ई-स्टाम्पिंग का सिस्टम भी बना मुसीबत
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रजिस्ट्री के लिए स्टांप खरीद में होने वाली परेशानी से निजात के लिए शुरू हुई ई-स्टाम्पिंग में रिफंड बड़ी मुसीबत बन गया है।
ऐसे में किसी कारण रजिस्ट्री न कराने वालों के लाखों रुपये फंस गए हैं। परेशान लोग रिफंड के लिए कोषागार के चक्कर काटने को विवश हैं।
रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ई-स्टांपिंग से खरीद के बाद वापसी की दशा में दस फीसदी कटौती के साथ रिफंड कोषागार स्तर से सीधे खरीददार के खाते में जमा करने का प्रावधान है।
जबकि, कोषागारों को रिफंड के लिए अभी तक कोड नंबर जारी न होने से ही दिक्कत हो रही है। शासन ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में अप्रैल से ई-स्टांपिंग व्यवस्था शुरू की थी।
इससे स्टांप खरीदने के बाद सौदा ने निरस्त होने, स्टांप की वैधता अवधि खत्म होने या प्रिंट खराब होने की स्थिति में खरीददारों की रकम रिफंड नहीं हो पा रही।
वकीलों के अनुसार इसके चलते करीब एक करोड़ की रकम फंसी हुई है। जबकि, रजिस्ट्री विभाग 30 से 35 लाख रुपये रिफंड के मामले लंबित होने की बात कह रहा है।
सहायक आयुक्त निबंधन ओपी सिंह का कहना है कि ई-स्टांपिंग से खरीद के बाद वापसी के लिए शासन स्तर से संबंधित ट्रेजरी को एक कोड नंबर आवंटित किया जाता है।
इसी कोड की मदद से ही वापस किए गए स्टांप की राशि में दस फीदसी कटौती के बाद शेष रकम खरीददार के बैंक खाते में जमा करा दी जाती है।
ट्रेजरी को दिए जाने वाले उक्त कोड नंबर के आवंटन में देरी से ही लोगों को परेशानी हो रही है।