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ऑक्सीजन के कम उत्पादन ने बढ़ाई कालाबाजारी, प्रदेश में सिर्फ दो ही लिक्विड ऑक्सीजन प्रोडक्शन प्लांट

Fri, 18 Sep 2020 11:10 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 18 Sep 2020 11:10 AM IST
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reduced production of oxygen increased black marketing in uttar pradesh
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

प्रदेश में मेडिकल ऑक्सीजन गैस का कम उत्पादन कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहा है। कोरोना काल में ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत कई गुना बढ़ गई है। इसके चलते रेट भी दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। वहीं, मांग बढ़ने से रीफिलिंग में भी दिक्कतें आ रही हैं।

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प्रदेश में आईनॉक्स और गोयल गैसेस दो ही ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता हैं। प्रदेश में कई बड़े चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों में सीधे इनकी आपूर्ति है। इसके अलावा, 20 से अधिक ऐसे ऑक्सीजन सिलेंडर आपूर्तिकर्ता हैं, जो दूसरे राज्यों से बड़े सिलेंडर मंगाकर छोटे-छोटे में रीफिल करके आपूर्ति करते हैं। 
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ऑक्सीजन आपूर्ति से जुड़े एक व्यापारी बताते हैं कि देहरादून, राउरकेला, पानीपत, जमशेदपुर आदि में बड़े लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट हैं। पहले इनसे भी यूपी में ऑक्सीजन की आपूर्ति हो जाती थी। अन्य राज्यों ने दूसरे प्रदेशों को ऑक्सीजन आपूर्ति करने पर रोक लगा दी। इसके चलते बढ़ी हुई ऑक्सीजन की मांग पूरी करने में दिक्कतें आने लगी। ऑक्सीजन की अचानक कमी और कोरोना महामारी के कारण मांग बढ़ने से सिलेंडर के दाम बढ़ते चले गए।

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सिलेंडर की कमी भी पड़ रही भारी

सरकार ने सभी कोविड केयर सेंटर और लेवल-टू के अस्पतालों में हर बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इस समय लेवल वन और कोविड केयर सेंटर में 70 हजार से अधिक बेड हैं। इसी तरह लेवल टू के 75 अस्पतालों में 20 हजार से अधिक बेड हैं।

हर बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के कारण बाजार में अचानक सभी तरह के सिलेंडर की कमी हो गई। बेड पर पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए जंबो सिलेंडर चाहिए। जबकि बेड पर बी टाइप और मरीज को ट्रांसपोर्ट करने के लिए ए टाइप सिलेंडर की जरूरत होती है।

अचानक ऑक्सीजन की मांग बढ़ने से सिलेंडर की कमी हो गई। इस कारण भी अचानक ऑक्सीजन के  रेट बढ़ गए। एक अस्पताल के संचालक ने बताया कि कोई भी अस्पताल यदि 100 सिलेंडर रखता है तो उसमें 50 खाली सिलेंडर प्लांट पर रीफिल होने के लिए पड़े रहते हैं। जबकि अन्य 50 अस्पताल में रहते हैं। इसलिए भी दिक्कतें बढ़ी हैं।

ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी भी दूर की जा रही है। कालाबाजारी को रोकने के लिए छापेमारी शुरू की गई है। मुजफ्फरनगर में एक प्लांट सील किया गया है। - एके जैन, ड्रग कंट्रोलर, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग 
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