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शिया व सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश

Sun, 13 Oct 2019 01:09 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Avdhesh Kumar Updated Sun, 13 Oct 2019 01:09 AM IST
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Recommendation of Shia and Sunni Central Waqf Board to be investigated by CBI
शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी - फोटो : amar ujala
प्रदेश सरकार ने शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है। प्रयागराज और लखनऊ में दर्ज मुकदमों को इसका आधार बनाया गया है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा अनियमित रूप से क्रय विक्रय और स्थानांतरित की गई वक्फ संपत्तियों की जांच और विवेचना सीबीआई से कराए जाने का फैसला किया गया है। 
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उन्होंने बताया कि इस संबंध में सचिव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय भारत सरकार और निदेशक सीबीआई को पत्र भेज दिया गया है। पत्र में  प्रयागराज के कोतवाली में 26 अगस्त 2016 को दर्ज शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड और 27 मार्च 2017 को हजरतगंज कोतवाली में दर्ज मुकदमों की जांच सीबीआई से कराए जाने का अनुरोध किया गया है।
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इस मामले में पहली एफआईआर प्रयागराज के कोतवाली थाने में दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में इमामबाड़ा गुलाम हैदर त्रिपोलिया, पुरानी जीटी रोड पर अवैध रूप से दुकानों का निर्माण शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के द्वारा शुरू कराया गया था। इसे क्षेत्रीय अवर अभियंता निरीक्षण के बाद पुराने भवन को तोड़कर किए जा रहे अवैध निर्माण को बंद करा दिया था। बाद में फिर से निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। 
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इसे रोकने के लिए कई पत्र लिखे गए फिर भी निर्माण कार्य बदस्तूर जारी रहा। अवर अभियंता द्वारा 7 मई 2016 को उक्त स्थल को सील करा दिया गया। सील बंदी की कार्यवाही के बाद भी चेयरमैन की शह पर अवैध निर्माण बदस्तूर जारी रहा। निर्माण कार्य बंद न होने पर अवर अभियंता सुधाकर मिश्रा ने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी को नामजद करते हुए 26 अगस्त 2016 को एफआईआर दर्ज करा दी गई। वसीम रिजवी के खिलाफ आईपीसी की धारा 447 और 441 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

वहीं दूसरी एफआईआर जो लखनऊ के हजरतगंज थाने में 27 मार्च 2017 को दर्ज की गई थी, में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी व वक्फबोर्ड के अधिकारियों पर 27 लाख रुपये लेकर कानपुर में वक्फ की बेशकीमती संपत्ति का पंजीकरण निरस्त करने और पत्रावली से महत्वपूर्ण कागजात गायब करने का आरोप लगाया था। 

कानपुर देहात निवासी तौसीफुल हसन के द्वारा दर्ज कराई गई थी। तौसीफुल ने पुलिस में शिकायत की थी कि उनकी मां की संपत्ति गाटा संख्या 86, स्कीम 7 बी गुटइया नगर निगम नंबर 7/196 स्वरूप नगर, कानपुर नगर की मालिक हैं और जमीन पर काबिज हैं। यह संपत्ति शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड में नियमानुसार पंजीकृत है। पास में ही रहने वाले नरेश कृष्ण सोमानी और विजय कृष्ण सोमानी ने सफदर महमूद को इस संपत्ति की पूर्व मालिक महमूदा बेगम का फर्जी पुत्र बनाकर  काल्पनिक नाम अब्दुल सत्तार रखकर संपत्ति को हड़पना चाहते हैं। 

काल्पनिक नाम के अब्दुल सत्तार के प्रार्थनापत्र को 18 मार्च 2009 को वसीम रिजवी ने खारिज कर दिया था। लगभग ढाई महीने बाद 29 मई 2009 को वक्फ के चेयरमैन वसीम रिजवी, वक्फ के प्रशासनिक अधिकारी गुलाम सैयदैन रिजवी व वक्फबोर्ड के निरीक्षक बाकर रजा ने 27 लाख रुपये लेकर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इस संपत्ति के वक्फ के रजिस्ट्रेशन को निरस्त कर दिया।     

इन्हीं दोनों मामलों की जांच अब सीबीआई से कराने का निर्णय लिया गया है। शिया वक्फ बोर्ड के साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड में हुई अनियमितता की जांच भी सीबीआई से कराने की सिफारिश की गई है। हालांकि सुन्नी वक्फ बोर्ड के किसी मुकदमे को फिलहाल स्थानांतरित नहीं किया गया है।
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