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UP Election 2022: यूपी की नौतनवां, ज्ञानपुर, मऊ सदर और मधुबन में क्या है सियासी माहौल, देखें- ये रिपोर्ट

Thu, 03 Mar 2022 12:12 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 03 Mar 2022 12:12 PM IST
सार

यूपी की नौतनवां, ज्ञानपुर, मऊ सदर और मधुबन सीट पर इस बार सियासी माहौल अलग है। नौतनवां सीट पर भाजपा को 2017 में भी जीत नहीं मिल पाई थी। ज्ञानपुर सीट पर बिंद और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। मऊ सदर सीट पर मुख्तार अंसारी के रसूख को कड़ी चुनौती मिल रही है। मधुबन सीट पर बागी और नाराज नेता समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

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बसपाः अमनमणि, निषाद पार्टीः ऋषि त्रिपाठी, सपाः कौशल सिंह, कांग्रेसः सदामोहन। - फोटो : amar ujala

विस्तार

(संजय कुमार पांडेय)। महराजगंज जिले की नौतनवां विधानसभा सीट पर इस बार भी सबकी नजरें हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि यहां का चुनाव कुंवर बंधु और मणि परिवार के नाम पर ही होता है। मोदी लहर में भी निर्दलीय प्रत्याशी अमनमणि त्रिपाठी को जीत मिली थी। इस बार वह बसपा से चुनाव मैदान में हैं। वहीं, भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी ने ऋषि त्रिपाठी, सपा ने कुंवर कौशल सिंह, तो कांग्रेस ने सदामोहन उपाध्याय को मैदान में उतारा है। इस बार चुनाव में सियासी समीकरण कुछ अलग हैं। त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी, सपा एवं बसपा हैं। बहरहाल, कांग्रेस भी पूरा जोर लगाए हुए है।
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भारत नेपाल सीमा से सटे विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी चुनाव लड़ते थे। वह जेल में सजा काट रहे हैं। फिर भी उनका दखल इस सीट पर रहता है। इस बार जातीय समीकरण उलझे हुए हैं। कांग्रेस, भाजपा गठबंधन, बसपा से ब्राह्मण प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। सियासी पंडितों का मानना है कि इससे ब्राह्मण मतों का बिखराव हो रहा है। वहीं, सपा ने क्षत्रिय प्रत्याशी उतारा है। मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव सपा की तरफ दिख रहा है। बसपा भी उन्हें अपने पाले में लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। मौजूदा विधायक अमनमणि त्रिपाठी के प्रति क्षेत्र में नाराजगी भी है। इसका भी असर परिणाम पर पड़ सकता है। उनके प्रति नाराजगी को कैश करने में विरोधी खेमा लगा भी हुआ है। भाजपा गठबंधन ने भी मजबूत प्रत्याशी उतारा है।
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ये है वोटों का गणित
ब्राह्मण    85 हजार
यादव     50 हजार
एससी     70 हजार
मुस्लिम     65 हजार
क्षत्रिय     25 हजार
वैश्य     46 हजार
अन्य     18 हजार

2017 का चुनाव परिणाम
अमनमणि त्रिपाठी, निर्दल 79,666
कुं. कौशल किशोर सिंह, सपा  47,410
समीर त्रिपाठी, भाजपा 45,050
एजाज अहमद, बसपा 26,210

ज्ञानपुर : विजय रथ रोकने के लिए भारी किलेबंदी

(सुजीत शुक्ला)। दुनिया को मखमली कालीन देकर पहचान बनाने वाले कालीन नगरी यानी भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला हैं। 21वीं सदी की शुरुआत से ही इस सीट पर कब्जा जमाए बाहुबली विधायकों में शुमार विजय मिश्र के विजय रथ को रोकने के लिए विपक्षियों ने किलेबंदी की है। फिलहाल उन्हें चुनौती सपा और भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी से मिल रही है। वहीं, बसपा भी ध्रुवीकरण की राजनीति में अपनी रोटी सेंकने के जुगाड़ में है। 30 साल से सीट पाने की चाहत में कांग्रेस ने भी स्थानीय छात्रनेता को उम्मीदवार बनाकर घेरने की कोशिश की है।

इस सीट का 2002 से मिजाज और अंदाज बदल गया। विजय मिश्र का दबदबा इस सीट पर हो गया। तीन बार उन्होंने साइकिल दौड़ाई और एक बार निषाद पार्टी से चुनाव जीते। पांचवीं बार विधायक बनने के लिए वह जेल से ही प्रगतिशील मानव समाज पार्टी से चुनावी मैदान में हैं। भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी से उनके सामने विपुल दुबे हैं, तो सपा ने पूर्व मंत्री रहे राम किशोर बिंद पर दांव खेला है। फिलहाल विजय मिश्र को चुनौती निषाद पार्टी व सपा से ही मिल रही है। बसपा से उपेंद्र सिंह मतदाताओं के ध्रुवीकरण से अपना समीकरण साध रहे हैं। कांग्रेस से यहां सुरेश चंद्र मिश्रा मैदान में हैं।  ब्राह्मण मतदाताओं की अधिकता वाली इस सीट पर बिंद मतदाता निर्णायक होते हैं।  सपा ने इस बार जातिगत आधार पर ही दांव खेला है।

ये है वोटों का गणित
ब्राह्मण    93 हजार
बिंद    64 हजार
यादव    55 हजार
एससी    45 हजार
मुस्लिम     34 हजार
वैश्य     18 हजार
अन्य ओबीसी     18 हजार
क्षत्रिय     15 हजार
मौर्या     14 हजार
पटेल     12 हजार
पाल     12 हजार

