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...तो इसलिए नपे प्रमुख गृह सचिव

Thu, 17 Oct 2013 07:55 PM IST
विष्णु मोहन/लखनऊ
विष्णु मोहन/लखनऊ Updated Thu, 17 Oct 2013 07:55 PM IST
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reason behind suspension of home secretary

सत्ता में गहरी पकड़ रखने वाले प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव यूं ही नहीं हटाए गए। इसके पीछे कई कारण थे।

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कुछ कारणों पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी उनसे नाराज थे। ऊपर से गृह सचिव सर्वेश चंद्र मिश्र की ओर से जारी एक विवादास्पद चिट्ठी ने रही-सही कसर पूरी कर दी।

प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर बार-बार सवाल उठे। फैजाबाद, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, अंबेडकर नगर, बरेली, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत आदि में पिछले कुछ महीनों के दौरान सांप्रदायिक संघर्ष हुए।
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समय से हिंसा रोकने में सरकार की नाकामी हर बार सामने आती रही। इसी वजह से पिछले दिनों राज्य सरकार ने पहले डीजीपी एसी शर्मा को हटाया और फिर दो अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था हटाए गए।
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पहले जगमोहन यादव को हटाकर उनकी जगह पर तेज-तर्रार अरुण कुमार को लाया गया। बाद में अरुण कुमार को भी हटा दिया गया और कुछ दिनों पहले ही मुकुल गोयल को इस पद पर लगाया गया।

उल्लेखनीय है कि एसी शर्मा, जगमोहन यादव व अरुण कुमार की समाजवादी पार्टी में ऊंचे स्तर तक मजबूत पैठ थी।

जब एसी शर्मा को हटाया गया तब भी प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव के हटने की चर्चा थी, लेकिन पंचम तल तक अफसरों की लॉबी सक्रिय हो गई थी और वे बच गए थे।

जानकार बताते हैं कानून-व्यवस्था के अलावा पुलिस अधिकारियों की तैनाती को लेकर श्रीवास्तव के मनमाने रैवये से भी मुख्यमंत्री परेशान थे।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री के निर्देश पर आईपीएस अधिकारियों के तबादले की एक लंबी सूची जारी हुई पर उसमें से कई अधिकारियों के तबादले मौखिक तौर पर रोक दिए गए थे।

बार-बार उनकी तैनाती को लेकर सवाल उठते रहे, लेकिन प्रमुख सचिव गृह के दखल के कारण इसे कई दिन बाद ही अंतिम रूप दिया जा सका।

मुख्यमंत्री द्वारा किए गए तबादलों में कई संशोधन कर दिए गए। उस समय भी आरएम श्रीवास्तव को हटाए जाने की चर्चा जोरों पर रही, पर एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों की लॉबी उनके लिए संकट मोचन बनी।

जानकारों की मानें तो बार-बार अफसरों की लॉबी की ओर से पैरवी किया जाना भी आरएम श्रीवास्तव के लिए भारी पड़ गया। रही-सही कसर पिछले दिनों गृह सचिव सर्वेश चंद्र मिश्र द्वारा जारी विवादास्पद पत्र ने पूरी कर दी।

मिश्र ने इस पत्र को खुद ही लिखवाया और अपने दस्तखतों से जारी किया पर जब मामले ने तूल पकड़ा तो सेक्शन ऑफिसर पीपी पांडे को दोषी करार दे निलंबित कर दिया गया।

सर्वेश चंद्र मिश्र को आरएम श्रीवास्तव ने बचाने की कोशिश भी की थी, लेकिन उनकी पैरवी काम न आई। जैसे ही पत्र जारी करने की असलियत ऊपर तक पहुंची, सर्वेश चंद्र को भी निलंबित कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, सर्वेश चंद्र मिश्र के साथ ही आरएम श्रीवास्तव को हटाए जाने पर विचार-विमर्श हुआ था पर अफसरों की इस लॉबी ने एक बार फिर उनका बचाव करने की कोशिश की और सारा ठीकरा सर्वेश चंद्र मिश्र पर फोड़ दिया गया।

हालांकि बात ऊपर तक पहुंच गई और प्रमुख सचिव गृह के पद से आरएम श्रीवास्तव को हटा दिया गया। सूत्र बताते हैं कि एकाएक लिए गए इस निर्णय की जानकारी अफसरों की उस सशक्त लॉबी को समय रहते नहीं हो पाई और आरएम श्रीवास्तव के तबादले के आदेश जारी हो गए।

एक कारण यह भी
चर्चा इस बात की भी है कि बड़े पैमाने पर पुलिस अधिकारियों को डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध करने और महीनों तक उनकी तैनाती न किए जाने की शिकायत भी ऊपर तक पहुंची।

असल में डीजीपी मुख्यालय से संबद्धता के दौरान पुलिस अधिकारियों को तनख्वाह नहीं मिलती है क्योंकि वे किसी विभाग में तैनात नहीं होते हैं। अगर उन्हें मुख्यालय में तैनाती दी जाती है तभी मुख्यालय से उनकी तनख्वाह बनती है।


सूत्रों की मानें तो डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कुछ अधिकारियों ने दशहरा पर मुख्यमंत्री को बधाई संदेश देते हुए खुद का त्योहार अंधेरे में होने की बात कह दी और इसकी वजह संबद्धता के दौरान तनख्वाह न मिलना बताया।

मुख्यमंत्री ने इस पर डीजीपी देवराज नागर व प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव से जवाब तलब किया, लेकिन उनके स्पष्टीकरण से सीएम संतुष्ट नहीं हुए थे। माना जा रहा है कि आरएम को हटाए जाने में इस कारण ने भी अहम भूमिका निभाई।

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