बेनी की घर वापसी, मुलायम का बड़ा दिल ही नहीं सियासी मजबूरी भी
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‘जो व्यक्ति विधानसभा चुनाव में अपने बेटे की जमानत नहीं बचा पाया वह राहुल गांधी को अगला पीएम बनाने की बात कर रहा है।’ कभी बेनी प्रसाद वर्मा पर यह टिप्पणी करने वाले और उनके द्वारा खुद को आतंकवादी बताने से नाराज होकर लोकसभा की कार्यवाही न चलने देने वाले मुलायम सिंह यादव ने शुक्रवार को उन्हीं बेनी बाबू को पार्टी में शामिल ही नहीं कर लिया बल्कि तारीफों के पुल भी बांध दिए।
पर, इसकी वजह सिर्फ मुलायम का बड़ा दिल नहीं बल्कि बड़ी सियासी मजबूरी है। जिसने उन्हें बेनी बाबू की कटु टिप्पणियों को भुलाकर सपा में शामिल करने के लिए मजबूर कर दिया।
राजनीति के चतुर खिलाड़ी मुलायम जानते हैं कि सत्ता से बाहर रहने पर चुनाव लड़ना और सत्ता में होने पर चुनाव लड़ने में काफी फर्क है। उन्हें इस बात का भी एहसास है कि 2017 में अखिलेश सरकार के विकास के कामों के सहारे ही सत्ता में वापसी आसान नहीं होगी।
हर चुनाव में मौजूदा सरकार के खिलाफ आमतौर पर रहने वाला एक माहौल किसी न किसी रूप में इसमें भूमिका अदा करेगा। इसीलिए उन्होंने बेनी प्रसाद वर्मा को शामिल करके पुत्र अखिलेश यादव की वापसी के लिए सूबे के जातीय समीकरणों को संतुलित करके सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है।
यह भी है कारण
मुलायम को पता है कि 2017 में जातियों की गणित की बड़ी भूमिका निभाएगी। केशव मौर्य के भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें शायद यह लगने लगा है कि कि भाजपा लोकसभा चुनाव की तरह ही विधानसभा चुनाव में भी पिछड़ा कार्ड खेलेगी। इससे निपटने के लिए उनके पास भी पिछड़ा व मुसलमान समीकरण ही है।
शायद इसीलिए उन्होंने बेनी को पार्टी में वापस लेकर और आजम को बगल में बैठाकर तथा यह कहकर कि उनकी सरकार ने हर थाने में चार-चार मुस्लिम पुलिस कर्मी तैनात किए हैं, भाजपा की अगड़ा व पिछड़ा के जवाब में पिछड़ा व मुसलमान समीकरण फिट बैठाने की कोशिश की है।
मुलायम की नजर कुर्मी वोट बैंक पर
प्रदेश की 54 प्रतिशत आबादी में यादवों के बाद कुर्मी ही सबसे बड़ा वोट बैंक हैं। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इसे भाजपा के साथ माना जा रहा है। बेनी बाबू कुर्मियों के बड़े नेता ही नहीं माने जाते हैं बल्कि पूर्वांचल में उनकी कुर्मी बिरादरी में पकड़ भी ठीक-ठाक मानी जाती है।
मुलायम ने इसी वोट बैंक को अपने पक्ष में खींचने की कोशिश की है। उनकी निगाह प्रदेश की आबादी में 8 प्रतिशत यादव, 5 प्रतिशत कुर्मी व 20 प्रतिशत मुस्लिम आबादी पर है।