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कैबिनेट का फैसला: सरकारी कामकाज के लिए कंसलटेंट की दरें निर्धारित

Tue, 11 Sep 2018 11:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 11 Sep 2018 11:32 PM IST
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rate fixed for consultant who work for government
cm yogi - फोटो : amar ujala

राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों के कामकाज में सहयोग के लिए एम्पैनल्ड सेवा प्रदाता संस्थाओं (अधिकृत कंसलटेंट कंपनियां) की दरें निर्धारित कर दी हैं। विभाग अब अधिकृत सेवा संस्थाओं से ही निर्धारित दरों पर कार्य करा सकेंगे। कैबिनेट ने मंगलवार को इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी।

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राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि सरकार ने विभागीय कार्यों के लिए सीनियर लेवल, मिड लेवल और जूनियर लेवल की कंसलटेंट कंपनियों से अनुबंध के आधार पर सेवा प्राप्त करने के लिए पारिश्रमिक, डीए और लॉजिंग की दरों का निर्धारण किया है।
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सेवा प्रदाता संस्थाओं का ई निविदा के जरिए पैनल तैयार किया गया है। संस्थाओं के रिसोर्सेज, लॉजिंग और डीए की प्रत्येक श्रेणी के लिए प्राप्त न्यूनतम दरों पर उन्हें कार्य करने की सहमति दी गई है।
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विकास कार्यों, योजनाओं और कार्यक्रमों के समयबद्ध एवं गुणात्मक क्रियान्वयन में सहयोग के लिए इन संस्थाओं की सेवाएं ली जाएंगी। विभाग सेवा प्रदाता संस्था से जरूरत के अनुसार निर्धारित दर पर एक निश्चित अवधि के लिए सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे।

गोरखपुर में बनेगी एडवांस फोरेंसिक लैब

योगी कैबिनेट ने गोरखपुर में क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फोरेंसिक लैब)  के निर्माण के लिए पुनरीक्षित योजना को मंजूरी दे दी है। इस पर 33.21 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि पूर्व में प्रदेश में 18 विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के निर्माण के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति हुई थी।

गोरखपुर में विधि विज्ञान प्रयोगशाला को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, अपराधों की संख्या व प्रकृति और थानों की संख्या को देखते हुए श्रेणी बी से ए में उच्चीकृत कर दिया गया है। पहले श्रेणी ए में गाजियाबाद, कन्नौज और आगरा को रखा गया था।

गोरखपुर को झांसी, इलाहाबाद, मुरादाबाद और वाराणसी के साथ श्रेणी बी में रखा गया था। अभी तक प्रदेश में लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा और वाराणसी में एक-एक विधि विज्ञान प्रयोगशाला है। 12 जिलों में फोरेंसिक लैब बनाने का कार्य चल रहा है। गोरखपुर में बनने वाली लैब के लिए राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। 

यूपीएसआईडीसी से यूपीसीडा में आए कर्मियों को मिलेंगे प्राधिकरण के लाभ

प्रदेश कैबिनेट ने यूपीएसआईडीसी से यूपीसीडा में शामिल कर्मियों को भी यूपी औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयत सेवा नियमावली-2018 के दायरे में लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे इन कर्मियों को भी औद्योगिक विकास प्राधिकरण के कर्मियों के समान सभी तरह की सुविधाएं मिलेंगी और एक प्राधिकरण से दूसरे में तबादले की व्यवस्था लागू हो सकेगी।

सरकार ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे, गीडा, सीडा, लीडा, यूपीसीडा व यूपीडा के कार्मिकों की सेवाओं में एकरूपता लाने और सेवा-शर्तों, पदनाम, वेतनमान को समान बनाने के लिए यूपी औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयत सेवा नियमावली-2018 को 22 जून को मंजूरी दी थी। हाल में यूपीएसआईडीसी के कार्मिकों का यूपीसीडा में विलय हो चुका है। 

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