2017 का चुनाव परिणाम
विजय मिश्र, निषाद पार्टी 66,448
महेंद्र कुमार बिंद, भाजपा 46,218
राजेश कुमार यादव, बसपा 44,319
रामरती बिंद, सपा 39,209

मऊ सदर : मुख्तार के रसूख को मिल रही कड़ी चुनौती

(रजनीकांत पांडेय)। पिछले 25 वर्षों से एक ही व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमने वाली सदर विधानसभा सीट का चुनाव इस बार एकतरफा नहीं दिख रहा है। मुस्लिम बहुल इस सीट पर सपा गठबंधन में शामिल सुभासपा के टिकट पर निवर्तमान विधायक मुख्तार अंसारी के पुत्र मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा ने मुख्तार के कट्टर विरोधी ठाकुर बिरादरी के जुझारू युवा अशोक कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाया है।
बसपा ने क्षेत्र में राजभर बिरादरी के संख्या बल को देखते हुए पुराने सिपहसालार भीम राजभर पर दांव लगाया है। कांग्रेस भी ठाकुर बिरादरी के युवा चेहरे माधवेंद्र बहादुर को मैदान में उतारा है। बहरहाल यहां मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है।

अब्बास अंसारी को पिता के कई चुनावों के संचालन और खुद भी 2017 में घोसी क्षेत्र से बसपा से चुनाव लड़ने का अनुभव है। जबकि, भाजपा प्रत्याशी अशोक सिंह का यह पहला चुनाव है। भाई की हत्या में आरोपी विधायक मुख्तार के खिलाफ हर मोर्चे पर खड़े रहने से अशोक सिंह एक वर्ग में काफी लोकप्रिय हैं, जिससे वह मुख्य मुकाबले में खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं, बसपा के भीम राजभर भी अनुभवी हैं। 2012 के चुनाव में उन्होंने कड़ी चुनौती पेश की थी। माधवेंद्र सिंह का यह पहला चुनाव है। उनके पिता सुरेश बहादुर सिंह राजनीतिक दांवपेच में माहिर माने जाते हैं। सदर विधानसभा सीट पर 1996 से 2017 तक लगातार पांच चुनाव जीतने वाले मुख्तार के लिए कोई दल या किसी पार्टी का समर्थन का मुद्दा महत्व नहीं रखता है। वह 2002 और 2007 में निर्दलीय भी चुनाव जीत चुके हैं। (संवाद)


ये है वोटों का गणित
मुस्लिम    1.70 लाख
एससी    70 हजार
यादव    90 हजार
चौहान    45 हजार
क्षत्रिय    45 हजार
वैश्य    21 हजार

2017 का चुनाव परिणाम
मुख्तार अंसारी, बसपा 96,793
महेंद्र राजभर, सुभासपा 88,095
अल्ताफ  अंसारी, सपा 72,016
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मधुबन : तगड़ी नाकेबंदी से हुआ चतुष्कोणीय मुकाबला

पूर्वांचल में मधुबन विधानसभा सीट पर लड़ाई काफी दिलचस्प रहती है। यहां से वर्ष 2017 में पहली बार भाजपा को जीत मिली थी। इस बार भी भाजपा को सपा, बसपा और कांग्रेस के चक्रव्यूह को तोड़ने की चुनौती है। सभी अपना जोर लगाए हुए हैं। इस क्षेत्र में सपा और भाजपा को भितरघात और बागी से जूझना पड़ रहा है, जिससे लड़ाई चतुष्कोणीय नजर आ रही है।

2012 से पूर्व नत्थूपुर विधानसभा के नाम से प्रसिद्ध मधुबन विधानसभा में चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे दारा सिंह चौहान ने इस बार सीट के साथ पार्टी भी बदल ली। वे अब साइकिल पर सवार होकर घोसी चले गए हैं। वहीं, तीसरी बार विधायक बनने के लिए उमेश पांडेय सपा से तो अमरेश चंद्र पांडेय कांग्रेस से भाग्य आजमा रहे हैं। भाजपा ने यहां से नए चेहरे रामविलास चौहान को तो बसपा ने नीलम कुशवाहा को मैदान में उतारा है।

कहीं बागी न बिगाड़ दें समीकरण : मधुबन में भाजपा के बागी भरत भइया विकासशील इंसान पार्टी से चुनाव मैदान में हैं। पिछले एक दशक से क्षेत्र में चुनाव की तैयारी में जुटे रहे भरत भइया को टिकट नहीं मिला तो वे बागी हो गए। वहीं, सपा के उमेश पांडेय की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। सुधाकर सिंह का टिकट कटने का सवाल उन पर भारी पड़ रहा है।

दल बदल कर आए उमेश को बीच में मिला मौका  : हाथी की सवारी करने वाले उमेश पांडेय वर्ष 2020 में सपा में आए थे। जिन्हें प्रत्याशी भी बड़े नाटकीय ढंग से बनाया गया, पहले यहां से सुधाकर सिंह को प्रत्याशी घोषित किया गया। जिन्होंने नामांकन भी कर दिया था, लेकिन पार्टी आलाकमान ने उनका टिकट काटकर उमेश पांडेय पर भरोसा जताया।

ये है वोटों का गणित
एससी    70 हजार
राजभर    25 हजार
यादव    60 हजार
चौहान    24 हजार
ब्राह्मण     16 हजार
मुसलमान 22 हजार

2017 का चुनाव परिणाम
दारा सिंह, भाजपा 86,238
अमरेश चंद, कांग्रेस 56,823
उमेश पांडेय, बसपा 54,803

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