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Lucknow News: लारी में एक वर्ष में हुई एंजियोप्लास्टी का रिकॉर्ड तलब

Sat, 06 Jun 2026 03:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 03:27 AM IST
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Record of angioplasty done in Lari in one year summoned
लखनऊ। केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी विभाग में कागजों पर 15 मरीजों को पांच-पांच स्टेंट लगाने की जांच तेज हो गई है। कमेटी ने विभाग से जानकारी मांगी है कि आयुष्मान भारत व अन्य सरकारी योजनाओं के तहत बीते एक वर्ष में कितने मरीजों की एंजियोप्लास्टी हुई। इससे विभाग में खलबली मची है।
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कार्डियोलॉजी में 15 मरीजों में पांच-पांच स्टेंट लगाने की जांच चल रही है। कागजों की जांच से पता चला है कि इन मरीजों को बार-बार भर्ती कर स्टेंट लगाए गए। मरीजों की फाइल में हिस्ट्री दर्ज करने में लापरवाही बरती गई। आशंका है कि स्टेंट के नाम पर आयुष्मान योजना में खेल हुआ है।
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जांच समिति ने अब आयुष्मान योजना के तहत स्टेंट लगाने से जुड़े नियमों, तय बजट और अनुमन्य प्रक्रिया का विवरण मांगा है। साथ ही पिछले एक वर्ष में विभाग में हुई एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि रिकॉर्ड मिलने के बाद कमेटी मरीजों की फाइलों, एंजियोग्राफी रिपोर्ट, एंजियोप्लास्टी के दस्तावेज और इलाज संबंधी अन्य कागजात की गहनता से जांच करेगी। दूसरे संस्थानों के हृदय रोग विशेषज्ञों से परामर्श लेकर कमेटी तय करेगी कि संबंधित मामलों में अपनाई गई इलाज की प्रक्रिया ठीक थी या नहीं। ऐसे मामलों की भी जांच होगी, जिनमें किसी मरीज को एक से अधिक बार भर्ती किया गया हो या अलग-अलग बार-बार स्टेंट लगाए गए हों।





रोजाना होती है 40-50 एंजियोप्लास्टी

लारी में रोजाना 40-50 मरीजों की एंजियोप्लास्टी होती है। एक एंजियोप्लास्टी पर करीब 70-80 हजार रुपये का खर्च आता है। आयुष्मान व दूसरी योजनाओं के मरीजों की यह प्रक्रिया मुफ्त में होती है। जांच कमेटी का कहना है कि आयुष्मान व अन्य योजनाओं में पंजीकृत मरीजों के अभिलेखों की गहनता से जांच कराई जा रही है।




आयुष्मान योजना के तहत होती है बायोमेट्री

आयुष्मान योजना के तहत मरीजों की बायोमेट्री कराई जाती है। इसमें मरीज की फोटो व आधार समेत अन्य जरूरी दस्तावेज लगाकर पोर्टल पर अपलोड करके सांचीज को भेजा जाता है। वहां से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद ऑपरेशन की रकम केजीएमयू को मिलती है। अब सांचीज ने भी रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है।
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