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पुनर्वास विवि : संकेतों का ऑडियो प्रारूप में हो सकेगा अनुवाद

Tue, 24 Dec 2024 01:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Tue, 24 Dec 2024 01:25 AM IST
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Rehabilitation University: Signals can be translated into audio format
लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में संकेतों को लिखित पाठ और ऑडियो फॉर्म में अनुवादित किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया से कम सुनने और न बोल पाने वाले विद्यार्थियों के जीवन को आसान किया जा सकेगा। इससे दिव्यांग निर्देशों को आसानी से समझ पाएंगे। यह कार्य आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिकों की मदद से पूरा किया जाएगा।
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आईआईटी बीएचयू और पुनर्वास विवि के बीच मंगलवार को शोध एवं विकास के क्षेत्र में सहयोग और शैक्षणिक विनिमय सत्र (एकेडमिक एक्सचेंज प्रोग्राम) का आयोजन किया गया। अकादमिक व शोध सहयोग, सॉफ्टवेयर विकास, कौशल संवर्द्धन कार्यक्रम, डाटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन के उद्देश्य के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में शीर्ष 12 वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। अध्यक्षता कुलपति प्रो. संजय सिंह ने की।
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विवि के प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय ने बताया कि संवाद सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहयोग से दिव्यांगों के लिए इलेक्ट्रॉनिक हाथ व पैर और कम लागत वाले हाइड्रोलिक घुटने और टखने के जोड़ को लेकर सहयोग पर चर्चा हुई। इसके अलावा दिव्यांगों के लिए गतिशील कृत्रिम पैर, मोटरचालित व्हीलचेयर विकसित करने, विकसित उपकरणों में प्रयुक्त इंजीनियरिंग और नैदानिक परीक्षणों के लिए आपसी सहयोग पर विचार किया गया। यह दोतरफा प्रक्रिया होगी जिसमें आईआईटी बीएचयू इंजीनियरिंग परीक्षणों के लिए अपना समर्थन देगा और पुनर्वास विश्वविद्यालय नैदानिक सुविधा प्रदान करेगा।
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कई समस्याओं को दूर करेंगे सॉफ्टवेयर

ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित किए जाएंगे जो कम सुनने वाले छात्रों के लिए चल रहे कक्षा व्याख्यान को तत्काल पाठ के रूप में अनुवादित कर सकें। यह सॉफ्टवेयर दृष्टिबाधित छात्रों की गतिशीलता में सुधार के लिए विवि का थ्रीडी मानचित्र बनाने और मोबाइल एप के रूप में वॉयस कमांड के साथ कार्य करेगा। यह कम सुनने वाले व्यक्तियों के बीच संवाद और भाषा कौशल के विकास के लिए संवाद चिकित्सा तकनीकों को बेहतर करेगा। सबसे खास बात यह है कि ऐसा साॅफ्टवेयर विकसित किया जाएगा जो संकेत को पाठ और ऑडियो रूप में अनुवादित कर सके।



आधुनिक होंगे प्रयोगशालाओं के उपकरण
प्रो. वीरोदय के मुताबिक, संवाद सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि आईआईटी बीएचयू मौजूदा प्रयोगशाला उपकरणों को इस तरह से संशोधित करे जिससे शारीरिक रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए उनका उपयोग आसान हो। जैसे वॉयस कमांड और लोकोमोटिव एक्सटेंशन। इस पर भी चर्चा हुई कि आईआईटी-बीएचयू के ऑनलाइन डिजिटल संसाधनों के साथ ही बीएचयू के संसाधनों को पुनर्वास विवि के शोधार्थी और शिक्षकों तक पहुंच बनाने के लिए शिक्षण प्लेटफॉर्म एक्सेस की सुविधा मिले। इसके अलावा दिव्यांगों को अनुकूल माहौल में इंटर्नशिप कराने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी।
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