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मौत के चार महीने बाद प्लाट की रजिस्ट्री, धोखाधड़ी का केस
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एलडीए में आवंटी की मौत के बाद दूसरे आदमी को खड़ा कर की रजिस्ट्री, धोखाधड़ी का केस
एलडीए में आवंटी की मौत के बाद दूसरे आदमी को खड़ा कर रजिस्ट्री कराने का प्रकरण सामने आया है। मूल आवंटी की पत्नी की शिकायत के बाद जब मामला खुला तो इस प्रकरण में एलडीए ने प्राथमिकी दर्ज कराई है।
गोमतीनगर थाने में एलडीए के अनुभाग अधिकारी विद्या प्रसाद ने आवंटी अनिल कुमार तिवारी की मौत के चार महीने बाद उनके नाम से प्लॉट की रजिस्ट्री कराने के मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।
विद्या प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2010-11 में वह गोमतीनगर योजना के अनुभाग अधिकारी के तौर पर तैनात थे।
वर्ष 2011 में कुंडरी रकाबगंज निवासी अनिल तिवारी के नाम से विभूतिखंड में एक व्यावसायिक प्लॉट की रजिस्ट्री कराई गई थी।
स्व. अनिल तिवारी की पत्नी विमलेश तिवारी की तरफ से एलडीए को प्रार्थनापत्र दिया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि पति की मौत 22 सितंबर 2010 को हो गई थी तो प्लॉट की रजिस्ट्री वर्ष 2011 में कैसे हुई?
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विद्या प्रसाद का कहना है कि अनिल कुमार तिवारी बनकर किसी और व्यक्ति ने रजिस्ट्री कराई है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री में गवाह के तौर पर महानगर निवासी केशव गुरनानी के हस्ताक्षर हैं।
वहीं, एलडीए सूत्रों का कहना है कि केशव गुरनानी एलडीए के लिए काफी चर्चित नाम है जोकि प्राधिकरण की संपत्तियों को जाली दस्तावेज के जरिए आवंटित कराने और रजिस्ट्री कराने में माहिर है।
एलडीए में दलाल के रूप में काम करने वाले गुरनानी के पूर्व में भी कई प्रकरण सामने आ चुके हैं। इनमें जांच एलडीए में चल रही है। इंस्पेक्टर राम सूरत सोनकर ने बताया कि वास्तविकता जानने के लिए पुलिस टीम केशव गुरनानी की तलाश कर रही है।
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एलडीए में आवंटी की मौत के बाद दूसरे आदमी को खड़ा कर रजिस्ट्री कराने का प्रकरण सामने आया है। मूल आवंटी की पत्नी की शिकायत के बाद जब मामला खुला तो इस प्रकरण में एलडीए ने प्राथमिकी दर्ज कराई है।
गोमतीनगर थाने में एलडीए के अनुभाग अधिकारी विद्या प्रसाद ने आवंटी अनिल कुमार तिवारी की मौत के चार महीने बाद उनके नाम से प्लॉट की रजिस्ट्री कराने के मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।
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विद्या प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2010-11 में वह गोमतीनगर योजना के अनुभाग अधिकारी के तौर पर तैनात थे।
वर्ष 2011 में कुंडरी रकाबगंज निवासी अनिल तिवारी के नाम से विभूतिखंड में एक व्यावसायिक प्लॉट की रजिस्ट्री कराई गई थी।
स्व. अनिल तिवारी की पत्नी विमलेश तिवारी की तरफ से एलडीए को प्रार्थनापत्र दिया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि पति की मौत 22 सितंबर 2010 को हो गई थी तो प्लॉट की रजिस्ट्री वर्ष 2011 में कैसे हुई?
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विद्या प्रसाद का कहना है कि अनिल कुमार तिवारी बनकर किसी और व्यक्ति ने रजिस्ट्री कराई है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री में गवाह के तौर पर महानगर निवासी केशव गुरनानी के हस्ताक्षर हैं।
वहीं, एलडीए सूत्रों का कहना है कि केशव गुरनानी एलडीए के लिए काफी चर्चित नाम है जोकि प्राधिकरण की संपत्तियों को जाली दस्तावेज के जरिए आवंटित कराने और रजिस्ट्री कराने में माहिर है।
एलडीए में दलाल के रूप में काम करने वाले गुरनानी के पूर्व में भी कई प्रकरण सामने आ चुके हैं। इनमें जांच एलडीए में चल रही है। इंस्पेक्टर राम सूरत सोनकर ने बताया कि वास्तविकता जानने के लिए पुलिस टीम केशव गुरनानी की तलाश कर रही है।