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11 साल में बनी तीन सरकार पर एक जैसा हाल, किसी न किसी MLA पर लगे ये दाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 14 Apr 2018 03:51 PM IST
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डेमो
- फोटो : अमर उजाला
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ग्यारह साल, तीन सरकार। बसपा, सपा फिर भाजपा। तीनों में ही किसी न किसी एमएलए पर बलात्कार का आरोप। तीनों में दिखा आरोपी विधायकों को बचाने को सियासी संरक्षण। पुलिस का चलन एक जैसा। उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं बदला।
खुद को पार्टी विद द डिफरेंस बताने वाली भाजपा की सरकार में भी। कुलदीप सिंह सेंगर ही नहीं, इनसे पहले सपा सरकार में गायत्री प्रसाद प्रजापति और उससे पहले बसपा की सरकार में पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के मामले में भी यही हुआ। तीनों में ही विधायक पर शिकंजा तब कसा जब सरकार की जमकर फजीहत हो गई।
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खुद को पार्टी विद द डिफरेंस बताने वाली भाजपा की सरकार में भी। कुलदीप सिंह सेंगर ही नहीं, इनसे पहले सपा सरकार में गायत्री प्रसाद प्रजापति और उससे पहले बसपा की सरकार में पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के मामले में भी यही हुआ। तीनों में ही विधायक पर शिकंजा तब कसा जब सरकार की जमकर फजीहत हो गई।
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मायावती की सरकार में ये थे दागी
पुरुषोत्तम द्विवेदी
- फोटो : डेमो
मायावती की सरकार में बांदा के नरैनी से विधायक पुरुषोत्तम द्विवेदी पर घर में काम करने वाली एक लड़की से बलात्कार के आरोप लगे। इसके बाद भी वह मूंछ पर ताव देते घूमते रहे।
द्विवेदी कहते रहे कि युवती ने मोबाइल सहित घर का कुछ सामान चुरा लिया था जब पूछताछ की तो रेप का आरोप लगा दिया। लड़की के परिवार वाले चिल्लाते रहे, पर सरकारी अमला विधायक को बचाने में जुटा रहा।
सरकार की किरकिरी होनेे के बाद गिरफ्तारी हुई। पुलिस से लेकर शासन तक सत्तारूढ़ दल के विधायक की बोली बोलता नजर आया। हालांकि बाद में द्विवेदी की गिरफ्तारी ही नहीं हुई, बल्कि न्यायालय से सजा भी हुई।
द्विवेदी कहते रहे कि युवती ने मोबाइल सहित घर का कुछ सामान चुरा लिया था जब पूछताछ की तो रेप का आरोप लगा दिया। लड़की के परिवार वाले चिल्लाते रहे, पर सरकारी अमला विधायक को बचाने में जुटा रहा।
सरकार की किरकिरी होनेे के बाद गिरफ्तारी हुई। पुलिस से लेकर शासन तक सत्तारूढ़ दल के विधायक की बोली बोलता नजर आया। हालांकि बाद में द्विवेदी की गिरफ्तारी ही नहीं हुई, बल्कि न्यायालय से सजा भी हुई।
गायत्री प्रजापति पर भी आरोप
गायत्री प्रजापति
गायत्री प्रजापति सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे यानी पुरुषोत्तम से ज्यादा पावरफुल। बलात्कार का आरोप लगा तो रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी वह कैबिनेट मंत्री बने रहे।
ऐसे में गिरफ्तारी का मामला लंबा खिंचना ही था। मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया। उसने तीखी प्रतिक्रिया करने के साथ ही एफआईआर का आदेश दिया।
बावजूद इसके पुलिस को गायत्री 15 मार्च 2017 को तब मिले जब विधानसभा चुनाव के नतीजों से यह तय हो गया कि अब सपा की नहीं, भाजपा की सरकार होगी।
ऐसे में गिरफ्तारी का मामला लंबा खिंचना ही था। मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया। उसने तीखी प्रतिक्रिया करने के साथ ही एफआईआर का आदेश दिया।
बावजूद इसके पुलिस को गायत्री 15 मार्च 2017 को तब मिले जब विधानसभा चुनाव के नतीजों से यह तय हो गया कि अब सपा की नहीं, भाजपा की सरकार होगी।
और अब सेंगर
कुलदीप सिंह सेंगर
- फोटो : amar ujala
उन्नाव कांड भी दब गया होता अगर जेल में बंद पीड़िता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने इस मामले को सुर्खियों में ला दिया। हंगामा बढ़ने पर सरकार ने एसआईटी को जांच सौंपी। काफी जद्दोजहद के बाद अब विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दबोचा है।
कुलदीप सेंगर के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने बयान दिया कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा, उसी तरह गायत्री के मामले में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि गायत्री प्रजापति को सरेंडर कर देना चाहिए।
पुरुषोत्तम के मामले में भी जब चारों तरफ से शिकंजा कस गया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि वह किसी को बख्शने वाली नहीं।
हालांकि कुलदीप के मामले में एक अंतर नजर आ रहा है जो सवाल भी खड़े कर रहा है। सवाल यह है कि गायत्री मामले में तत्कालीन अखिलेश सरकार को चिट्ठी लिखने वाले राज्यपाल राम नाईक इस बार चुप क्यों हैं।
कुलदीप सेंगर के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने बयान दिया कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा, उसी तरह गायत्री के मामले में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि गायत्री प्रजापति को सरेंडर कर देना चाहिए।
पुरुषोत्तम के मामले में भी जब चारों तरफ से शिकंजा कस गया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि वह किसी को बख्शने वाली नहीं।
हालांकि कुलदीप के मामले में एक अंतर नजर आ रहा है जो सवाल भी खड़े कर रहा है। सवाल यह है कि गायत्री मामले में तत्कालीन अखिलेश सरकार को चिट्ठी लिखने वाले राज्यपाल राम नाईक इस बार चुप क्यों हैं।