रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरने से फट गया था कोटा-पटना एक्सप्रेस का डीजल टैंक, आठ घंटे ठप रहा संचालन
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दरियाबाद-पटरंगा रेलवे स्टेशन के बीच में रेल ट्रैक पर गिरे पेड़ की चपेट में आकर कोटा-पटना एक्सप्रेस ट्रेन के इंजन का डीजल टैंक फट गया। यात्रियों से खचाखच भरी ट्रेन हादसे के बाद हाहाकार मच गया। चालक की सतर्कता से बड़ा रेल हादसा टल गया और कोई हताहत नहीं हुआ। पुलिस और रेल विभाग के टीम द्वारा आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दूसरा इंजन मंगवाकर ट्रेन को रवाना किया जा सका।
हादसे से रेल की पटरी भी बुरी तरह से टूट गई। इस दौरान कई ट्रेनों का संचालन दूसरे रूट से कराया गया। घटना को लेकर पेड़ गिरा या साजिश के तहत किया गया इसकी भी जांच विभाग कर रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साजिश नहीं बल्कि पेड़ गिरने के कारण ही हादसा हुआ है।
शनिवार की देर रात पटना-कोटा एक्सप्रेस थाना दरियाबाद क्षेत्र के गांव पतुलकी के निकट पहुंची थी तभी रेलवे लाइन पर एक सूखी लकड़ी का बोटा दिखाई दिया। इसको देखकर ड्राइवर छोटेलाल ने ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगाई। इमरजेंसी ब्रेक लगने के बाद ट्रेन के इंजन के दो पहिये पटरी से उतर गए तथा टूटा पेड़ बोगी में फंसकर पांच-सात मीटर तक घिसटता चला गया। इससे इंजन का डीजल टैंक फट गया। रात के समय जब हादसा हुआ तो ज्यादातर यात्री नींद में थे।
बताते है कि तेज झटके के कारण कई यात्री अपनी सीटों से आकर नीचे गिर गए व चीख-पुकार मच गई। यात्रियों को मामूली चोटें भी आई। ट्रेन के डिरेल होने की खबर स्टेशन मास्टर दरियाबाद और पटरंगा को दी गई। दोनों ने अपने क्षेत्र के स्थानीय पुलिस को बताया। एसपी वीपी श्रीवास्तव ने एएसपी शशिकांत तिवारी को तुरंत मौके पर भेजकर आस पास के थानों की पुलिस को भेजा। काफी देर बाद अफसरों को राहत तब मिली जब पता चला कि सभी यात्री सुरक्षित हैं। पुलिस, प्रशासन ने मौके पर एंबुलेंस बुलाई। जानकारी पर पहुंचे डीआरएम सतीश कुमार ने देखते ही कहा कि एक बड़ा हादसा टल गया है।
दूसरा इंजन लगाकर आठ घंटे बाद रवाना हुई ट्रेन
कोटा-पटना एक्सप्रेस ट्रेन हादसा होने के करीब आठ घंटे तक रेल पटरी व इंजन की मरम्मत का कार्य चलता रहा। रविवार की सुबह फैजाबाद से दूसरा इंजन मंगाकर ट्रेन को रवाना किया जा सका। इस दौरान पूरे रेल ट्रैक पर यातायात बाधित होने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामाना करना पड़ा।
दो जगह टूटी पटरी, सैकड़ों चाभी हुई क्षतिग्रस्त
हादसा इतना जबरदस्त था कि रेलवे लाइन की करीब सैकड़ों चाभी टूट गयी और पटरी भी दो जगहों पर टूट गयी। इतना ही नहीं इंजन भी काफी क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रेन को रवाना करने के लिये करीब आठ घंटे तक मरम्मत कार्य हुआ। पटरी तो सही हो गयी किन्तु इंजन को दुरुस्त नहीं किया जा सका जिसके बाद दूसरा इंजन बुलाकर ट्रेन को रवाना किया गया।