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नगीना : दलितों का रुख होगा निर्णायक, भाजपा के लिए पारस की हैट्रिक रोकने की बड़ी चुनौती

Sat, 05 Feb 2022 02:45 AM IST
ishwar ashish रजनीश त्यागी, अमर उजाला, बिजनौर
रजनीश त्यागी, अमर उजाला, बिजनौर Published by: ishwar ashish Updated Sat, 05 Feb 2022 02:45 AM IST
सार

बिजनौर की नगीना विधानसभा सीट पर दलितों का रुख निर्णायक होगा। भाजपा के लिए पारस की हैट्रिक रोकने की बड़ी चुनौती है। जनता की चुप्पी से प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ रही है।

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भाजपा: डॉ यशवंत सिंह, बसपा: बृजलाल सिंह, कांग्रेस: हैनरीता राजीव सिंह, सपा-रालोद: मनोज पारस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काष्ठ उत्पादों को लेकर देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी पहचान रखने वाली नगीना सुरक्षित विधानसभा सीट पर इस बार चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प है। हर साल यहां से करीब 400 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। चुनावों की बात करें तो सपा-रालोद गठबंधन से विधायक मनोज पारस मैदान में हैं। दो बार से विधायक रहे मनोज पारस की जीत की हैट्रिक रोकने की चुनौती भाजपा के सामने है। जातीय समीकरण जटिल होने से बाजी उलझी हुई है। सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मतदाताओं के बिखराव को रोकने की है।

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भाजपा ने पूर्व सांसद डॉ. यशवंत सिंह को इस बार मैदान में उतारा है। डॉ. यशवंत 2014 में नगीना से सांसद चुने गए थे। हालांकि, 2019 में वे हार गए थे। बसपा से बृजपाल सिंह और कांग्रेस से पूर्व मंत्री ओमवती की पुत्रवधू हैनरीता राजीव सिंह चुनावी मैदान में हैं। ओमवती खुद भी इस सीट से विभिन्न दलों से चार बार विधायक रह चुकी हैं। 2012 में वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गई थीं। नगीना सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। कांग्रेस यहां सात बार जीत का स्वाद चख चुकी है। सपा पिछले दो चुनाव के साथ कुल चार बार जीत हासिल करने में कामयाब रही है। भाजपा और बसपा ने इस सीट को दो-दो बार फतह किया।
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मुकाबला सपा और भाजपा में
नगीना सीट सपा का गढ़ रही है। रामलहर में 1991 में भाजपा के ओमप्रकाश विजयी हुए थे। इसके बाद साल 1998 के उपुचनाव में लवकुश कुमार ने बाजी मारी। इन दोनों चुनावों को छोड़ दें तो भाजपा इस सीट पर जीत नहीं हासिल कर सकी। सियासी पंडितों का कहना है कि 2017 की तरह ही इस बार भी मुकाबला सपा-भाजपा के बीच होगा। बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी भी एक कोण बनने की कोशिश में जुटे हुए हैं। जैसा माहौल है उससे साफ है कि इस बार मुकाबला रोमांचक होने जा रहा है। चुनाव में कड़ी टक्कर होगी। दलितों का रुख परिणाम को बदल सकता है।
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प्रत्याशियों के समर्थकों ने गांवों में संभाल रखा है मोर्चा
नगीना सीट पर सपा का अच्छा खासा मतदाता वर्ग है। इसी के सहारे मनोज पारस लगातार दो बार से जीत दर्ज कराते आ रहे हैं। दूसरी पार्टियों के उम्मीदवार जिस तरह से सेंधमारी की कोशिशों में जुटे हैं, उससे जमीन पर समीकरण बदल रहे हैं। पर, आम मतदाता खामोश है। यही खामोशी सियासी दलों को परेशान किए हुए है। मतदाताआंे का मिजाज समझने और उन्हें साधने के लिए उम्मीदवारों ने गांव-गांव में अपने समर्थकों को प्रचार में उतार रखा है। इसके बाद भी मतदाताओं की चुप्पी टूट नहीं रही है।

ये है वोटों का गणित

3,46,035 कुल मतदाता
1,83,358 पुरुष
1,62,665 महिला
मुस्लिम 1.30 लाख
अनुसूचित जाति 80 हजार
सैनी 35 हजार
चौहान 9 हजार
जाट 20 हजार
कश्यप 10 हजार
भुइयार 9 हजार
2017 का चुनाव परिणाम
मनोज कुमार पारस, सपा 77,145
ओमवती देवी, भाजपा 69,178
वीरेंद्र पाल, बसपा 49,693
नीलम, एआईएमआईएम 4385
यादराम सिंह चंदेल, रालोद 2113

ये हैं चुनावी मुद्दे
- नगीना कोतवाली मार्ग पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज की समस्या
- बंद पड़ी कताई मिल को चालू कराने की मांग
- राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की मांग।
- मिनी स्टेडियम बनाने की मांग।
- नए उद्योग लगाए जाने की मांग।

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