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रीता बहुगुणा जोशी ने निकाली कांग्रेस के ब्राह्मण कार्ड की हवा!

Thu, 20 Oct 2016 02:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 20 Oct 2016 02:43 AM IST
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Reeta bahuguna joshi could be a big lose for congress.
रीता बहुगुणा और सोनिया गांधी

रीता बहुगुणा जोशी भाजपा में शामिल हों या न हों, पर उन्हें लेकर जिस तरह की अटकलों का बाजार गर्म है उसने कांग्रेस के ब्राह्मण कार्ड की हवा निकाल दी है।

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विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को आगे करके ब्राह्मण कार्ड खेला, पर प्रदेश कांग्रेस की कद्दावर नेताओं में गिनी जाने वाली रीता के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं ने ब्राह्मणों के सहारे यूपी की सत्ता की चाबी हासिल करने के  कांग्रेस के मंसूबे पर पानी फेर दिया है। इन चर्चाओं से कांग्रेस का समीकरण गड़बड़ाता नजर आ रहा है।
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हालांकि अभी रीता की ओर से पार्टी छोड़ने का औपचारिक एलान नहीं किया गया और भाजपा भी इससे इन्कार कर रही है, लेकिन कांग्रेस भीतर चल रही उथल-पुथल इस बात का संकेत दे रही है कि सब कुछ ठीक नहीं है।
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भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर रीता की ‘खामोशी’ ने भी कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है।

मोर्चा लेने में कभी पीछे नहीं रहीं रीता बहुगुणा

Reeta bahuguna joshi could be a big lose for congress.

रीता की नाराजगी अनायास ही नहीं है। बतौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उनके जुझारूपन की चर्चा लखनऊ से दिल्ली तक होती रही है। चाहे बसपा की सरकार रही हो या फिर सपा की, रीता मोर्चा लेने में कभी पीछे नहीं रहीं।

मायावती सरकार में तो उन्हें इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ी जब उनका घर तक जला दिया गया। इसके बावजूद उनके जुझारूपन में कोई कमी नहीं आई। यह बात अलग है कि प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी और आपसी खींचतान के चलते उन्हें अध्यक्ष पद से हटना पड़ा, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ की कैंट सीट से चुनाव जीतकर उन्होंने अपना दबदबा तो दिखा ही दिया। रीता की नाराजगी की एक वजह शीला दीक्षित भी हैं।

खांटी ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाली रीता को पंजाबन बहू को ब्राह्मण के रूप में पेश करके सीएम का चेहरा प्रोजेक्ट किया जाना रास नहीं आ रहा है। यही नहीं चुनाव अभियान के दौरान हाशिये पर रखे जाने से भी वे आहत बताई जाती हैं।

राज बब्बर को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपे जाने के बाद उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गई। राहुल गांधी की किसान यात्रा के दौरान तवज्जो नहीं मिलने की टीस भी उनके मन में है।

प्रमोद को अहमियत मिलने से भी नाखुश

Reeta bahuguna joshi could be a big lose for congress.

शीला दीक्षित को सीएम का चेहरा बनाए जाने के अलावा कांग्रेस आलाकमान की ओर से प्रमोद तिवारी को ज्यादा अहमियत दिए जाने से भी रीता नाखुश हैं। रीता की प्रमोद तिवारी के साथ अदावत जग जाहिर है।

रीता जहां बसपा-सपा से मोर्चा लेती रहीं, वहीं प्रमोद पर परोक्ष रूप से सपा व बसपा की मदद करने का आरोप लगता रहा है। प्रमोद खुद भी सपा की मदद से राज्यसभा पहुंचे तो बेटी को भी अपनी परंपरागत सीट से चुनाव जितवाया।

रीता का दर्द है कि सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने और पार्टी के लिए किए गए उनके योगदान की हाईकमान की नजर में कोई अहमियत नहीं रह गई है, उल्टे उनके प्रतिद्वंद्वी प्रमोद तिवारी को विधानसभा चुनाव में ज्यादा ही तवज्जो दी जा रही है।

भाजपा के लिए फायदा ही फायदा

Reeta bahuguna joshi could be a big lose for congress.

भाजपा की तरफ से फिलहाल रीता के पार्टी में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया जा रहा है, लेकिन वे भाजपा में शामिल होती हैं तो पार्टी को कई फायदे होंगे। पहला तो यह कि भाजपा रीता को आगे करके कांग्रेस के ब्राह्मण कार्ड का काउंटर करेगी।

दूसरा मायावती के खिलाफ भी उन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है। महिलाओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए भाजपा ने मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले अपने निष्कासित नेता दया शंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह को पहले ही मोर्चे पर लगा रखा है।

ऐसे में मायावती की सताई हुई रीता भी साथ आ जाती हैं तो मायावती के खिलाफ मुहिम को और धार मिल सकती है। महिला कांग्रेस पर रीता की मजबूत पकड़ है। ऐसे में वह भाजपा में जाती हैं तो बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता भी पार्टी छोड़ सकती हैं।

लेकिन भाजपाई भाई की ओर से इन्कार
कांग्रेस से बगावत कर भाजपा का दामन थाम चुके उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व रीता बहुगुणा जोशी के बड़े भाई विजय बहुगुणा ने अपनी बहन के भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं को खारिज किया है। विजय बहुगुणा का कहना है कि रीता भाजपा में शामिल नहीं हो रही हैं।

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