{"_id":"6898f279d802122b4107b450","slug":"rare-six-cases-of-skin-tb-reported-in-kgmu-lucknow-news-c-13-lko1070-1332538-2025-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुर्लभ : केजीएमयू में आए त्वचा टीबी के छह मामले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुर्लभ : केजीएमयू में आए त्वचा टीबी के छह मामले
विज्ञापन
लखनऊ। ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) की समस्या फेफड़ों के साथ ही त्वचा में भी हो सकती है। किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में तीन साल में इस तरह के छह मामले सामने आए हैं। त्वचा संबंधी इलाज कराकर थक चुके ये रोगी राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मिली दवाओं से पूरी तरह ठीक हो गए।
केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि त्वचा संबंधी टीबी दुर्लभ मामला है। संस्थान में डाॅ. दीपिका रावत, डाॅ. किरणप्रीत मल्होत्रा, डाॅ. हिमांशु निरवाल, डाॅ. पारुल वर्मा, डाॅ. उर्मिला सिंह और डाॅ. स्वस्तिका सुवीर्या ने इन छह केस को संकलित किया है। इसे ट्रॉपिकल डॉक्टर जर्नल के अगस्त के अंक में स्थान मिला। केजीएमयू में मरीज जनवरी 2022 से जनवरी 2025 के बीच आए। इनमें से किसी को कलाई के ऊपर त्वचा संबंधी विकार थे, तो किसी को चेहरे और गर्दन में न ठीक होने वाली घाव की समस्या थी। कुहनी और घुटनों पर भी घाव की समस्या लेकर रोगी त्वचा रोग विभाग पहुंचे थे। शुरुआती इलाज में फायदा न होने पर इनकी टीबी संबंधी जांच कराई गई, जिसमें टीबी के बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मिलीं निशुल्क दवाओं से इनका उपचार हुआ। अब ये सभी स्वस्थ हैं।
एचआईवी रोगियों में टीबी का संक्रमण ज्यादा
केजीएमयू में हुए और अगस्त में एक्सेस माइक्रोबायोलाॅजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, टीबी का खतरा एचआईवी रोगियों में ज्यादा रहता है। डाॅ. आकांक्षा सोनी, डाॅ. विमला वेंकटेश, डाॅ. पारुल जैन, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. डी. हिमांशु रेड्डी, डाॅ. नीतू गुप्ता और डाॅ. ऋतु टंडन ने यह अध्ययन किया है। इसमें एचआईवी रोगियों में एक बार ठीक होने के बाद दोबारा भी टीबी होने के मामले पाए गए।
विज्ञापन
बाल और नाखून छोड़कर हर अंग में हो सकता है टीबी
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के सदस्य प्रो. सूर्यकांत के मुताबिक, त्वचा में टीबी होना दुर्लभ मामला है। हालांकि, यह सत्य है कि बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के हर अंग में टीबी की बीमारी हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया जहां प्रविष्ट हो जाता है, शरीर का वह अंग टीबीग्रस्त हो जाता है। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मिलने वाली निशुल्क दवाओं से इसका इलाज संभव है। इसके लिए रोगी को नजदीकी केंद्र पर पंजीकरण कराना होगा।
विज्ञापन
केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि त्वचा संबंधी टीबी दुर्लभ मामला है। संस्थान में डाॅ. दीपिका रावत, डाॅ. किरणप्रीत मल्होत्रा, डाॅ. हिमांशु निरवाल, डाॅ. पारुल वर्मा, डाॅ. उर्मिला सिंह और डाॅ. स्वस्तिका सुवीर्या ने इन छह केस को संकलित किया है। इसे ट्रॉपिकल डॉक्टर जर्नल के अगस्त के अंक में स्थान मिला। केजीएमयू में मरीज जनवरी 2022 से जनवरी 2025 के बीच आए। इनमें से किसी को कलाई के ऊपर त्वचा संबंधी विकार थे, तो किसी को चेहरे और गर्दन में न ठीक होने वाली घाव की समस्या थी। कुहनी और घुटनों पर भी घाव की समस्या लेकर रोगी त्वचा रोग विभाग पहुंचे थे। शुरुआती इलाज में फायदा न होने पर इनकी टीबी संबंधी जांच कराई गई, जिसमें टीबी के बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मिलीं निशुल्क दवाओं से इनका उपचार हुआ। अब ये सभी स्वस्थ हैं।
विज्ञापन
एचआईवी रोगियों में टीबी का संक्रमण ज्यादा
केजीएमयू में हुए और अगस्त में एक्सेस माइक्रोबायोलाॅजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, टीबी का खतरा एचआईवी रोगियों में ज्यादा रहता है। डाॅ. आकांक्षा सोनी, डाॅ. विमला वेंकटेश, डाॅ. पारुल जैन, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. डी. हिमांशु रेड्डी, डाॅ. नीतू गुप्ता और डाॅ. ऋतु टंडन ने यह अध्ययन किया है। इसमें एचआईवी रोगियों में एक बार ठीक होने के बाद दोबारा भी टीबी होने के मामले पाए गए।
विज्ञापन
बाल और नाखून छोड़कर हर अंग में हो सकता है टीबी
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के सदस्य प्रो. सूर्यकांत के मुताबिक, त्वचा में टीबी होना दुर्लभ मामला है। हालांकि, यह सत्य है कि बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के हर अंग में टीबी की बीमारी हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया जहां प्रविष्ट हो जाता है, शरीर का वह अंग टीबीग्रस्त हो जाता है। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मिलने वाली निशुल्क दवाओं से इसका इलाज संभव है। इसके लिए रोगी को नजदीकी केंद्र पर पंजीकरण कराना होगा।