{"_id":"6a92ea37075e76698b027712","slug":"rare-choledochal-cyst-removed-from-five-year-old-child-successful-robotic-surgery-performed-at-kgmu-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ: पांच साल के बच्चे में दुर्लभ कोलेडोकल सिस्ट निकाली गई, केजीएमयू में रोबोट के जरिये हुआ सफल ऑपरेशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ: पांच साल के बच्चे में दुर्लभ कोलेडोकल सिस्ट निकाली गई, केजीएमयू में रोबोट के जरिये हुआ सफल ऑपरेशन
Sat, 29 Aug 2026 07:48 PM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Sat, 29 Aug 2026 07:48 PM IST
सार
लखनऊ में पांच साल के बच्चे में दुर्लभ कोलेडोकल सिस्ट निकाली गई है। केजीएमयू में रोबोट के जरिये यह सफल ऑपरेशन हुआ। डॉक्टरों का दावा एक लाख बच्चों में किसी एक में यह सिस्ट होती है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
केजीएमयू में डॉक्टरों ने सर्जरी कर बचाई जान। (सांकेतिक)
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू में पांच साल के बच्चे की रोबोटिक सर्जरी जरिये पित्त नली की विकृत गांठ का सफल ऑपरेशन किया गया। बच्चे को एक वर्ष की उम्र से रुक-रुककर पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। कई डॉक्टरों से इलाज के बाद आराम नहीं मिला। इसके बाद परिजन उसे केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की ओपीडी में लेकर पहुंचे। जांच में कोलेडोकल सिस्ट की पुष्टि हुई।
विज्ञापन
पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की डॉ. अर्चिका गुप्ता और उनकी टीम ने बच्चे की रोबोटिक सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान पेट में चार छोटे की-होल चीरे लगाए गए। प्रभावित पित्त नली में पनपी सिस्ट को बाहर निकाला। उसके बाद आंत में पित्त के सामान्य बहाव के लिए नया रास्ता बनाया गया। बच्चे को ऑपरेशन के बाद कम दर्द हुआ। उसने जल्द ही खाना-पीना शुरू कर दिया।
विज्ञापन
कोलेडोकल सिस्ट पित्त नली के असामान्य रूप से फैलने की स्थिति है। इससे पित्त के आंत तक पहुंचने में बाधा हो सकती है। पेट दर्द, पीलिया व बार-बार संक्रमण जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। समय पर पहचान और सर्जरी से आगे की जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।
विज्ञापन
डॉ. अर्चिका गुप्ता के मुताबिक, रोबोटिक तकनीक से छोटे ऑपरेटिंग क्षेत्र में भी बेहतर विजुअलाइजेशन और सटीकता मिली तथा आसपास के ऊतकों को कम नुकसान पहुंचाते हुए सर्जरी संभव हुई। डॉ. अर्चिका गुप्ता ने बताया एक से डेढ़ लाख बच्चों में किसी एक में यह सिस्ट होती है।