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विधानसभा में भर्ती मामला: हाईकोर्ट ने कहा होगी सीबीआई जांच, तथ्यों से पता चला यह किसी भर्ती घोटाले से कम नहीं

Wed, 04 Oct 2023 07:11 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 04 Oct 2023 07:11 AM IST
सार

विधान परिषद की ओर से कहा गया है कि मामले में अभी कोई केस दर्ज नहीं हुआ है। ऐसे में किसी आपराधिक आशय का खुलासा नहीं हुआ।

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Recruitment case in Assembly-Council: High Court said CBI investigation would have happened
लखनऊ हाईकोर्ट

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विधानसभा व विधान परिषद में स्टाफ की भर्ती मामले की सीबीआई से जांच के आदेश के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार की अर्जी मंगलवार को खारिज कर दी। विधान परिषद के प्रमुख सचिव और दो अन्य लोगों ने पुनर्विचार की अर्जी दाखिल कर मामले में कोर्ट के दिए सीबीआई जांच के आदेश पर दोबारा गौर करने का आग्रह किया था।
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न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि पहली नजर में तथ्यों से पता चला कि यह किसी भर्ती घोटाले से कम नहीं है। इसमें बाहरी एजेंसी के जरिये सैकड़ों अभ्यर्थियों को अवैधानिक व गैरकानूनी तरीके से नियुक्ति दी गई। इन्हीं तथ्यों की वजह से कोर्ट को असाधारण क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल कर सीबीआई को मामले की शुरुआती जांच करने का आदेश देना पड़ा।
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कोर्ट ने कहा कि मामले में दाखिल विशेष अपील में इस भर्ती में भाई-भतीजावाद और चहेतों को नियुक्ति दिलाने में अफसरों की मिलीभगत होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अगर ये आरोप सही पाए गए तो यह न सिर्फ सांविधानिक प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन का मामला भी होगा, वहीं भर्ती प्रक्रिया में शामिल वरिष्ठ अधिकारी भी शिकंजे में आएंगे।
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कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को लेकर पहली नजर में पूरी संतुष्टि के बाद ही 18 सितंबर को हमने सीबीआई को प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया था। लिहाजा अब इनमें आगे जाना जरूरी नहीं है। यह भी कहा कि इस स्तर पर हमने सिर्फ एक निष्पक्ष जांच एजेंसी से रिपोर्ट मांगी है। हमारी इच्छा किसी अवस्थापना के लिए असहज स्थिति पैदा करना या उच्च स्तर के लोगों की छवि को चोट पहुंचाना नहीं है, जब तक जांच एजेंसी तथ्यों का सत्यापन नहीं करती है। कोर्ट ने कहा कि हमें बताया गया कि सीबीआई ने मामले में बीते 22 सितंबर को पीई दर्ज कर ली है। इससे सत्य से पर्दा उठेगा। इन कारणों को देकर कोर्ट ने पुनर्विचार की अर्जी को मेरिट विहीन बताते हुए खारिज कर दी।


इससे पहले विधान परिषद की ओर से कोर्ट में कहा गया कि इसमें अभी तक कोई आपराधिक मामला सामने नहीं आया है। लिहाजा सीबीआई जांच का आदेश दोबारा गौर करने योग्य है। उधर, अपीलकर्ता के अधिवक्ता शोभित मोहन शुक्ल का कहना था कि कोर्ट ने मामले का स्वयं संज्ञान लेकर पीआईएल दर्ज कराई है। सीबीआई को शुरुआती जांच करके रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। ऐसे में यह पुनर्विचार अर्जी खारिज करने योग्य है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से विशेष अधिवक्ता संदीप दीक्षित ने सुनवाई के दौरान मामले की जांच सीबीआई से कराने के बजाय हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज से कराने का आग्रह भी किया।
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