क्या मोदी-क्या राहुल का 'घर', हर जगह बदहाल मीड डे मील
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दूध में डिटर्जेंट समेत कई खतरनाक रसायन मिलने की बात मानने वाली सरकार नौनिहालों की सेहत पर भी लापरवाह बनी हुई है।
स्कूलों में मिलने वाला मिड-डे मील बच्चों के लिए कितना सेहतमंद है, गुणवत्ता कैसी है, कहीं इसमें घटिया राशन का प्रयोग तो नहीं किया जा रहा, इसकी चिंता किसी को नहीं है।
जांच की बात तो दूर लखनऊ समेत प्रदेश के किसी भी जिले में नमूने तक नहीं लिए गए। चौंकाने वाली यह जानकारी अमर उजाला की एक आरटीआई में सामने आई है। यही हालत राशन दुकानों से वितरित होने वाले अनाज की भी है।
दिलचस्प बात यहै कि इसमें में राहुल की अमेठी से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की वाराणसी जिलों तक के नाम हैं।
इन जिलों ने दिए रिपोर्ट
वहीं मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने व मिलावटखोरों की धरपकड़ के लिए जिम्मेदार खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।
आरटीआई के जवाब में राजधानी लखनऊ, प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी, हरदोई, फैजाबाद, मिर्जापुर, फर्रुखाबाद, मुजफ्फरनगर, महराजगंज, कानपुर नगर व कानपुर देहात, फीरोजाबाद, अमरोहा, गोरखपुर, अंबेडकरनगर, सिद्धार्थनगर, बागपत, देवरिया व बाराबंकी सहित प्रदेश के अन्य सभी जिलों में नामित एफएसडीए के अफसरों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक एक भी नमूना लैब टेस्टिंग के लिए नहीं लिया गया। साथ ही किसी भी तरह की जांच पड़ताल भी नहीं की गई।
क्या कहता है कानून
एफएसडीए एक्ट कहता है कि फूड आइटम की श्रेणी में आने वाली राशन की दुकानों से वितरित होने वाले अनाज, स्कूलों में मिड-डे-मील व आंगनबाड़ी केंद्रों से गांवों में बांटे जाने वाले दोपहर के नाश्ते व भोजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के साथ तैयार खाद्य आइटम की नियमित सैंपलिंग कर लैब में टेस्ट कराया जाए ताकि इसकी गुणवत्ता व शुद्धता जांची जा सके।
नमूनों की सैंपलिंग तक नहीं
प्रदेश के 50 से अधिक जिलों से मिले विभागीय अधिकारियों के जवाब से यह खुलासा हुआ कि किसी भी जिले में एफएसडीए के अफसरों ने नौनिहालों व गरीब आदमी की सेहत से सीधे जुड़े इस मामले से कोई सरोकार नहीं रखा।
न तो नमूनों की सैंपलिंग की गई और न ही कोई जांच हुई।