि सरकारी अधिकारी होने के नाते इन सभी को सीआरपीसी की धारा 197 के तहत संरक्षण प्राप्त है। न्यायालय ने मामले की सभी परिस्थितियों पर गौर करने के पश्चात सीजेएम कोर्ट के समक्ष चल रही उक्त कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।