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Lucknow News: परामर्श से पटरी पर लौट रहे तलाक तक पहुंचे रिश्ते
Mon, 27 Oct 2025 02:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 27 Oct 2025 02:29 AM IST
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लखनऊ। राज्य महिला आयोग में बिखरते रिश्तों को जोड़ने की अनूठी पहल चल रही है। छोटी-छोटी बातों से बिगड़े संबंधों में आयोग परामर्श के जरिये फिर से मिठास घोल रहा है। तलाक की कगार पर पहुंचे कई जोड़ों को यहां समझाया जा रहा है कि रिश्ते तोड़ना नहीं, संभालना जरूरी है।
आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने खुद तीन ऐसे मामलों का निस्तारण कराया, जिनमें मामूली मनमुटाव था। ऐसे मामलों की सुनवाई दोपहर एक बजे के बाद होती है ताकि पर्याप्त समय देकर दोनों पक्षों की बात सुनी जा सके। करीब डेढ़ घंटे की काउंसिलिंग के बाद अधिकतर जोड़े सुलह के लिए तैयार हो जाते हैं। हर महीने औसतन आठ से नौ जोड़े फिर से एक-दूसरे के साथ नया जीवन शुरू करते हैं।
आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्य बताती हैं कि शहर के एक दंपती में शक की वजह से विवाद चल रहा था। तलाक तक बात पहुंच गई थी। पति, पत्नी से दूर दूसरे शहर में रहता था। इस वजह से शक पैदा हो गया था। पिछले सप्ताह दो घंटे तक काउंसिलिंग कर दंपती का शक दूर किया गया। दोनों ने रिश्ते को एक और मौका दिया। अब दोनों परिजन से दूर हैं, लेकिन एक साथ हैं। परिजन भी खुश हैं। उनका कहना है कि बच्चों की खुशी में ही उनकी खुशी है।
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आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला की कोशिश से इंदिरानागर के शिक्षक दंपती ने दो वर्ष एक साथ दिवाली मनाई। दोनों के बीच शादी के एक साल बाद से विवाद चल रहा था। कई बार परामर्श के बाद जब मामला नहीं सुलझा तो पिछले महीने दोनों के अभिभावकों की काउंसिलिंग की गई। इसके बाद दोनों ने रिश्ते को एक और मौका दिया। दंपती साथ रह रहे हैं। आयोग की ओर से फॉलोअप जारी है।
आयोग की सदस्य एकता सिंह बताती हैं कि इसी इसी सप्ताह शहर निवासी एक दंपती तलाक के लिए आयोग पहुंचे। दोनों का कुछ महीने का बच्चा भी था। दंपती में मामूली बातों पर विवाद चल रहा था। लड़की पक्ष तलाक पर अड़ा था। घंटों परामर्श कर रिश्तों की और बच्चे के लिए मां-पिता की अहमियत को समझाया गया। इसके बाद दोनों अपने बच्चे के लिए रिश्ते को एक नई जिंदगी देने के लिए राजी हो गए।
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आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने खुद तीन ऐसे मामलों का निस्तारण कराया, जिनमें मामूली मनमुटाव था। ऐसे मामलों की सुनवाई दोपहर एक बजे के बाद होती है ताकि पर्याप्त समय देकर दोनों पक्षों की बात सुनी जा सके। करीब डेढ़ घंटे की काउंसिलिंग के बाद अधिकतर जोड़े सुलह के लिए तैयार हो जाते हैं। हर महीने औसतन आठ से नौ जोड़े फिर से एक-दूसरे के साथ नया जीवन शुरू करते हैं।
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आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्य बताती हैं कि शहर के एक दंपती में शक की वजह से विवाद चल रहा था। तलाक तक बात पहुंच गई थी। पति, पत्नी से दूर दूसरे शहर में रहता था। इस वजह से शक पैदा हो गया था। पिछले सप्ताह दो घंटे तक काउंसिलिंग कर दंपती का शक दूर किया गया। दोनों ने रिश्ते को एक और मौका दिया। अब दोनों परिजन से दूर हैं, लेकिन एक साथ हैं। परिजन भी खुश हैं। उनका कहना है कि बच्चों की खुशी में ही उनकी खुशी है।
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आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला की कोशिश से इंदिरानागर के शिक्षक दंपती ने दो वर्ष एक साथ दिवाली मनाई। दोनों के बीच शादी के एक साल बाद से विवाद चल रहा था। कई बार परामर्श के बाद जब मामला नहीं सुलझा तो पिछले महीने दोनों के अभिभावकों की काउंसिलिंग की गई। इसके बाद दोनों ने रिश्ते को एक और मौका दिया। दंपती साथ रह रहे हैं। आयोग की ओर से फॉलोअप जारी है।
आयोग की सदस्य एकता सिंह बताती हैं कि इसी इसी सप्ताह शहर निवासी एक दंपती तलाक के लिए आयोग पहुंचे। दोनों का कुछ महीने का बच्चा भी था। दंपती में मामूली बातों पर विवाद चल रहा था। लड़की पक्ष तलाक पर अड़ा था। घंटों परामर्श कर रिश्तों की और बच्चे के लिए मां-पिता की अहमियत को समझाया गया। इसके बाद दोनों अपने बच्चे के लिए रिश्ते को एक नई जिंदगी देने के लिए राजी हो गए।