{"_id":"5f3625908ebc3e62254e2081","slug":"regulatory-commission-asked-who-is-responsible-for-power-failure","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नियामक आयोग ने पूछा, बिजली गुल होने का जिम्मेदार कौन, मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नियामक आयोग ने पूछा, बिजली गुल होने का जिम्मेदार कौन, मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
Fri, 14 Aug 2020 11:18 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 14 Aug 2020 11:18 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के खाते में बैलेंस के बावजूद बिजली बंद होने के मामले में राज्य विद्युत नियामक आयोग ने भी सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन और कंपनियों से पूछा कि बिजली गुल होने का जिम्मेदार कौन है।
आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पावर कॉर्पोरेशन के नियंत्रण वाली सभी बिजली कंपनियों को नोटिस देकर इसे प्रथम दृष्टया इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड-2005 का उल्लंघन माना है। आयोग ने इस घटना से ग्रिड की स्थिरता और सुरक्षा को खतरा पैदा होने की आशंका जताते हुए कॉर्पोरेशन व कंपनियों के प्रबंध निदेशकों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने पूछा कि इस घटना में कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए और आपूर्ति बहाल होने में कितना समय लगा है। इसके साथ ही इस चूक के लिए जिम्मेदार व्यक्ति और संस्थाओं की क्या जिम्मेदारी तय की गई। आयोग ने कहा कि क्यों न इस मामले में जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाए।
विज्ञापन
इससे पहले आयोग ने कॉर्पोरेशन की स्मार्ट मीटर योजना की स्वीकृति पर विचार करते समय मीटर रीडिंग के बैक-अप और संचार विफलता की आशंका जताते हुए सवाल उठाए थे। उस समय आयोग ने उपभोक्ता सूचना की सुरक्षा एवं गोपनीयता के भी निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पावर कॉर्पोरेशन के नियंत्रण वाली सभी बिजली कंपनियों को नोटिस देकर इसे प्रथम दृष्टया इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड-2005 का उल्लंघन माना है। आयोग ने इस घटना से ग्रिड की स्थिरता और सुरक्षा को खतरा पैदा होने की आशंका जताते हुए कॉर्पोरेशन व कंपनियों के प्रबंध निदेशकों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
आयोग ने पूछा कि इस घटना में कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए और आपूर्ति बहाल होने में कितना समय लगा है। इसके साथ ही इस चूक के लिए जिम्मेदार व्यक्ति और संस्थाओं की क्या जिम्मेदारी तय की गई। आयोग ने कहा कि क्यों न इस मामले में जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाए।
विज्ञापन
इससे पहले आयोग ने कॉर्पोरेशन की स्मार्ट मीटर योजना की स्वीकृति पर विचार करते समय मीटर रीडिंग के बैक-अप और संचार विफलता की आशंका जताते हुए सवाल उठाए थे। उस समय आयोग ने उपभोक्ता सूचना की सुरक्षा एवं गोपनीयता के भी निर्देश दिए थे।
जांच व पुनरावृत्ति रोकने का सुझाव देने को समिति
कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली गुल होने तथा आगे इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें कॉर्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) एके श्रीवास्तव, निदेशक आईआईटी कानपुर की ओर से नामित विशेषज्ञ तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम आगरा के मुख्य अभियंता एके चौधरी को शामिल किया गया है।
डिस्कनेक्ट कमांड पर उठ रहे सवाल
तकनीकी जानकारों का कहना है कि ऐसे कमांड का औचित्य समझ से परे है जिससे एक साथ इतनी संख्या में उपभोक्ताओं के मीटर बंद कर दिए जाएं। कंप्यूटराइज सिस्टम में किसी भी कमांड को ऑपरेट करने पर लौटने का विकल्प रहता है। जैसा कहा जा रहा है कि गलती से कमांड दब गया तो उसे रिस्टोर करने का विकल्प भी होना चाहिए।
जिनके खाते में पैसा नहीं है उनकी बिजली बंद करना तो ठीक, पर खाते में पैसा होने पर बिजली बंद होना बड़ी चूक है। अगर वास्तव में ऐसा कमांड है तो यह ग्रिड के लिए बड़ा खतरा है। एकाएक बिजली बंद होने से ग्रिड को संभालना मुश्किल हो सकता है।
जिनके खाते में पैसा नहीं है उनकी बिजली बंद करना तो ठीक, पर खाते में पैसा होने पर बिजली बंद होना बड़ी चूक है। अगर वास्तव में ऐसा कमांड है तो यह ग्रिड के लिए बड़ा खतरा है। एकाएक बिजली बंद होने से ग्रिड को संभालना मुश्किल हो सकता है।