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कांग्रेस को सीट देकर सपा ने उतारा पुराना कर्ज!

Wed, 11 Dec 2013 12:36 PM IST
राजेन्द्र सिंह/लखनऊ
राजेन्द्र सिंह/लखनऊ Updated Wed, 11 Dec 2013 12:36 PM IST
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reason behind gifting lok sabha seat to congress

चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बावजूद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की कांग्रेस पर मेहरबानी के मायने तलाशे जा रहे हैं।

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राज्यसभा की सीट के लिए कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी को सपा के समर्थन के गहरे सियासी मायने हैं।

हालांकि प्रमोद तिवारी इसे राजनीतिक शिष्टाचार बताते हैं लेकिन राजनीतिक हल्कों में माना जा रहा है कि सपा और कांग्रेस के बीच अंदरखाने कुछ पक रहा है।

सपा नेता मोहन सिंह के निधन से खाली हुई सीट पर तो सपा ने उनकी बेटी कनकलता सिंह को प्रत्याशी बना दिया था लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद रशीद मसूद को अयोग्य ठहराए जाने से खाली हुई सीट पर सपा के दावेदारों की लंबी लिस्ट थी।
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इनमें मुस्लिम सियासत से जुड़े सपा के कई नेता भी थे। लेकिन, सपा ने कार्यकर्ताओं के लिहाज से अप्रत्याशित फैसला लेते हुए यह सीट प्रमोद तिवारी के लिए छोड़ दी।
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उनकी नामजदगी ने सियासी हल्कों को खूब चौंकाया। सपा के कई नेता मंगलवार सवेरे तक भी अटकलें लगा रहे थे कि कौन प्रत्याशी होगा। प्रमोद तिवारी को राज्यसभा में भेजने के सपा के फैसले के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं।

कहा जा रहा है कि सपा ने कन्नौज लोकसभा के उपचुनाव में डिंपल यादव के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी खड़ा नहीं करने में प्रमोद तिवारी की भूमिका के लिए उनका आभार जताने के लिए यह फैसला किया है।

पूरे घटनाक्रम को चार राज्यों में कांग्रेस की करारी हार और वोटरों के मिजाज से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

माना यह भी जा रहा है कि लचीले मिजाज के प्रमोद तिवारी सपा नेताओं से नजदीकी रिश्तों के चलते कांग्रेस-सपा के बीच ब्रिज की भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इस फैसले के निहितार्थ खोज रहे हैं। हालांकि सपा ने इस पर अधिकृत तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

कांग्रेस नहीं थी सीट जीतने की स्थिति में
विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस इस स्थिति में नहीं थी कि राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी भी उतार सके। मुख्य विपक्षी दल बसपा तक ने प्रत्याशी खड़ा करने की नहीं सोची।

जाहिर है कि दोनों राज्यसभा सीटें सपा के खाते में जानीं थी। सपा से कुछ मुस्लिम नेताओं समेत कई लोगों के नाम भी उछले। आखिर में कांग्रेस और सपा के बीच सहमति बनी।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चूंकि यह सीट कांग्रेस नेता के अयोग्य घोषित होने के नाते खाली हुई थी, इसलिए सपा ने नैतिकता के नाते इसे कांग्रेस को दे दिया।

राजा भैया के लिए सबक
प्रमोद तिवारी जिस प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास सीट से लगातार नौ बार विधायक चुने गए हैं, उसी जिले की राजनीति में कुंडा सीट से रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया विधायक हैं।

स्थानीय राजनीति में प्रमोद तिवारी और राजा भैया विपरीत ध्रुव हैं। सपा ने तिवारी को अहमियत देकर एक तरह से राजा भैया को चेतावनी दे दी है।

राजा भैया ने चार मार्च 2013 को सीओ जियाउलहक हत्याकांड के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 10 अक्तूबर को फिर से मंत्री बनाया गया है।

ब्राह्मणों को संदेश देने की कोशिश
सपा ने प्रमोद तिवारी को राज्यसभा भेजने को हरी झंडी देकर ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश की है। प्रतापगढ़ में राजाराम पांडे सपा का ब्राह्मण चेहरा थे।

उनके निधन के बाद सपा ने प्रमोद तिवारी को राज्यसभा भेजने में मदद देकर प्रतापगढ़ ही नहीं पूर्वांचल में भी ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश की है। सपा को लोकसभा चुनाव में इसका लाभ मिलने का भरोसा है।

डील पर सिद्धांत की चादर डालने की कोशिश
प्रमोद तिवारी को राज्यसभा सीट के लिए वॉकओवर देने की सपा-कांग्रेस की डील पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री ने सिद्धांत की चादर डालने की कोशिश की।


उन्होंने कहा कि राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस नेता रशीद मसूद की सदस्यता खत्म हो जाने के बाद रिक्त हुई थी। इस सीट को सपा और अन्य विपक्षी दलों ने कांग्रेस के प्रमोद तिवारी के लिए छोड़ दिया।

इसके लिए उन्होंने सभी दलों का आभार भी जताया। कांग्रेस नेता इसे राजनीति की नैतिकता बताकर दोनों दलों के बीच पक रही खिचड़ी से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

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