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यूपी: पीजीआई छोड़ अन्य चिकित्सा संस्थान उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव से खुश

Mon, 20 Sep 2021 04:51 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 20 Sep 2021 04:51 PM IST
सार

एसजीपीजीआई फैकल्टी फोरम इस मुद्दे पर विरोध करते हुए गवर्निंग बॉडी मीटिंग करने जा रहा है। फैकल्टी फोरम के सचिव प्रो. संदीप साहू ने कहा कि सेवानिवृत्ति की उम्र चिकित्सक की मानसिक और शारीरिक स्थितियों का आकलन करके तय किया गया है। बढ़ती उम्र से चिकित्सक भी शारीरिक और मानसिक रूप से रोगी देखभाल में सक्षम नहीं होंगे।

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Reaction on increasing retirement age of doctors.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सा संस्थानों में चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 70 साल किए जाने के प्रस्ताव का कहीं विरोध हो रहा है तो कहीं समर्थन। चिकित्सा शिक्षकों के अलग-अलग तर्क हैं। पीजीआई के चिकित्सकों ने फैसले पर नाराजगी जताई है और लोहिया संस्थान व केजीएमयू ने इस पहल का स्वागत किया है।

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विरोध करने वालों का कहना है कि उम्र सीमा बढ़ाने से पहले सरकार को व्यवस्थागत खामियां दूर करनी चाहिए। मेडिकल कॉलेजों एवं संस्थानों में खाली पदों को भरने के लिए सुविधाएं बढ़ानी होगी। ताकि यहां तैयार होने वाले चिकित्सक विदेश जाने के बजाय प्रदेश में ही सेवाएं देने को आतुर हों।
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पीजीआई का तर्क, छात्रों के लिए कम होंगे फैकल्टी जॉब के मौके
एसजीपीजीआई फैकल्टी फोरम इस मुद्दे पर विरोध करते हुए गवर्निंग बॉडी मीटिंग करने जा रहा है। फैकल्टी फोरम के सचिव प्रो. संदीप साहू ने कहा कि सेवानिवृत्ति की उम्र चिकित्सक की मानसिक और शारीरिक स्थितियों का आकलन करके तय किया गया है। बढ़ती उम्र से चिकित्सक भी शारीरिक और मानसिक रूप से रोगी देखभाल में सक्षम नहीं होंगे।
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चिकित्सा सेवाओं में सुधार के लिए नई ऊर्जा और आधुनिक सुविधा की जरूरत होती है। यदि 70 साल की व्यवस्था लागू होती है तो नए छात्रों को फैकल्टी जॉब का मौका कम होगा। इसलिए सरकार को जनता और युवा डॉक्टरों के भविष्य और कॅरिअर को ध्यान में रखते हुए सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि नहीं करनी चाहिए। हर विभाग के रोटेटरी हेडशिप व्यवस्था लागू किया जाना चाहिए। ताकि सभी संकाय सदस्यों को प्रशासनिक अनुभव प्राप्त हो सके।

मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं बढ़ाएं

लोहिया संस्थान के फैकल्टी फोरम के सचिव डॉ. ईश्वर राम धायल ने इस फैसले को सही बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जाए। इससे चिकित्सा संस्थानों में लंबे समय से कार्य करने वालों को सुपर स्पेशिशियलिटी सेवा का अवसर मिलेगा। चिकित्सा संस्थान हो या मेडिकल कॉलेज वहां कार्य करने वालों की स्थितियों का वर्गीकरण करना होगा। क्लीनिकल, टीचिंग और एकेडमिक कार्य का निर्धारण करके ही उन्हें प्रोफेसर या अन्य पदों पर पदोन्नति करना चाहिए। इससे चिकित्सकों में कार्य के प्रति रुचि बढे़गी।

चंद लोगों का नुकसान, ज्यादा का फायदा
केजीएमयू फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष डॉ. केके सिंह ने सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 70 साल किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ वे लोग दुखी हैं, जो विभागाध्यक्ष बनने का ख्वाब देख रहे हैं। अन्य किसी भी संकाय सदस्य को कोई नुकसान नहीं है। इतना जरूर है कि सरकार को कार्य और व्यवहार का भी मूल्यांकन कराना चाहिए। जो चिकित्सा शिक्षक मरीजों की सेवा और बेहतरीन चिकित्सक तैयार करने के अभियान में लगे हैं, उन्हें प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। उन्होंने विभागाध्यक्ष के लिए रोटेशन प्रणाली लागू करने की मांग की। कहा कि इससे सभी प्रोफेसरों को मौका मिलेगा।

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